उज्जैन: मध्यप्रदेश की प्राचीन नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। शिव नवरात्रि के तीसरे दिन संध्या पूजन के बाद भगवान महाकालेश्वर ने शेषनाग धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। इस अवसर पर भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसमें मुकुट, मुंडमाला, नागकुंडल और फलों की माला शामिल रही।
देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख महाकालेश्वर मंदिर में यह पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शिव नवरात्रि के दौरान भगवान महाकालेश्वर 14 फरवरी तक हर दिन अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे।
मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार, मंदिर परिसर स्थित कोटितीर्थ तट पर सुबह 8 बजे श्री गणेश पूजन और श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन किया गया। इसके बाद शिव नवरात्रि के तीसरे दिन की शुरुआत पूजन, अभिषेक और आरती से हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के मार्गदर्शन में 11 ब्राह्मणों ने भगवान महाकालेश्वर का एकादश-एकादशिनी रुद्रपाठ के साथ अभिषेक किया।
यह पूजन क्रम 14 फरवरी तक रोज जारी रहेगा। दोपहर 3 बजे पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकालेश्वर ने भांग श्रृंगार कर निराकार से साकार रूप धारण किया। मंदिर सूत्रों ने बताया कि सोमवार, 9 फरवरी को भगवान महाकालेश्वर ‘घटाटोप’ स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे।
इसके साथ ही 6 फरवरी से डॉ. अजय अपामार्जने की नौ दिवसीय हरिकीर्तन कथा का आयोजन भी किया जा रहा है। यह कथा प्रतिदिन शाम 5 से 6 बजे तक मंदिर परिसर में नवग्रह मंदिर के पास संगमरमर के चबूतरे पर हो रही है।
हरिकीर्तन के तीसरे दिन डॉ. अपामार्जने ने संत कबीर महाराज के भजन “कब सुमिरोगे राम अब तुम” के माध्यम से नामस्मरण, जीवन के उद्देश्य और शिव भक्ति का भावपूर्ण संदेश दिया। तबले पर श्रीधर व्यास ने संगत की।