कैसा हराया... कहकर वायरल हुई सहर शेख का जाति प्रमाण पत्र फर्जी; जाएगा पद, पिता पर होगी FIR?

‘कैसा हराया’ से फेमस हुई सहर शेख मुश्किलों में फंस गई है। ठाणे के तहसीलदार ने मुंब्रा पार्षद सहर शेख के पिता यूनुस शेख पर फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने के आरोप में मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। इससे सहर की पार्षद सदस्यता रद्द होने का खतरा बढ़ गया है।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड21 Apr 2026, 03:36 PM IST
सहर शेख का जाति प्रमाण पत्र फर्जी।
सहर शेख का जाति प्रमाण पत्र फर्जी।

महाराष्ट्र के ठाणे में एआईएमआईएम (AIMIM) की पार्षद सहर शेख एक बड़े कानूनी संकट में फंसती नजर आ रही हैं। ठाणे के तहसीलदार कार्यालय ने उनके पिता यूनुस इकबाल शेख के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। यह पूरा मामला चुनाव में इस्तेमाल किए गए कथित फर्जी ओबीसी (OBC) जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा है। अगर ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो न केवल उनके पिता को जेल हो सकती है, बल्कि सहर शेख को अपनी पार्षद की कुर्सी भी गंवानी पड़ सकती है।

जीत के बाद लगातार विवादों में रही सहर शेख

यह वही सहर शेख है जिसने मुंब्रा नगर परिषद का चुनाव जीतने के बाद मंच से मजाक उड़ाते हुए कहा था, 'कैसा हराया?' सहर का यह वीडियो क्लिप बहुत वायरल हुआ था। फिर सहर शेख ने यह भी कहा था कि वह मुंब्रा को हरे रंग में रंग देंगी, इस पर विरोधियों ने आपत्ति जताई कि सहर मुंब्रा के इस्लामीकरण की बात कर रही हैं। विवाद बढ़ने पर सहर ने अपने बयान के लिए माफी मांगी थी।

तहसीलदार की जांच में बड़ा खुलासा

ठाणे के तहसीलदार उमेश पाटिल ने इस मामले की गहन जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूनुस शेख ने कथित तौर पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया और उसी के आधार पर अपनी बेटी सहर शेख के लिए ओबीसी प्रमाण पत्र हासिल किया। तहसीलदार ने उप-विभागीय अधिकारी (SDO) को सौंपी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि यूनुस शेख के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर दर्ज की जाए और उनके सभी प्रमाण पत्र तत्काल रद्द किए जाएं।

दस्तावेजों में मिलीं गंभीर खामियां

जांच रिपोर्ट के अनुसार, यूनुस शेख का 2011 का ओबीसी सर्टिफिकेट सरकारी नियमों के मुताबिक नहीं था। इस सर्टिफिकेट पर न तो अनिवार्य हस्ताक्षर थे और न ही इसके टाइटल में 'महाराष्ट्र राज्य' शब्द लिखा था। अधिकारियों को पता चला कि सहर शेख के पिता और चाचा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हैं। नियम के अनुसार, प्रवासियों को फॉर्म-10 के तहत सर्टिफिकेट मिलना चाहिए, लेकिन आरोप है कि उन्होंने स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षित फॉर्म-8 का इस्तेमाल करने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया।

सहर शेख की सदस्यता पर मंडराया खतरा

सहर शेख ने जनवरी में हुए ठाणे नगर निगम (TMC) चुनावों में मुंब्रा के वार्ड 30 से जीत हासिल की थी। उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की उम्मीदवार सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद को हराया था। सिद्दीकी फरहा ने ही सहर के जाति प्रमाण पत्र की वैधता को चुनौती देते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। चूंकि सहर ने आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा था, इसलिए यदि उनका जाति प्रमाण पत्र अवैध पाया जाता है, तो उन्हें पार्षद पद से अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

विवरणतहसीलदार की रिपोर्ट के मुख्य बिंदुसहर शेख/पिता का पक्ष
सर्टिफिकेट का आधारपिता के 2011 के सर्टिफिकेट को फर्जी बताया गयादावा है कि सभी दस्तावेज असली और सत्यापित हैं
मूल निवासपरिवार गाजियाबाद (UP) का निवासी बताया गयाउत्तर प्रदेश से चाचा का सर्टिफिकेट प्रमाण के तौर पर पेश किया
कानूनी कार्रवाईFIR और सर्टिफिकेट रद्द करने की सिफारिशरिपोर्ट को 'एकतरफा' बताया और कोर्ट जाने की बात कही

परिवार ने आरोपों को बताया 'राजनीतिक साजिश'

इस पूरे विवाद पर सहर शेख के पिता यूनुस शेख ने अपना पक्ष रखते हुए इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'यह विवाद विरोधियों द्वारा रचा गया है क्योंकि वे मेरी बेटी की राजनीतिक तरक्की को पचा नहीं पा रहे हैं।' उन्होंने दावा किया कि उनके पास सभी प्रामाणिक दस्तावेज हैं और वे इन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पेश करेंगे। सहर शेख ने भी सोशल मीडिया पर इसे 'दुष्प्रचार' करार दिया है।

AIMIM ने किया पार्षद का बचाव

एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने सहर शेख का बचाव करते हुए कहा कि पार्टी ने उनके दस्तावेजों की जांच की है और वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा, 'आरोप लगाने के लिए कोई भी कुछ भी कह सकता है। हम इस मामले को लेकर कोर्ट जाएंगे और सहर बाइज्जत बरी होकर निकलेंगी।'

वायरल हुआ था 'कैसा हराया?' वाला बयान

जनवरी में मुंबई महानगरपालिका का चुनाव हुआ था जिसमें मुंब्रा नगर परिषद से एआईएमआईएम उम्मीदवार को रूप में सहर शेख ने जीत दर्ज की थी। तब उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए बड़ी तंज भरे और स्टाइलिश अंदाज में कहा था, 'कैसा हराया?' सहर के इस बयान का वीडियो क्लिप बहुत वायरल हो गया था।

सहर शेख ने यह कहकर भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं कि वह मुंब्रा को हरे रंग में रंग देंगी। इस पर बीजेपी समेत अन्य विरोधी दलों ने इस बयान को कट्टर इस्लामी, जिहादी मानसिकता का परिचायक बताया था। विवाद बढ़ने के सबा शेख ने यह कहते हुए माफी मांगी थी कि उनका मकसद तिरंगे के हरे रंग से था ना कि धार्मिक प्रतीक से।

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