Kartik Purnima Kab Hai: कब है कार्तिक पूर्णिमा? जानिए सही तिथि, महत्व और पूजा विधि

कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक पवित्र दिन है, जो भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित है। इस वर्ष यह 5 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन गंगा स्नान और दीपदान का विशेष महत्व है।

Manali Rastogi
अपडेटेड4 Nov 2025, 09:46 AM IST
Kartik Purnima Kab Hai: कब है कार्तिक पूर्णिमा? जानिए सही तिथि, महत्व और पूजा विधि
Kartik Purnima Kab Hai: कब है कार्तिक पूर्णिमा? जानिए सही तिथि, महत्व और पूजा विधि

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा उस दिन मनाई जाती है जब कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि आती है। यह दिन हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और शुभ माना जाता है। हर महीने पूर्णिमा आती है, लेकिन कार्तिक माह की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह महीना भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा 5 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी।

तिथि और समय

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 4 नवंबर 2025, रात 10:36 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 5 नवंबर 2025, शाम 6:48 बजे
  • पूर्णिमा उपवास के दिन चंद्र उदय: शाम 5:11 बजे

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कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्म के सबसे पवित्र दिनों में से एक है, जो भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। इसके अलावा, हिंदू ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव ने इसी दिन त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था, जिसने स्वर्ग और पृथ्वी दोनों में आतंक मचा रखा था। इस दिन कई महत्वपूर्ण पर्व भी मनाए जाते हैं, जैसे:

  • देव दीपावली
  • गुरु नानक जयंती
  • गंगा स्नान
  • दीपदान
  • पुष्कर मेला

यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु हरिद्वार, वाराणसी, ऋषिकेश जैसे पवित्र स्थलों पर जाकर गंगा स्नान और दीपदान करते हैं।

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पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें।
  • घर की सफाई करें और भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • मंदिर जाकर दीया जलाएं और प्रार्थना करें।
  • कई भक्त गंगा घाटों पर जाकर पवित्र स्नान करते हैं।
  • इस दिन सत्यनारायण व्रत, हवन, यज्ञ, दान-पुण्य और उपवास किया जाता है।
  • भगवान विष्णु की उपासना और दीप जलाना बहुत शुभ माना गया है।
  • पूजा के अंत में चंद्र देव को अर्घ्य देने की परंपरा भी है।

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मंत्र

-ॐ नमो नारायणाय॥

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

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