अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस से तेल खरीद बंद करने पर सहमति जताई है। ट्रंप के मुताबिक, भारत-अमेरिका ट्रेड डील के तहत भारत अब अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा और संभव है कि वेनेजुएला से भी तेल आयात करे। इसी के साथ उन्होंने यह भी ऐलान किया कि भारतीय सामानों पर लगने वाला अमेरिकी टैरिफ 50 पर्सेंट से घटाकर 18 पर्सेंट कर दिया गया है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से इन दावों पर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
ट्रंप ने पहले भी दिया बयान
यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप ने ऐसा बयान दिया हो। कुछ दिन पहले भी उन्होंने एयर फोर्स वन में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत ईरान की बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। उस समय भी ट्रंप ने दावा किया था कि इस दिशा में अमेरिका के साथ एक समझ बन चुकी है, लेकिन भारत की ओर से तब भी कोई साफ बयान सामने नहीं आया था। इससे यह साफ है कि ट्रंप के बयान और भारत की आधिकारिक स्थिति के बीच फिलहाल अंतर बना हुआ है।
भारत इस वक्त 41 देशों से तेल खरीद रहा
दूसरी ओर, भारत सरकार का रुख ज्यादा संतुलित नजर आता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा था कि रूस से कच्चे तेल का आयात धीरे-धीरे कम जरूर हो रहा है, लेकिन इसे लेकर सरकार ने कोई सख्त आदेश नहीं दिया है। उन्होंने साफ किया कि तेल कंपनियां बाजार की स्थिति, कीमत और उपलब्धता को देखते हुए खुद फैसले ले रही हैं। पुरी के मुताबिक, भारत इस वक्त 41 देशों से तेल खरीद रहा है ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके।
25 पर्सेंट से नीचे आ गया आयात
आंकड़ों पर नजर डालें तो एक समय भारत रोजाना दो मिलियन बैरल से ज्यादा रूसी तेल खरीद रहा था। लेकिन जनवरी 2026 तक यह घटकर करीब 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और घटकर 8 से 10 लाख बैरल प्रतिदिन तक आ सकता है। रूस की हिस्सेदारी भारत के कुल तेल आयात में पहले करीब 35 पर्सेंट थी, जो अब 25 पर्सेंट से नीचे आ गई है।