
US-Iran War: आज सुबह का सूरज पश्चिम एशिया के लिए बारूद की गंध लेकर आया। इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक संयुक्त सैन्य अभियान के तहत ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोल दिया। तेहरान के आसमान में धुएं के गुबार और धमाकों की गूंज ने स्पष्ट कर दिया है कि पिछले एक साल से सुलग रही चिंगारी अब पूर्ण युद्ध की ज्वाला बन चुकी है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अपनी मिसाइल यूनिट्स को 'काउंटरऑफेंसिव' के लिए सक्रिय कर दिया है। अमेरिकी न्यूज एजेंसी सीएनएन की मानें तो यह हमला यहूदी त्योहार पुरीम से पहले किया गया है जो ईरान (फारस) पर यहूदियों की जीत का पर्व है।
| समय (IST) | ऐसा हुआ युद्ध का आगाज |
|---|---|
| सुबह 6:30 AM | इजराइली Defense Minister इजराइल काट्ज ने 'प्रीएम्प्टिव अटैक' की पुष्टि की |
| सुबह 7:00 AM | ट्रंप ने Truth Social पर 8 मिनट का वीडियो पोस्ट किया - 'Operation Epic Fury' की घोषणा |
| सुबह 7:15 AM | तेहरान के यूनिवर्सिटी स्ट्रीट, जोम्हूरी इलाके में मिसाइलें गिरीं |
| सुबह 7:30 AM | खामेनेई के दफ्तर के पास 7 मिसाइलें - खामेनेई सुरक्षित स्थान पर |
| सुबह 8:00 AM | इजराइल में हवाई हमले के सायरन - IRGC का जवाबी हमला शुरू |
| सुबह 8:15 AM | बहरीन में US 5th Fleet बेस पर ईरानी मिसाइल - धुआं उठता दिखा |
| सुबह 9:00 AM | भारतीय दूतावास (इज़राइल) ने भारतीयों को अलर्ट जारी किया |
इस भीषण टकराव की जड़ें ईरान के परमाणु कार्यक्रम में छिपी हैं। इतिहास में अमेरिका-और ईरान कई बार आमने-सामने आ चुके हैं, लेकिन ताजा संघर्ष की जड़ें पिछले साल की दो बड़ी घटनाओं में छिपी हैं-
2025 का 12 दिवसीय युद्ध (13-24 जून): पिछले साल जून में इजराइल ने 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' के तहत ईरान के परमाणु केंद्रों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। उस 12 दिनों के युद्ध में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए थे। हालांकि तब युद्ध विराम हो गया था, लेकिन वह केवल एक 'शांति का छलावा' था।
ईरानी नागरिक क्रांति (दिसंबर 2025 - जनवरी 2026): 28 दिसंबर, 2025 को ईरान की गिरती अर्थव्यवस्था और रियाल की भारी गिरावट के कारण देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों प्रदर्शनकारियों को जानें गंवानी पड़ीं। अमेरिका और इजराइल ने इस आंतरिक अस्थिरता को 'खामेनेई शासन' के अंत के अवसर के रूप में देखा है।
| समय | क्या हुआ था? |
|---|---|
| अक्टूबर 2023 | 7 अक्टूबर को हमास का इजराइल पर हमला - गाजा युद्ध शुरू |
| अप्रैल 2024 | ईरान का इजराइल पर पहला सीधा हमला - 300+ ड्रोन व मिसाइलें |
| जून 2025 | '12-दिवसीय युद्ध' (Operation Midnight Hammer) - परमाणु ठिकानों पर हमले; संघर्षविराम से समाप्त |
| दिसंबर 2025–जनवरी 2026 | ईरान में सबसे बड़ा जन-विद्रोह - 100+ शहरों में प्रदर्शन; ट्रंप के अनुसार 32,000 प्रदर्शनकारी मारे गए |
| 13 फरवरी, 2026 | ट्रंप: 'ईरान में शासन परिवर्तन सबसे अच्छी बात होगी' |
| 14 फरवरी, 2026 | अमेरिकी अधिकारी: हफ्तों तक चलने वाले टिकाऊ सैन्य अभियान की तैयारी |
| 17 फरवरी, 2026 | US-ईरान अप्रत्यक्ष वार्ता ओमान में - बिना समझौते के समाप्त; Brent $67/बैरल |
| 28 फरवरी, 2026 | Operation Epic Fury शुरू - तेहरान, इस्फहान, क़ोम, करज, कर्मानशाह पर हमले |
इजराइल के लिए यह 'अस्तित्व की लड़ाई' है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले के बाद एक लंबे संबोधन भाषण में कहा कि उनका देश, ईरान को कभी परमाणु शक्ति संपन्न बनने नहीं देगा। उन्होंने इतिहास के उदाहरण गिनाते हुए कहे कि अगर ईरान ने परमाणु बम बना लिए तो न सिर्फ अमेरिका बल्कि विश्व के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस' की घोषणा करते हुए साफ किया है कि अमेरिका अब मिडिल ईस्ट में ईरान के प्रभाव को जड़ से खत्म करना चाहता है।
इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन करना है। अमरेकी राष्ट्रपति ने 13 फरवरी को ही रिजाइम चेंज को 'सबसे अच्छी बात' बताया था। तेहरान में जिन जगहों पर मिसाइलें गिरीं, उनसे स्पष्ट है कि इजरायल और अमेरिका ने ईराने के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खमेनेई और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, दोनों के खात्मे की कोशिश में है। विशेषज्ञों की मानें तो इस बार इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान में सत्ता परिवर्तन करवाने तक युद्ध करता रहेगा। अमेरिका इस युद्ध में ईरान की मिसाइल युद्ध की क्षमता और परमाणु बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना चाहेगा।
ट्रंप ने अपने लंबे भाष में ईरान की जनता को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा, 'जब हम खत्म करें, तो अपनी सरकार अपने हाथों में ले लो। यह शायद आपके लिए पीढ़ियों में एक बार का मौका है।' वहीं, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, 'हमारी संयुक्त कार्रवाई ईरान के अस्तित्ववादी खतरे को समाप्त करेगी।'
अयातुल्ला अली खमेनेई के नेतृत्व वाला शासन आज अपने सबसे कठिन दौर में है।
ताकत: ईरान के पास अभी भी हजारों बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा और 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (हिज़्बुल्लाह, हूती) जैसे प्रॉक्सी समूह हैं।
समर्थक: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस और चीन ईरान के साथ खड़े दिख रहे हैं। रूस को ईरान से ड्रोन और मिसाइल तकनीक की मदद मिलती रही है।
विरोध: घरेलू स्तर पर जनता शासन के खिलाफ है। निर्वासित नेता रजा पहलवी ने ईरानी सेना से खमेनेई का साथ छोड़कर जनता के साथ आने की अपील की है।
खामेनेई तेहरान से बाहर हैं, ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने युद्ध की कमान संभाली। ईरानी राष्ट्रपति का दफ्तर भी हिट हुआ।
| पहलू | IRGC के पास (अभी) | कमजोरियां (अभी) |
|---|---|---|
| सैन्य | 3,000+ बैलिस्टिक मिसाइलें; शाहेद ड्रोन; US बेसेज पर हमला जारी | वायु रक्षा जून, 2025 में पहले से कमजोर; खुफिया लीक |
| घरेलू | IRGC, बासिज मिलिशिया | 32,000+ मारे गए प्रदर्शनकारी; जनता का गुस्सा चरम पर |
| क्षेत्रीय | हिज्बुल्लाह (सक्रिय), हूती (हमले शुरू), इराकी मिलिशिया | हिज्बुल्लाह 2024 में पहले से कमजोर; लेबनानी पीएम ने चेतावनी दी |
| वैश्विक | रूस (मेदवेदेव ने ट्रंप को लताड़ा), चीन (चुप) | संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो तक ही सीमित |
भारत के लिए यह युद्ध केवल दो देशों की लड़ाई नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक संकट है।
1. अर्थव्यवस्था पर प्रभाव : भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है। युद्ध के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, जिससे महंगाई (Inflation) बढ़ेगी और भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होगा।
2. कूटनीतिक संतुलन : भारत के इज़राइल और ईरान, दोनों के साथ गहरे संबंध हैं। इज़राइल हमारा प्रमुख रक्षा भागीदार है, जबकि ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारत को एक बार फिर 'गुटनिरपेक्षता 2.0' का पालन करना होगा, जो काफी चुनौतीपूर्ण होगा।
3. चाबहार बंदरगाह : भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट में भारी निवेश किया है ताकि मध्य एशिया तक पहुंच बनाई जा सके। युद्ध की स्थिति में यह प्रोजेक्ट ठप पड़ सकता है, जिससे भारत के व्यापारिक हितों को चोट पहुंचेगी।
4. भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा : खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। यदि युद्ध फैलता है, तो उनकी सुरक्षा और वहां से आने वाले रेमिटेंस (विदेशी मुद्रा) पर संकट खड़ा हो जाएगा।
| क्षेत्र | वास्तविक/संभावित प्रभाव | भारत की स्थिति अभी |
|---|---|---|
| कच्चा तेल | Brent $67 से तेजी से ऊपर; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज 'युद्ध क्षेत्र' | कच्चे तेल के बाजारों में भारी उठापटक की चेतावनी |
| होर्मुज का खतरा | 20% वैश्विक तेल यहां से आता है। होर्मुज का रास्ता बंद हुआ तो $100/बैरल तक | भारत की 85% ऊर्जा ज़रूरत आयात से; SPR सीमित |
| चाबहार पोर्ट | ईरान में सक्रिय युद्ध से ठप पड़ेगा प्रॉजेक्ट | मध्य एशिया रूट अनिश्चित |
| भारतीय प्रवासी | दूतावास ने इजराइल में भारतीयों को अलर्ट किया है। | खाड़ी में 90 लाख से ज्यादा भारतीयों की निकासी योजना जरूरी |
| एयरलाइन्स | Lufthansa, KLM ने उड़ानें रद्द कीं। कई देशों के वायु क्षेत्र बंद | Air India/IndiGo को मार्ग बदलने होंगे |
| I2U2 गठबंधन | इजराइल के साथ खड़े होने पर खाड़ी देशों से तनाव | भारत रणनीतिक तटस्थता के तहत अभी चुप है। |
उत्तर: हां, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को ऑपरेशन एपिक फरी (Operation Epic Fury) का नाम दिया है। इसका मतलब 'महागुस्से का अभियान' है। वहीं, इजरायल ने ईरान के विरुद्ध छेड़े युद्ध को ऑपरेशन रोरिंग लायन (Operation Roaring Lion) नाम दिया है। जिसका मतलब 'दहाड़ता सिंह युद्ध' है।
उत्तर: दुनियाभर के रक्षा विशेषज्ञों के साथ-साथ अमेरिका और इजरायल के सूत्र बता रहे हैं कि अमेरिका इस बार केवल कुछ घंटों का नहीं, बल्कि 'कई दिनों' तक चलने वाला हमला कर रहा है। यह जून 2025 के '12 दिवसीय युद्ध' जैसा नहीं है बल्कि यह उससे बहुत बड़ा अभियान है।
उत्तर: हां, यदि ईरान 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को ब्लॉक करता है, तो दुनिया की 20% तेल आपूर्ति रुक जाएगी। इससे वैश्विक मंदी आने का खतरा है।
उत्तर: भारत को अभी तीन काम करने होंगे-
नागरिकों की वापसी: ईरान और खाड़ी देशों से भारतीय प्रवासियों के लिए आपातकालीन निकासी योजना शुरू करनी होगी।
ऊर्जा सुरक्षा: रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को सक्रिय करने के साथ-साथ रूस और सऊदी अरब से कच्चे तेल की वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करना होगा।
कूटनीति: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में युद्धविराम का समर्थन करना होगा। भारत न इजराइल का पक्ष लेगा, न ईरान का। इस युद्ध में भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की असली परीक्षा होगी।
उत्तर: रूस यूक्रेन युद्ध के कारण ईरान पर निर्भर है, इसलिए वह सैन्य सहयोग दे सकता है। चीन मुख्य रूप से कूटनीतिक समर्थन देगा ताकि अमेरिका को इस क्षेत्र में उलझाए रखा जा सके।
रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दमित्री मेदवेदेव ने ट्रंप पर जोरदार हमला बोल। उन्होंने कहा, 'शांतिदूत ने एक बार फिर अपना असली चेहरा दिखाया।' पर रूस यूक्रेन में उलझा है, इसलिए ईरान को सीधी मदद करेगा, इसकी बहुत कम गुंजाइश है। चीन अभी चुप है- वह 'शांतिदूत' बनने का मौका भुनाएगा, जैसा 2023 में सऊदी अरब और ईरान के बीच समझौते के दौरान किया था।
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