भारत-EU डील: टेक्सटाइल से कार तक दामों में राहत की उम्मीद; 10 पॉइंट्स में जानिए क्या-क्या होगा सस्ता

भारत और यूरोपीय संघ (EU) 27 जनवरी को अपने बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा करने जा रहे हैं। करीब 18 साल की लंबी बातचीत के बाद यह डील फाइनल होने जा रही है।

Ashutosh Kumar
अपडेटेड27 Jan 2026, 02:46 PM IST
भारत और यूरोपीय संघ ट्रेड डील
भारत और यूरोपीय संघ ट्रेड डील

भारत और यूरोपीय संघ (EU) 27 जनवरी को अपने बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा करने जा रहे हैं। करीब 18 साल की लंबी बातचीत के बाद यह डील फाइनल होने जा रही है, जिसे भारत-EU आर्थिक रिश्तों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस समझौते के तहत टेक्सटाइल, फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान सेक्टर से लेकर कार और वाइन तक आयात शुल्क में कटौती की उम्मीद है। साथ ही, सेवा क्षेत्र में नियमों को उदार बनाने पर भी सहमति बन सकती है। यह डील व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खोलने वाली मानी जा रही है।

टेक्सटाइल और फुटवियर को बड़ी राहत

FTA के तहत टेक्सटाइल, लेदर, अपैरल और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को आयात शुल्क में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। भारत ने इन सेक्टरों के लिए जीरो-ड्यूटी एक्सेस की मांग की है। इससे भारत के निर्यात और रोजगार सृजन को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है।

कार और वाइन पर ड्यूटी कट की संभावना

EU लंबे समय से कारों और वाइन पर भारत में ऊंचे टैरिफ कम करने की मांग कर रहा है। भारत ने कारों के लिए कोटा आधारित टैरिफ कट का प्रस्ताव रखा है। वाइन को पहले ही ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ समझौतों में शामिल किया जा चुका है।

सेवा क्षेत्र में नियम होंगे आसान

इस समझौते के तहत विभिन्न सेवा क्षेत्रों में नियमों को उदार बनाया जा सकता है। टेलीकॉम, ट्रांसपोर्ट, अकाउंटिंग और ऑडिटिंग जैसे सेक्टर शामिल हैं। इससे भारतीय प्रोफेशनल्स और कंपनियों को यूरोप में ज्यादा मौके मिलेंगे।

भारत की प्रमुख मांगें क्या रहीं

भारत ने टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वैलरी, हैंडीक्राफ्ट और लेदर सेक्टर के लिए विशेष रियायतें मांगी हैं। ये मांगें भारत की अन्य FTAs में भी शामिल रही हैं। बता दें कि UK, UAE और ऑस्ट्रेलिया के साथ ये मांगें पहले ही मानी जा चुकी हैं।

EU की प्राथमिकताएं

EU कारों और शराब जैसे उत्पादों पर टैरिफ कम कराना चाहता है। भारत में फिलहाल कारों पर 35 पर्सेंट से ज्यादा और शराब पर 100-125 पर्सेंट ड्यूटी है। FTA के तहत इन्हें चरणबद्ध तरीके से घटाया जा सकता है।

ऑटो सेक्टर को मिलेगा फायदा

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक, यह डील घरेलू ऑटो सेक्टर के लिए अहम होगी। इससे निर्यात बढ़ेगा और यूरोपीय कंपनियों के साथ नई साझेदारियां बनेंगी। भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।

कृषि और डेयरी सेक्टर सुरक्षित

संवेदनशील कृषि मुद्दों को इस समझौते से बाहर रखा गया है। EU अपने बीफ, शुगर और राइस बाजार को लेकर सतर्क है। वहीं, भारत ने अपने किसान और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा सुनिश्चित की है।

18 साल बाद फाइनल डील

भारत–EU FTA पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी। साल 2013 में बातचीत रुक गई थी और 2022 में दोबारा शुरू हुई। अब 18 साल बाद यह समझौता फाइनल होने जा रहा है।

टैरिफ स्ट्रक्चर की तस्वीर

EU भारत के सामान पर औसतन 3.8 पर्सेंट टैरिफ लगाता है, लेकिन श्रम-प्रधान सेक्टर पर करीब 10 पर्सेंट ड्यूटी है। भारत EU सामान पर औसतन 9.3 पर्सेंट ड्यूटी लगाता है। ऑटो, केमिकल और फार्मा सेक्टर में ड्यूटी ज्यादा है।

भारत-EU व्यापार की मौजूदा स्थिति

साल 2024-25 में भारत–EU का कुल वस्तु व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा। भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर रहा। EU भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बना हुआ है।

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