What is Sixth Schedule: छठी अनुसूची की मांग क्यों हो रही है लद्दाख में? जानिए इसका असर आम जनता पर

Ladakh Sixth Schedule Demand: लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुआ। उनकी चार सूत्रीय मांगें पहचान, जमीन और रोजगार से जुड़ी हैं। अगर छठी अनुसूची लागू होती है, तो लद्दाख को स्वायत्तता और संवैधानिक सुरक्षा मिल सकती है।

Priya Shandilya
अपडेटेड26 Sep 2025, 04:26 PM IST
लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज
लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज(AFP)

Ladakh Sixth Schedule Demand: आम तौर पर शांत रहने वाला लद्दाख इस बार गुस्से में है। 25 सितंबर को लेह की सड़कों पर हजारों युवा उतर आए, नारेबाजी, आगजनी और हिंसा तक हुई। वजह, लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग। इस प्रदर्शन में अब तक चार लोगों की मौत और 80 से ज्यादा घायल होने की खबर है। गुरुवार को कर्फ्यू के दौरान 50 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया।

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की चार मांगें?

लद्दाख के लोगों की मांगें साफ हैं:

  • लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले
  • संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए
  • लोकसभा सीटें बढ़ाकर दो की जाएं
  • जनजातियों को आदिवासी का दर्जा मिले

छठी अनुसूची क्या होती है? (What is Sixth Schedule)

भारतीय संविधान की छठी अनुसूची पूर्वोत्तर भारत के आदिवासी इलाकों को स्वायत्तता देती है ताकि उनकी संस्कृति, जमीन और परंपराएं सुरक्षित रहें। ये असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में लागू है। इसके तहत स्वायत्त जिला परिषदें बनती हैं जो स्थानीय कानून बना सकती हैं।

स्वायत्त परिषदें क्या कर सकती हैं?

हर स्वायत्त परिषद में 30 सदस्य होते हैं, जिनमें 4 राज्यपाल या उपराज्यपाल द्वारा मनोनीत और 26 वोटिंग के जरिए चुने जाते हैं। ये परिषदें भूमि, जंगल, शिक्षा, टैक्स, विवाह, रीति-रिवाज और ग्राम प्रशासन जैसे मामलों पर कानून बना सकती हैं। कुछ न्यायिक अधिकार भी इनके पास होते हैं।

लद्दाख के लोगों को क्यों सता रही है चिंता?

लद्दाख की 97% आबादी अनुसूचित जनजाति है। यहां बौद्ध और मुस्लिम संस्कृति है, जिसे लोग सहेजना चाहते हैं। उन्हें डर है कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद बाहरी लोग उनकी जमीनें खरीद सकते हैं। छठी अनुसूची लागू होने से उन्हें अपनी जमीन और संसाधनों पर नियंत्रण मिलेगा।

लद्दाख के लोग चाहते हैं कि सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं को आरक्षण मिले। छठी अनुसूची के तहत बनने वाली परिषदें शिक्षा और रोजगार से जुड़े नियम बना सकती हैं, जिससे स्थानीय लोगों को फायदा होगा।

गौर करने वाली बात है कि 5 अगस्त 2019 को जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाया, तो जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया गया था। एक तरफ बना जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश, और दूसरी तरफ लेह, लद्दाख और करगिल को मिलाकर बना एक अलग केंद्र शासित प्रदेश। अब उसी लद्दाख को लेकर लोगों की मांग है कि उसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिले और साथ ही उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए।

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