
Indian Workers Opportunities: जब अमेरिका, कनाडा जैसे पारंपरिक पसंदीदा देशों ने प्रवास (इमिग्रेशन) के नियमों को कड़ा किया है, तो भारतीय कामगारों के लिए दुनिया में नए दरवाजे खुलने लगे हैं। पश्चिमी देशों में बढ़ती नीतिगत सख्ती और सीमित वीजा अवसरों के बीच अब रूस, जापान और कई अन्य एशियाई और यूरोपीय देश भारत के लोगों की नई मंजिल बन रहे हैं।
भारत की जनसंख्या अब भी युवा और कामकाजी उम्र की है, जबकि विकसित देशों में जन्म दर घट रही है और कामकाजी आबादी सिकुड़ रही है। ऐसे में भारत जैसे देश के पास लाखों लोगों का श्रमबल है, जिसे दुनिया के मज़दूर-घाटे वाले देश अपनाना चाहते हैं। यही वजह है कि अब वैश्विक श्रम गतिशीलता एक नए मुकाम पर पहुंच रही है।
इस बदलते दौर में भारत सरकार ने अक्टूबर 2025 में ओवरसीज मोबिलिटी बिल का प्रस्ताव रखा है, जो 1983 के पुराने इमिग्रेशन कीनून की जगह लेगा। ये नया बिल भारतीय प्रवासी कामगारों के लिए एक सुरक्षित और सुगठित व्यवस्था बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। ये न केवल उनके विदेश में रोजगार के अवसरों को मजबूत करेगा, बल्कि उनकी सुरक्षित वापसी और पुनर्वास की भी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
रूस फिलहाल भारतीय कामगारों के लिए सबसे तेज उभरती मंजिल है। वहां की सरकार ने 2025 में विदेशी कुशल कामगारों के कोटा को 1.5 गुना बढ़ाकर 2.3 लाख करने की बात कही है। रूस के उपप्रधानमंत्री डेनिस मांटुरोव के मुताबिक, देश को केवल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ही करीब 8 लाख अतिरिक्त कर्मचारियों की ज़रूरत है। रूस ने अप्रैल 2026 से एक नई वर्क वीज़ा योजना शुरू करने का ऐलान किया है, जिसके तहत विदेशी प्रोफेशनल्स को तीन साल की अस्थायी या स्थायी निवास अनुमति (रेज़िडेंसी) दी जाएगी। इसमें भाषा परीक्षा की शर्त नहीं होगी और परिवार को साथ ले जाने की अनुमति भी मिलेगी।
हाल ही में हुए मोदी–पुतिन शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने श्रम सहयोग और व्यावसायिक प्रशिक्षण से जुड़ी दो बड़ी संधियाँ की हैं। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री का कहना है कि रूस की कंपनियां आईटी, निर्माण, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी फील्ड्स में भारतीय प्रतिभा की मांग कर रही हैं।
उधर, जापान ने भी अगस्त 2025 में भारत के साथ ह्यूमन रिसोर्स एक्शन प्लान पर दस्तखत किए हैं, जिसके तहत अगले पांच सालों में 5 लाख लोगों का आदान-प्रदान होगा, जिनमें से लगभग 50 हज़ार भारतीय कामगार होंगे। जापान के स्वास्थ्य, निर्माण, में भारतीय श्रमिकों की मांग बढ़ रही है। यह सहयोग सिर्फ नियोक्ता और कर्मचारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और पेशेवर समझ को भी गहरा करेगा।
इधर, टेक कंपनियों ने भी वैश्विक वीजा चुनौतियों को देखते हुए अपनी रणनीति बदली है। अमेरिका में H1B वीजा से जुड़ी अनिश्चितता के चलते अब भारत, सिंगापुर, नीदरलैंड और यूरोप जैसे गंतव्य कंपनियों की नई प्राथमिकता बन गए हैं। IIT प्लेसमेंट में भी अब जापान, सिंगापुर और यूरोप के प्रस्ताव बढ़ रहे हैं।
कुल मिलाकर, वैश्विक श्रम बाज़ार का नक्शा बदल रहा है। जहां एक ओर पश्चिमी देशों की नीतियाँ कठोर हो रही हैं, वहीं रूस, जापान और एशिया के अन्य देश भारतीय कामगारों के लिए नए अवसर खोल रहे हैं। भारत की जनसांख्यिकीय ताकत और सरकारी नीतियों की दिशा यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारतीय श्रमिक न केवल देश की, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था के भी महत्वपूर्ण स्तंभ बनेंगे।
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