
Lenskart Controversy : चश्मा बनाने वाली मशहूर कंपनी लेंसकार्ट इस समय सोशल मीडिया पर बड़े विवादों में घिरी है। विवाद की जड़ कंपनी का एक कथित ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट है, जिसमें कर्मचारियों के लिए बिंदी, तिलक और कलावा पहनने पर रोक की बात कही गई थी, जबकि हिजाब को अनुमति दी गई थी। इस मुद्दे ने अब तूल पकड़ लिया है क्योंकि लोग इसे धार्मिक भेदभाव मान रहे हैं। यह सीधे तौर पर एक ग्राहक के रूप में आपकी पसंद और कंपनी के कार्यक्षेत्र में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों से जुड़ा मामला है।
सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट का एक 'स्टाइल गाइड' डॉक्यूमेंट वायरल हो रहा है। लेखिका शेफाली वैद्य ने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है, जिसमें लिखा है कि कंपनी में 'हिजाब पहनना ठीक है, लेकिन बिंदी और कलावा की अनुमति नहीं है।' शेफाली ने इसे 'धार्मिक विषमता' करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि हिंदू बहुल भारत में, जहां कंपनी के अधिकतर कर्मचारी और ग्राहक हिंदू हैं, वहां ऐसी पॉलिसी कैसे हो सकती है?
विवाद बढ़ता देख लेंसकार्ट के फाउंडर और सीईओ पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया पर सफाई दी। उन्होंने कहा, 'यह डॉक्यूमेंट हमारी वर्तमान गाइडलाइंस को नहीं दर्शाता है। हमारी पॉलिसी में बिंदी और तिलक सहित किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई रोक नहीं है।' बंसल ने स्वीकार किया कि यह एक पुराना इंटरनल ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट था जिसमें बिंदी/तिलक को लेकर गलत लाइन लिखी गई थी। उन्होंने आगे कहा, 'जब हमें 17 फरवरी को इस बारे में पता चला, तो हमने इसे तुरंत हटा दिया था। एक फाउंडर के तौर पर इस चूक की जिम्मेदारी मेरी है।'
सुप्रीम कोर्ट के वकील शशांक शेखर झा ने भी इस मुद्दे पर पीयूष बंसल की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 के इस डॉक्यूमेंट में हिंदू पहचान के प्रतीकों जैसे कलावा और बिंदी पर बैन लगाया गया था, जो शर्मनाक है। वहीं, सावित्री मुमुक्षु नाम की यूजर ने कंपनी के बयान को 'सच्चाई से भागने वाला' बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल भाषा की गलती नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट भेदभाव का सबूत है।
उधर, वैज्ञानिक डॉ. विजय चौथेवाले ने पीयूष बंसल ने कहा कि पीयूष बंसल का सफाई उत्तर देने के बजाय और कई प्रश्न खड़े करते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसी पॉलिसी लागू करने वाले को दंडित किया गया है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या लेंसकार्ट में भी नासिक स्थित टीसीएस जैसा गैंग चल रहा है?
सीईओ की सफाई के बाद शेफाली वैद्य ने एक बार फिर तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ 'डैमेज कंट्रोल' का एक कमजोर प्रयास है। उन्होंने सवाल पूछा, 'यह भयानक डॉक्यूमेंट किसने तैयार किया? यह इंटरनल मीटिंग में कैसे पास हो गया? कंपनी को संदर्भ देने के बजाय साफ तौर पर माफी मांगनी चाहिए।' उन्होंने यह भी ऐलान किया कि वह अब कभी लेंसकार्ट से कोई सामान नहीं खरीदेंगी।
पीयूष बंसल ने आश्वासन दिया है कि वह खुद इन चीजों की समीक्षा करेंगे ताकि भविष्य में ऐसी गलती न हो। उन्होंने कहा कि लेंसकार्ट के हजारों कर्मचारी स्टोर पर अपनी आस्था और संस्कृति के प्रतीकों को गर्व से पहनते हैं और कंपनी कभी भी धार्मिक प्रतीकों पर रोक नहीं लगाएगी।
ध्यान रहे कि महाराष्ट्र के नासिक स्थित आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में मुस्लिम अधिकारियों पर हिंदू महिलाओं को प्रताड़ित करने, हिंदू धर्म का मजाक उड़ाने, इस्लामी प्रतीकों का दबदबा कायम करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
वहां मुस्लिम महिला एचआर थी जिस पर हिंदू पीड़ितों की शिकायतें अनसूनी करते हुए बिरादरी के मुस्लिम आरोपियों का पक्ष लेने का आरोप है। मामले में नौ मुस्लिम आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। इस खबर के सामने आने के बाद दावा किया जा रहा है कि कॉर्पोरेट वर्ल्ड में ऐसे जिहादी तत्व भरे पड़े हैं जहां हिंदुओं के साथ अन्याय और अत्याचार हो रहे हैं।
Disclaimer : यह खबर सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर किए जा रहे अलग-अलग पोस्ट पर आधारित है। यह खबर सिर्फ जानकारी के लिए है।
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