Survival Period meaning: आजकल गंभीर बीमारियों का इलाज बहुत महंगा हो गया है। ऐसे में क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस पॉलिसी लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। यह एक फिक्स्ड बेनिफिट पॉलिसी होती है, यानी बीमारी की पुष्टि होते ही बीमा कंपनी एक तय रकम देती है। लेकिन इस पॉलिसी से जुड़ी एक अहम शर्त होती है, जिसे कई लोग नजरअंदाज कर देते हैं और बाद में क्लेम में परेशानी आती है। इस शर्त को सर्वाइवल पीरियड कहा जाता है।
सर्वाइवल पीरियड क्या होता है?
सर्वाइवल पीरियड वह समय होता है, जो गंभीर बीमारी का पता चलने के बाद शुरू होता है। बीमा राशि पाने के लिए पॉलिसीधारक को इस तय अवधि तक जीवित रहना जरूरी होता है। उदाहरण के लिए, अगर पॉलिसी में 6 महीने का सर्वाइवल पीरियड है और बीमारी की पहचान 1 जनवरी को हुई है, तो बीमा कंपनी 30 जून के बाद ही क्लेम का भुगतान करेगी। अगर इस अवधि के दौरान पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है, तो क्लेम नहीं मिलता।
पॉलिसी लेते समय किन बातों का ध्यान रखें
हर बीमा कंपनी और हर योजना में सर्वाइवल पीरियड अलग-अलग हो सकता है। इसलिए पॉलिसी चुनते समय ऐसी योजना को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिसमें यह अवधि कम हो। कम सर्वाइवल पीरियड होने से क्लेम जल्दी और बिना ज्यादा अड़चनों के मिल सकता है।
क्लेम से जुड़ी जरूरी बातें
क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी में बीमारी की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही भुगतान किया जाता है, लेकिन यह तभी संभव है जब सर्वाइवल पीरियड पूरा हो जाए। इसलिए पॉलिसी खरीदते समय उसके नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है। सही जानकारी होने से क्लेम की प्रक्रिया आसान होती है और पैसा समय पर मिल जाता है।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)