कामिका एकादशी व्रत कथा, क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन-विधि और भगवान विष्णु का प्रिय मंत्र

Kamika Ekadashi Vrat Katha in hindi: इस साल कामिका एकादशी 21 जुलाई यानी सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन श्री विष्णु की पूजा से आर्थिक, मानसिक और धार्मिक लाभ के साथ पापों का नाश होता है। आइए जानें कामिका एकादशी पूजा से लेकर व्रत और पारण की विधि और व्रत कथा।

Priya Shandilya
अपडेटेड20 Jul 2025, 10:30 AM IST
कब है कामिका एकादशी का व्रत? जानिए पूरी पूजा विधि, कथा और महत्त्व
कब है कामिका एकादशी का व्रत? जानिए पूरी पूजा विधि, कथा और महत्त्व

Kamika Ekadashi vrat katha in hindi: सावन में जब हर ओर हरियाली और भक्ति का माहौल होता है, तो ऐसे में कामिका एकादशी का आना भक्तों के लिए किसी सौगात से कम नहीं होता। ये एकादशी सावन माह के कृष्ण पक्ष में आती है और इस साल ये तिथि शुरू हो रही है 20 जुलाई दोपहर 12:12 बजे से, जो समाप्त होगी 21 जुलाई सुबह 9:38 बजे। इसलिए व्रत रखने का सही दिन सोमवार 21 जुलाई 2025 है।

खास बात ये है कि इस बार सावन का दूसरा सोमवार और कामिका एकादशी एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिससे इस दिन की आध्यात्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है।

कामिका एकादशी व्रत का महत्व

कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन, सुख, शांति, समाजिक प्रतिष्ठा और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मान्यता है कि इस दिन यदि पूरी श्रद्धा और विधि से पूजा की जाए, तो पाप नष्ट होते हैं, और जीवन में स्थिरता आती है। विष्णु जी को कुछ विशेष वस्तुएं जैसे तुलसी, पीले फूल, फल और वस्त्र अर्पित करने से करियर, नौकरी और रिश्तों में भी अच्छे परिणाम मिलते हैं।

कामिका एकादशी की पूजा कैसे करें? (Kamika Ekadashi Puja vidhi)

1. सुबह-सुबह स्नान कर तन-मन को शुद्ध करें।

2. सूर्य नारायण को जल चढ़ाएं और व्रत का संकल्प लें।

3. घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक चौकी रखें, उस पर पीला कपड़ा बिछाएं।

4. श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और घी का दीपक जलाएं।

5. भगवान को पीले पुष्प, पीले फल, पीले वस्त्र और पीले मिष्ठान अर्पित करें।

6. तुलसी का पत्ता ज़रूर अर्पित करें, ये विष्णु जी को सबसे प्रिय होती है।

7. पूजा के बाद विष्णु जी की आरती करें और सबमें प्रसाद बांटें।

श्री विष्णु की स्तुति और मंत्र जाप (Lord Vishnu Stuti & Mantra)

शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।

लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्,

वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

विष्णु जी को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का जाप करें:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

ॐ विष्णवे नम:

ॐ हूं विष्णवे नम:

ॐ नमो नारायण

श्री मन नारायण नारायण हरि हरि

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे

हे नाथ नारायण वासुदेवाय

ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।

कामिका एकादशी व्रत कथा (Kamika Ekadashi Vrat Katha)

बहुत समय पहले की बात है, एक गांव में एक क्षत्रिय रहता था। एक दिन रास्ते में उसकी किसी बात पर एक ब्राह्मण से कहासुनी हो गई। बात बढ़ी और क्षत्रिय ने आवेश में आकर ब्राह्मण को धक्का दे दिया। दुर्भाग्यवश, ब्राह्मण गिरा और उसकी मृत्यु हो गई।

घटना के कुछ ही समय बाद क्षत्रिय को अपने किए पर पछतावा हुआ। उसने ब्राह्मण के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी ली और गांव के लोगों से क्षमा भी मांगी। लेकिन गांव के पंडितों ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, “तुम पर ब्रह्महत्या का दोष है। जब तक तुम इसका प्रायश्चित नहीं करते, हम कोई धार्मिक कार्य में शामिल नहीं होंगे।”

अब क्षत्रिय परेशान था। उसने बार-बार विनती की कि उसे कोई उपाय बताया जाए जिससे वह इस पाप से मुक्त हो सके। पंडितों ने उसे सलाह दी, “अगर तुम सच्चे मन से सावन के कृष्ण पक्ष की एकादशी, यानी कामिका एकादशी का व्रत रखो, भगवान विष्णु की पूजा करो, ब्राह्मणों को भोजन कराओ और दान दो तो तुम अपने अपराध से मुक्त हो सकते हो।”

क्षत्रिय ने बिना देर किए व्रत की तैयारी शुरू की। उसने पूरे नियमों के साथ उपवास रखा, भगवान विष्णु की पूजा की, तुलसी अर्पित की और रात भर जागरण किया। उसी रात, उसे स्वप्न में भगवान विष्णु के दर्शन हुए। उन्होंने मुस्कराकर कहा, "तुमने सच्चे मन से प्रायश्चित किया है। तुम्हारे पुण्य कर्मों और भक्ति से मैं प्रसन्न हूँ। अब तुम ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो चुके हो।"

सुबह जब क्षत्रिय उठा, उसका मन शांत और हल्का था। गांव के लोग भी उसकी तपस्या से प्रभावित हुए और उसे फिर से स्वीकार कर लिया। कहा जाता है कि उसी दिन से कामिका एकादशी का व्रत विशेष पुण्यदायी माना जाने लगा। इस व्रत की कथा केवल सुनने भर से ही यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है और अगर सच्चे मन से किया जाए तो पाप भी धुल जाते हैं।

2025 की आने वाले दिनों में एकादशियों की लिस्ट

21 जुलाई – कामिका एकादशी

05 अगस्त – श्रावण पुत्रदा एकादशी

19 अगस्त – अजा एकादशी

03 सितंबर – परिवर्तिनी एकादशी

17 सितंबर – इंदिरा एकादशी

03 अक्टूबर – पापांकुशा एकादशी

17 अक्टूबर – रमा एकादशी

02 नवंबर – देवोत्थान एकादशी

15 नवंबर – उत्पन्ना एकादशी

01 दिसंबर – मोक्षदा एकादशी

15 दिसंबर – सफला एकादशी

30 दिसंबर – पौष पूर्णिमा एकादशी

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पंचांगों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य सिर्फ आपको जागरूक करना है, मिंट हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है। कृपया कोई निर्णय लेने से पहले अपनी श्रद्धा और विवेक से काम लें।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सकामिका एकादशी व्रत कथा, क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन-विधि और भगवान विष्णु का प्रिय मंत्र
More
बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सकामिका एकादशी व्रत कथा, क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन-विधि और भगवान विष्णु का प्रिय मंत्र