
विक्रम संवत 2082, भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा यानी 7 सितंबर को खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने ग्रहण के समय की जानकारी जारी की है।
काशी में ग्रहण का समय रात्रि 9:57 बजे से मध्य रात्रि 11:41 बजे और मोक्ष रात्रि 1:27 बजे होगा। धर्मशास्त्रों के अनुसार, चंद्रग्रहण से नौ घंटे पूर्व और सूर्यग्रहण से 12 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ होता है।
श्री काशी विश्वनाथ, जो समस्त लोक, देवता, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, सुर और असुरों के स्वामी हैं। उनपर सूतक का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, फिर भी जनमानस और प्राणीमात्र के लिए ग्रहण सूतक दोष मान्य है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की परंपरा के अनुसार, चंद्र या सूर्यग्रहण के स्पर्श से लगभग दो घंटे पूर्व मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसी परंपरा के अनुरूप, 7 सितंबर को होने वाले चंद्रग्रहण के अवसर पर मंदिर की आरती और पूजा व्यवस्था बदले समयानुसार होगी।
चंद्रग्रहण के दौरान भोजन करना, पूजा-पाठ करना, सुनसान जगह या श्मशान भूमि में जाना, नए काम की शुरुआत करना वर्जित है। चंद्रग्रहण के बाद घर का शुद्धीकरण करना चाहिए। 7 सितंबर को वर्ष 2025 में भारत का आखिरी चंद्रग्रहण लगेगा, तब हर किसी को इन बातों का ख्याल रखना चाहिए।
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