इनकम टैक्स विभाग (ITD) ने स्पष्ट किया कि हाल ही में कुछ करदाताओं को भेजे गए संदेश किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई की शुरुआत नहीं हैं, बल्कि ये केवल सलाहात्मक और सूचना देने के उद्देश्य से जारी किए गए हैं। विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ये संचार केवल उन मामलों में किया गया है, जहां आयकर रिटर्न (ITR) में दी गई जानकारी और रिपोर्टिंग संस्थाओं से प्राप्त डेटा के बीच प्राथमिक रूप से बड़ा अंतर दिखाई देता है।
स्वैच्छिक सुधार के लिए दिया जा रहा अवसर
इनकम टैक्स विभाग के अनुसार, इन संदेशों का मकसद करदाताओं को उनके वार्षिक सूचना विवरण (Annual Information Statement - AIS) में उपलब्ध जानकारी से अवगत कराना है। यदि किसी प्रकार की चूक या त्रुटि पाई जाती है, तो करदाता कंप्लायंस पोर्टल के माध्यम से फीडबैक दे सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर पहले से दाखिल रिटर्न को संशोधित किया जा सकता है या अब तक रिटर्न न भरने की स्थिति में बेलैटेड रिटर्न दाखिल किया जा सकता है। विभाग ने याद दिलाया कि आकलन वर्ष 2025-26 के लिए रिटर्न संशोधन या बेलैटेड रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2025 है।
विदेशी आय और रिफंड मामलों पर विशेष नजर
इनकम टैक्स विभाग का यह कदम विदेशी परिसंपत्तियों और आय के खुलासे को लेकर चलाए जा रहे अभियान से भी जुड़ा है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने लगभग 25,000 उच्च जोखिम वाले मामलों की पहचान की है, जहां विदेशी संपत्तियां होने के संकेत मिले हैं, लेकिन ITR में उनका खुलासा नहीं किया गया। वहीं, कुछ मामलों में उच्च मूल्य और रेड-फ्लैग किए गए रिफंड दावों की जांच के चलते टैक्स रिफंड में देरी हुई है। CBDT चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहा है कि वैध रिफंड जारी किए जाएंगे, जबकि गलत दावों की जांच जारी रहेगी।