
कर्नाटक कांग्रेस में सब ठीक है? राजनीतिक घटनाक्रम इसकी पुष्टि तो नहीं कर रहे। पार्टी प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला कर्नाटक में हैं और विधायकों से मुलाकात कर रहे हैं। इस बीच मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का खेमा खुद को एक-दूसरे पर भारी साबित करने में जुटा है। डीके शिवकुमार का खेमा यह सुनिश्चित करवाने की कोशिश में है कि सितंबर में जब सिद्धरमैया के मुख्यमंत्री बने ढाई साल पूरे हो जाएंगे तब कर्नाटक की कुर्सी डीके शिवकुमार को मिल जाए। वहीं, कांग्रेस आलाकमान इस फॉर्म्युले पर न सहमति जता पा रहा है और ना खुलकर खंडन ही कर रहा है।
कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह कहकर उलझन और बढ़ा दी है कि मुख्यमंत्री बदलने जैसे मामले पर फैसला पार्टी आलाकमान करेगा। इस पर कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने खरगे को 'एक्सिडेंटल कांग्रेस प्रेसिडेंट' करार दे दिया। उन्होंने पूछा कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष होकर भी खरगे कांग्रेस के आलाकमान नहीं हैं तो आखिर कौन है?
इधर, कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक मामलों के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मंगलवार को विधायकों के साथ बैठकों का सिलसिला लगातार जारी रखा। पार्टी सूत्रों ने बताया कि सुरजेवाला तीन दिनों तक विधायकों के साथ एक-एक कर बैठक करेंगे। इसके पहले चरण के तहत सुरजेवाला दूसरे दिन मंगलवार को बेंगलुरु शहर, बेंगलुरु ग्रामीण, बेंगलुरु दक्षिण, चामराजनगर, मैसूरु जिलों के अलावा दक्षिण कन्नड़ और कोलार के करीब 20 विधायकों से मुलाकात कर रहे हैं।
रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को चिकबल्लापुर और कोलार जिलों के विधायकों के साथ बैठक की। कगवाड़ से विधायक राजू कागे के भी पार्टी महासचिव से मिलने की उम्मीद है। कागे ने सरकार के कामकाज और मंत्रियों से संपर्क न होने को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। कागे ने विकास कार्यों और फंड जारी करने में देरी का हवाला देते हुए इस्तीफा देने का संकेत दिया था और आरोप लगाया था कि प्रशासन पूरी तरह से चरमरा गया है। ये बैठकें कांग्रेस पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच हुई हैं।
सुरजेवाला ने इन बैठकों को एआईसीसी और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का संगठनात्मक अभ्यास करार दिया। सुरजेवाला ने कहा था कि नेतृत्व परिवर्तन के बारे में मीडिया में प्रसारित की जा रही खबरें केवल कोरी कल्पनाएं हैं। उनके अनुसार, बैठकें विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस की पांच गारंटी योजनाओं की स्थिति को समझने के लिए की जा रही हैं क्योंकि सरकार ने अपने कार्यकाल के दो साल पूरे कर लिए हैं और इसका उद्देश्य विधायकों के संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस संगठन की स्थिति का आकलन करना है।
पार्टी यह मूल्यांकन कर रही है कि विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों के प्रति कितने सजग हैं। साथ ही, लंबित विकास परियोजनाओं की पहचान करने का भी प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हम सरकार के कामकाज के बारे में विधायकों से प्रतिक्रिया भी लेना चाहते हैं।'
इससे पहले, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को कहा था कि ऐसे (मुख्यमंत्री बदलने जैसे) मामलों पर फैसला पार्टी आलाकमान करेगा और किसी को भी अनावश्यक समस्या पैदा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'देखिए, यह आलाकमान के हाथ में है। यहां कोई नहीं कह सकता कि आलाकमान के मन में क्या चल रहा है। यह आलाकमान पर छोड़ दिया गया है और आगे कोई भी फैसला लेने का अधिकार उसी के पास है। लेकिन अनावश्यक रूप से किसी को समस्या पैदा नहीं करनी चाहिए।'
सुरजेवाला के कर्नाटक में विधायकों से मुलाकात पर खरगे ने कहा, 'सुरजेवाला आए हैं। उनकी रिपोर्ट और फीडबैक के आधार पर हम तय करेंगे कि क्या कदम उठाना है।' ध्यान रहे कि वर्ष 2023 में जब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तो ऐसी अटकलें थीं कि सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार ढाई-ढाई साल के लिए राज्य का नेतृत्व करेंगे।
उधर, खरगे को 'एक्सीडेंटल कांग्रेस अध्यक्ष' बताते हुए कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सवाल किया, 'अगर खरगे पार्टी आलाकमान नहीं हैं, तो कौन हैं?' उन्होंने एक एक्स पोस्ट में कहा, 'ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने हमें एक और एक्सीडेंटल नेता उपहार में दिया है। सबसे पहले, वह प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह थे, जिनके पास कुर्सी थी लेकिन कमान नहीं थी, जिनके पास जिम्मेदारी थी, लेकिन शक्ति नहीं थी। अब यह मल्लिकार्जुन खरगे एक्सीडेंटल एआईसीसी अध्यक्ष हैं, जो गर्व से स्वीकार करते हैं कि उन्हें नहीं पता कि आलाकमान क्या सोच रहा है।'
अशोक ने यह भी कहा, 'प्रिय खरगे जी, अगर आप आलाकमान नहीं हैं, तो कौन हैं? राहुल गांधी? सोनिया गांधी? प्रियंका गांधी या इस एक उपनाम की कोई अदृश्य समिति है?' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष सिर्फ दिखावे के लिए हैं, जबकि फैसले 10 जनपथ (सोनिया गांधी का आवास) में बंद दरवाजे के पीछे किए जाते हैं। अशोक ने कटाक्ष करते हुए कहा, 'वही पटकथा, नया अभिनेता। फिर भी गांधी परिवार द्वारा निर्देशित।, कांग्रेस की ओर से अशोक के आरोप पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
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