Israel Iran War: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध को शुरू हुए 1 महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। इस संघर्ष ने दुनिया भर डर का महौल पैदा कर दिया है। अमेरिकी हमलों से ईरान तेल संयंत्रों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे तेल बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान ने सबको चौंका दिया है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि इजरायल-ईरान युद्ध अब अपने आखिरी पड़ाव में हो सकता है। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान से अपनी वापसी कर सकता है।
क्या रुकने वाला है ऑपरेशन एपिक फ्यूरी?
राष्ट्रपति ट्रंप के साफ तौर पर कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी डील या समझौते की शर्त जरूरी नहीं है। उन्होंने अनुमान जताया कि अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर अमेरिकी सेना अपनी कार्रवाई रोक सकती है। हालांकि, ट्रंप ने यह साफ किया है कि ईरान को उनके साथ कोई समझौता करने की मजबूरी नहीं है, वे बस इस अभियान को खत्म करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। अमेरिका ने इस मिलिट्री ऑपरेशन को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया है।
28 फरवरी को शुरू हुआ था इजरायल-ईरान युद्ध
बता दें कि बीती 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला शुरू किया था। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया। इस जवाबी कार्रवाई का सबसे बुरा असर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर पड़ा। यह दुनिया के तेल व्यापार का सबसे अहम समुद्री रास्ता माना जाता है है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बाधित होने से पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई को लेकर हाहाकार मच गया।
ब्रिटेन-फ्रांस पर ट्रंप का तीखा हमला
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपने ही सहयोगियों-ब्रिटेन और फ्रांस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने फ्रांस पर आरोप लगाया कि वह अमेरिकी सप्लाई विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र इस्तेमाल नहीं करने दे रहा है। वहीं, ब्रिटेन को उन्होंने डरपोक करार दिया। इसके पीछे की वजह है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खुलवाने में अमेरिका की मदद नहीं कर रहा है। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि ये देश अब भविष्य में अमेरिकी मदद की उम्मीद न करें और अपना तेल खुद खोजें।