Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर क्या है शिव पूजा का मुहूर्त, जानिए शुभ योग और ग्रहों की स्थिति

महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी और इस दिन दुर्लभ ग्रह योग बन रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा, व्रत और अभिषेक करने से सुख, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। चार प्रहर की पूजा, बेलपत्र अर्पण और मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड6 Feb 2026, 12:11 PM IST
महाशिवरात्रि पर क्या है शिव पूजा का मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर क्या है शिव पूजा का मुहूर्त

महाशिवरात्रि इस साल आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास मानी जा रही है। यह पावन पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन दुर्लभ ग्रहों के संयोग और अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं, जिससे भगवान शिव की पूजा, व्रत और साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है। शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार, इस दिन की गई पूजा से सुख, समृद्धि और आत्मिक परिवर्तन की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

शिव पुराण के अनुसार, भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ था। तब भगवान शिव ने एक अनंत शिवलिंग के रूप में प्रकट होकर इस विवाद का अंत किया। यह दिव्य घटना फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को हुई थी, इसलिए हर साल इसी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है।

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इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, शिव मंदिरों में दर्शन करते हैं और पूरी श्रद्धा से पूजा करते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव पृथ्वी के सभी शिवलिंगों में विराजमान होते हैं, इसलिए इस दिन की पूजा विशेष फलदायी होती है।

महाशिवरात्रि 2026 पर जानें शुभ योग और ग्रहों की स्थिति

इस साल चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी शाम 5:06 बजे शुरू होकर 16 फरवरी शाम 5:35 बजे तक रहेगी। इसी कारण महाशिवरात्रि 15 फरवरी को त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी के साथ मनाई जाएगी।

  • सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 7:08 बजे से शाम 7:48 बजे तक रहेगा। यह योग बाधाओं को दूर कर सफलता दिलाने वाला माना जाता है।
  • उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का संयोग तथा व्यतीपात योग दिन की आध्यात्मिक शक्ति को और बढ़ा देगा।
  • सूर्य, बुध, राहु और शुक्र के एक साथ आने से चतुर्ग्रही योग बनेगा, जो आध्यात्मिक उन्नति, समृद्धि और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देता है।

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महाशिवरात्रि पर किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान

भक्त सुबह से ही शिव मंदिरों में जाकर अभिषेक, मंत्र जाप और व्रत करते हैं। कई लोग घर पर भी पूरे विधि-विधान से रुद्राभिषेक करते हैं।

  • बेलपत्र अर्पित करना धन संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायक माना जाता है।
  • जो मंदिर नहीं जा सकते, वे घर में छोटा शिवलिंग स्थापित कर सकते हैं, जैसा कि शास्त्रों में बताया गया है।

सोना, चांदी, पीतल, मिट्टी, पत्थर, स्फटिक या पारद से बने शिवलिंग शुभ माने जाते हैं। एल्यूमिनियम, स्टील या लोहे के शिवलिंग की पूजा वर्जित मानी गई है। शिवलिंग के साथ माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की छोटी मूर्तियाँ रखना संपूर्ण शिव परिवार की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है।

चार प्रहर की पूजा का महत्व

शास्त्रों में महाशिवरात्रि की रात के चारों प्रहरों में शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। प्रत्येक प्रहर की पूजा का अलग आध्यात्मिक फल होता है। चारों प्रहर की पूजा करने से धन, यश, स्थिरता, और संतान से जुड़ी बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

चार प्रहर पूजा मुहूर्त

  • प्रथम प्रहर: शाम 6:15 – 9:28
  • द्वितीय प्रहर: रात 9:29 – 12:41
  • तृतीय प्रहर: रात 12:42 – सुबह 3:54 (16 फरवरी)
  • चतुर्थ प्रहर: सुबह 3:55 – 7:07 (16 फरवरी)

शिवलिंग अभिषेक की सामग्री और लाभ

  • शहद से अभिषेक: करियर और कार्य से जुड़ी परेशानियाँ दूर होती हैं
  • दही से अभिषेक: आर्थिक स्थिति मजबूत होती है
  • गन्ने का रस: माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं

अभिषेक के समय ‘ॐ पार्वतीपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करने से अचानक आने वाले संकटों से रक्षा होती है।

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जानिए संपूर्ण पूजा विधि

  • शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराएं
  • केसर मिला जल अर्पित करें
  • पूरी रात दीपक जलाएं
  • चंदन का तिलक लगाएं
  • बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल, मिठाई, गन्ने का रस, सुगंध और दान अर्पित करें
  • अंत में केसर की खीर चढ़ाकर प्रसाद बांटें

महाशिवरात्रि से जुड़ी पवित्र कथा

जब ब्रह्मा और विष्णु भगवान शिव के अनंत स्वरूप का आरंभ और अंत नहीं खोज पाए, तब शिव ने अपना सत्य स्वरूप प्रकट किया। ब्रह्मा के झूठे दावे के कारण उनकी पूजा सीमित हो गई, जबकि विष्णु की सच्चाई से उन्हें विशेष सम्मान मिला। यह घटना फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को हुई थी, जिससे महाशिवरात्रि का महत्व अमर हो गया।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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