Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri review: कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे स्टारर फिल्म को कैसे मिल रहे रिएक्शन? जानिए

कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की रोमांटिक ड्रामा फिल्म 25 दिसंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई है। इस फिल्म में एक भावनात्मक प्रेम कहानी दिखाई गई है। तो चलिए जानते हैं इस फिल्म के रिव्यू के बारे में।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड25 Dec 2025, 01:56 PM IST
तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी
तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी

फिल्म का नाम: तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी

क्रिटिक्स रेटिंग: 3/5

रिलीज़ डेट: 25 दिसंबर 2025

निर्देशक: समीर विद्वांस

जॉनर: रोमांटिक-कॉमेडी

साल 2025 की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी एक हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी है, जो आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में पुराने ज़माने के सच्चे प्यार की सादगी को फिर से दिखाने की कोशिश करती है। फिल्म में कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म बड़े दावे नहीं करती, बल्कि सादगी, भावनाओं और रिश्तों की जटिलताओं के ज़रिए दर्शकों से जुड़ना चाहती है। सत्यप्रेम की कथा के बाद निर्देशक समीर विद्वांस एक बार फिर कार्तिक आर्यन के साथ इस दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानी को लेकर आए हैं।

क्या है कहानी?

फिल्म की कहानी रेहान उर्फ़ रे मेहरा (कार्तिक आर्यन) और रूमी (अनन्या पांडे) के इर्द-गिर्द घूमती है। रे एक आज़ाद सोच वाला युवक है, जो भविष्य की चिंता किए बिना वर्तमान में जीना पसंद करता है। वहीं रूमी भावनात्मक रूप से समझदार है, प्यार में विश्वास रखती है और अपने परिवार, खासकर अपने पिता से गहरा जुड़ाव रखती है।

दोनों की मुलाकात एक यात्रा के दौरान होती है और उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल जाती है, हालांकि उन्हें खुद इसका एहसास देर से होता है। शुरुआती हिस्से में उनकी केमिस्ट्री सहज लगती है और कई प्यारे पल देखने को मिलते हैं।

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कहानी में मोड़ तब आता है जब रे रूमी को शादी के लिए प्रपोज़ करता है। इसके बाद फिल्म सिर्फ़ रोमांस तक सीमित न रहकर रिश्तों और ज़िम्मेदारियों की बात करने लगती है। रे अमेरिका में रहता है और उसकी ज़िंदगी एक तय रास्ते पर चल रही है, जबकि रूमी अपने पिता को अकेला छोड़ने के डर से जूझती है। उसकी बहन की शादी और विदेश जाने की योजना इस उलझन को और बढ़ा देती है। प्यार और परिवार के बीच फंसी रूमी की दुविधा ही फिल्म का भावनात्मक केंद्र है।

जानिए निर्देशन, संगीत और तकनीकी पहलू के बारे में

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका फील-गुड माहौल है। समीर विद्वांस कहानी को बेवजह जटिल नहीं बनाते। कहानी आराम से आगे बढ़ती है और हास्य, रोमांस व भावनाओं का अच्छा संतुलन रखती है। परिवार से जुड़े कई सीन दिल को छू लेते हैं और दर्शक खुद को उनसे जोड़ पाते हैं। फिल्म ज़्यादा नाटकीय मोड़ों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि रोज़मर्रा की भावनाओं से असर छोड़ती है।

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हालांकि, फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। दूसरा हाफ थोड़ा लंबा लगता है और कुछ टकरावों को और संक्षेप में दिखाया जा सकता था। कुछ हिस्से पहले से अनुमानित लगते हैं, जिससे कहानी कहीं-कहीं जानी-पहचानी सी महसूस होती है। बेहतर स्क्रीनप्ले से भावनात्मक असर और बढ़ सकता था।

तकनीकी रूप से फिल्म अच्छी है। सिनेमैटोग्राफी रिश्तों की गर्माहट और त्योहारों की रंगीनता को खूबसूरती से दिखाती है। कुछ डांस सीक्वेंस पुराने रोमांटिक फिल्मों की याद दिलाते हैं। बैकग्राउंड म्यूज़िक भावनाओं को सपोर्ट करता है और एडिटिंग ज़्यादातर जगह ठीक रहती है। प्रोडक्शन डिज़ाइन और कॉस्ट्यूम फिल्म को यूथफुल और मॉडर्न लुक देते हैं।

संगीत फिल्म की जान है। गाने सुनने में अच्छे हैं और कहानी के साथ जुड़े हुए लगते हैं। रोमांटिक और भावुक सीन में संगीत असर बढ़ा देता है। संवाद सरल, हल्के और कई जगह दिल को छू लेने वाले हैं।

कैसा है अभिनय?

कार्तिक आर्यन रे के किरदार में सहज और भरोसेमंद लगे हैं। उन्होंने अपने चिर-परिचित आकर्षण के साथ हास्य और भावनात्मक गहराई को अच्छे से निभाया है। अनन्या पांडे रूमी के रूप में पहले से ज़्यादा आत्मविश्वासी और परिपक्व दिखती हैं, और अपने किरदार की भावनात्मक उलझनों को अच्छे से पेश करती हैं।

नीना गुप्ता रे की मां के रूप में प्रभाव छोड़ती हैं। जैकी श्रॉफ रूमी के पिता कर्नल अमर वर्धन सिंह के रोल में कम स्क्रीन टाइम के बावजूद असरदार हैं। सपोर्टिंग कास्ट, खासकर टीकू तलसानिया और अफनान फजली, फिल्म में हल्कापन और हास्य जोड़ते हैं।

क्या हैं कमजोरियां?

पहला हाफ जहां दर्शकों को बांधे रखता है, वहीं दूसरा हाफ थोड़ा खिंचा हुआ लगता है। कुछ बहस और पारिवारिक टकराव जरूरत से ज़्यादा लंबे हैं, जिससे कहानी की रफ्तार धीमी पड़ती है। कुछ मोड़ और भावनात्मक पल पहले से अंदाज़े के मुताबिक लगते हैं।

हालांकि, कलाकारों की केमिस्ट्री और हल्का-फुल्का हास्य इन कमियों को काफी हद तक संभाल लेता है। फिर भी, कहानी को और कसावदार बनाया जा सकता था। कुछ जगह कार्तिक और अनन्या की केमिस्ट्री थोड़ी कमजोर भी लगती है।

क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए?

तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी एक सुकून देने वाली रोमांटिक कॉमेडी है, जो प्यार, त्याग और परिवार की अहमियत को सरल और दिल से बताती है। यह कोई नया प्रयोग नहीं करती, लेकिन इसकी सच्चाई, भावनाएं और अभिनय दर्शकों को जोड़े रखते हैं। अगर आपको हल्की, भावुक और दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानी पसंद है, तो यह फिल्म खासकर छुट्टियों के मौसम में एक बार जरूर देखी जा सकती है।

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