आंखों की रोशनी को क्या थायराइड से है संकट? डिटेल में जानिए इसके लक्षण और इलाज के तरीके

Thyroid eye disease symptoms and treatment: थायराइड आंखों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसमें मामूली जलन से लेकर आंखों के बाहर आने और रोशनी जाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जानें इसके विभिन्न चरणों और इलाज के आधुनिक विकल्पों के बारे में।

Manali Rastogi
अपडेटेड22 Dec 2025, 01:21 PM IST
आंखों की रोशनी को क्या थायराइड से है संकट? डिटेल में जानिए इसके लक्षण और इलाज के तरीके
आंखों की रोशनी को क्या थायराइड से है संकट? डिटेल में जानिए इसके लक्षण और इलाज के तरीके

How Thyroid Affects Eyes Vision: थायराइड की समस्या केवल शरीर के मेटाबॉलिज्म को ही नहीं, बल्कि आंखों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इस स्थिति को थायराइड आई डिजीज कहा जाता है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम आंखों के आसपास के ऊतकों पर असर डालने लगती है। शुरुआत में यह हल्की परेशानी लग सकती है, लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह नजर कमजोर होने या खोने तक का कारण बन सकती है।

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शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?

शुरुआत में मरीज को आंखों में सूखापन, हल्की सूजन, जलन और असहजता महसूस हो सकती है। कई बार ये लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोग इन्हें थकान या एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इस स्टेज पर आई ड्रॉप्स और जीवनशैली में छोटे बदलावों से राहत मिल सकती है, लेकिन इलाज टालना आगे चलकर समस्या बढ़ा सकता है।

जब बीमारी बढ़ने लगती है

जैसे-जैसे सूजन बढ़ती है, आंखों के पीछे की मांसपेशियां और ऊतक मोटे हो जाते हैं। इसका असर यह होता है कि आंखें बाहर की ओर उभरी हुई दिखने लगती हैं। इस अवस्था में व्यक्ति को चीजें दो-दो दिख सकती हैं और पलकें पूरी तरह बंद करना मुश्किल हो जाता है। पलकें सही से बंद न होने पर आंख की सतह को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

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नजर पर गंभीर असर

बीमारी के गंभीर चरण में सूजे हुए ऊतक आंखों की नस पर दबाव डाल सकते हैं, जो आंखों को दिमाग से जोड़ती है। इससे रंग पहचानने में परेशानी, धुंधला दिखना और नजर कमजोर होना शुरू हो सकता है। बहुत कम मामलों में, यदि समय पर सही इलाज न मिले, तो आंखों की रोशनी स्थायी रूप से जा सकती है। ऐसे हालात में दवाओं के साथ सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

क्या आंखें फिर से सामान्य हो सकती हैं?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी कितनी आगे बढ़ चुकी है। हल्के मामलों में सूजन कम होने के बाद आंखों का आकार पहले जैसा हो सकता है। लेकिन जब बदलाव स्थायी हो जाए, तो सिर्फ दवाएं असर नहीं करतीं। ऐसे में सर्जरी के जरिए आंखों के लिए सॉकेट में अतिरिक्त जगह बनाई जाती है, जिससे उभरी हुई आंखें अंदर की ओर आ सकें।

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थायराइड कंट्रोल होने के बाद भी सतर्कता जरूरी

यह समझना जरूरी है कि थायराइड आई डिजीज एक ऑटोइम्यून समस्या है। इसका मतलब यह है कि भले ही थायराइड हार्मोन का स्तर दवाओं से सामान्य हो जाए, आंखों से जुड़ी दिक्कतें फिर भी बनी रह सकती हैं या बढ़ सकती हैं।

कई बार आंखों की बनावट और देखने की क्षमता सुधारने के लिए अलग तरह के इलाज या सर्जरी की जरूरत पड़ती है। समय रहते लक्षणों को पहचानना और डॉक्टर से सलाह लेना इस बीमारी से होने वाले गंभीर नुकसान से बचा सकता है।

(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)

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