Hanle Red Sky: नॉर्दर्न लाइट्स नहीं, है बड़े खतरे का संकेत! लद्दाख के हानले में लाल आसमान देख हर कोई हैरान

Hanle Red Sky: लद्दाख के हानले में दिखी रहस्यमयी लाल रोशनी के पीछे एक ताकतवर सोलर स्टॉर्म था। यह घटना बताती है कि सूरज ज्यादा सक्रिय हो रहा है। ऐसे तूफान सैटेलाइट, पावर ग्रिड और डिजिटल सिस्टम के लिए खतरा बन सकते हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड29 Jan 2026, 06:35 PM IST
लद्दाख के हानले में लाल आसमान देख हर कोई हैरान
लद्दाख के हानले में लाल आसमान देख हर कोई हैरान(X/@snorl)

Ladakh Red sky: लद्दाख के हानले का आसमान आमतौर पर गहरे नीले रंग में डूबा रहता है, जहां दूर-दूर तक सिर्फ तारे और आकाशगंगाएं चमकती दिखती हैं। लेकिन 19 और 20 जनवरी की रात कुछ ऐसा हुआ, जिसने वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों को भी चौंका दिया। हानले डार्क स्काई रिजर्व के ऊपर आसमान अचानक लाल रंग से भर गया। सोशल मीडिया पर इन नजारों को नॉर्दर्न लाइट्स कहकर सराहा गया, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर है।

क्या है लाल आसमान के पीछे का कारण?

दरअसल, 18 जनवरी को सूरज से एक बेहद शक्तिशाली X-क्लास सोलर फ्लेयर निकला, जिसके साथ चुंबकीय गैसों का एक विशाल बादल अंतरिक्ष में फैल गया। इसे कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है। यह सोलर बादल करीब 1,700 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से धरती की ओर बढ़ा और सिर्फ 25 घंटे में हमारे वातावरण तक पहुंच गया। जब ये कण धरती के मैग्नेटिक फील्ड से टकराए, तो G4 स्तर का जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म पैदा हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये साल 2003 के बाद का सबसे ताकतवर सोलर रेडिएशन स्टॉर्म था।

हरे रंग के बजाय क्यों दिखा लाल रंग?

आमतौर पर ध्रुवीय इलाकों में दिखने वाली ऑरोरा हरे रंग की होती हैं, लेकिन लद्दाख जैसे निचले अक्षांशों पर लाल रंग दिखाई देता है। इसका कारण है ऊंचाई पर मौजूद ऑक्सीजन एटम्स, जो 300 किलोमीटर से ज्यादा ऊपर सोलर कणों से उत्तेजित होकर लाल रोशनी छोड़ते हैं। ISRO के मुताबिक, जैसे-जैसे सूरज अपने सोलर मैक्सिमम की ओर बढ़ रहा है, ऐसे घटनाक्रम अब ज्यादा बार देखने को मिल सकते हैं।

भारत को इससे क्या है खतरा?

यह नजारा देखने में भले ही बहुत खूबसूरत है लेकिन ये उतना ही खतरनाक भी है। जनवरी 2026 की यह घटना S4 श्रेणी की सोलर रेडिएशन स्टॉर्म थी। NASA और ISRO के डेटा बताते हैं कि ऐसे तूफान धरती की मैग्नेटिक शील्ड को इतना दबा सकते हैं कि जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स सीधे सोलर विंड की चपेट में आ जाएं। ऐसे हालात में पावर ग्रिड में करंट पैदा हो सकता है, जिससे ब्लैकआउट का खतरा रहता है। सैटेलाइट्स पर असर पड़ सकता है, GPS, बैंकिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम भी प्रभावित हो सकते हैं। इस बार तो ISS में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को भी बढ़े रेडिएशन के चलते सुरक्षित जगह पर शरण लेनी पड़ी।

बचने के लिए क्या है तैयारी?

भारत इन खतरों से निपटने के लिए अपनी तैयारी मजबूत कर रहा है। आदित्य-L1 मिशन L1 पॉइंट पर सूरज पर लगातार नजर रखे हुए है। इससे वैज्ञानिकों को 24 से 48 घंटे पहले चेतावनी मिल सकती है, ताकि सैटेलाइट्स को सेफ मोड में डाला जा सके और पावर ग्रिड को सुरक्षित किया जा सके। जमीन पर भी पावर सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। हानले में मौजूद इंडियन एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी सैटेलाइट डेटा की पुष्टि में अहम भूमिका निभाती है।

क्यों जरूरी है हानले का अंधेरा?

हानले भारत का पहला डार्क स्काई रिजर्व है, लेकिन बढ़ता पर्यटन यहां की सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अगर लाइट पॉल्यूशन बढ़ा, तो ये वैज्ञानिक संकेत धुंधले पड़ सकते हैं। हानले का अंधेरा ही हमें अंतरिक्ष से आने वाले खतरों को समय पर समझने में मदद करता है।

लद्दाख के आसमान में दिखी लाल चमक सिर्फ एक खूबसूरत तस्वीर नहीं, बल्कि चेतावनी है। सूरज अब ज्यादा सक्रिय हो रहा है और हमारी डिजिटल दुनिया जितनी आधुनिक है, उतनी ही नाजुक भी। इन संकेतों को समझना और समय रहते तैयारी करना अब बेहद जरूरी हो गया है।

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