
उड़ानों के बड़े संकट के बीच डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने इंडिगो एयरलाइंस पर कड़ा रुख अपनाया है। DGCA ने एयरलाइन के CEO और COO को समन जारी कर मंगलवार सुबह 11 बजे पेश होने को कहा है। नियामक ने स्पष्ट कर दिया है कि पिछले छह दिनों में करीब 3,900 उड़ानों के रद्द होने के मामले में जवाब देना होगा। साथ ही संकेत दिए गए हैं कि हालात न सुधरने पर इंडिगो के अतिरिक्त रूट भी घटाए जा सकते हैं। इससे एयरलाइन की परिचालन क्षमता पर सीधा असर पड़ सकता है।
इंडिगो का ऑपरेशनल संकट सातवें दिन भी थमता नहीं दिखा। सोमवार को भी 450 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। यह संकट 2 दिसंबर से शुरू हुआ था। हालांकि कंपनी ने बयान जारी कर कहा है कि 10 से 15 दिसंबर तक स्थिति सामान्य हो जाएगी। DGCA पहले ही शो-कॉज नोटिस जारी कर चुका है और जवाब के लिए अंतिम चेतावनी दे चुका है।
DGCA ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति क्रू प्लानिंग, ऑपरेशनल तैयारियों और नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों के पालन की जांच करेगी। इसमें संयुक्त महानिदेशक संजय के. ब्रह्मणे, डिप्टी डीजी अमित गुप्ता सहित वरिष्ठ फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर शामिल हैं। समिति यह आकलन करेगी कि इतनी बड़ी संख्या में उड़ानें आखिर कैसे रद्द हुईं?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक इंडिगो अब तक यात्रियों को 827 करोड़ रुपए का रिफंड दे चुकी है। छह दिनों में 610 करोड़ रुपए लौटाए गए हैं। फंसे यात्रियों के लिए 9,500 होटल कमरे और 10,000 कैब-बस की व्यवस्था की गई। उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने संसद में कहा कि जांच पूरी होने के बाद सख्त कार्रवाई होगी, ताकि यह मिसाल बने। उन्होंने साफ किया कि यह संकट इंडिगो की आंतरिक योजना और क्रू रोस्टरिंग से जुड़ा है।
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