Khamenei Killed: अमेरिकी-इजराइली हमलों में खामेनेई की मौत पर दुनियाभर के नेताओं ने दी सधी हुई प्रतिक्रिया

Ayatollah Ali Khamenei Killing: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। भारत ने अब तक आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बाकी देश बहुत सधे शब्दों में बयान जारी कर रहे हैं। 

एडिटेड बाय Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम एपी)
अपडेटेड1 Mar 2026, 01:05 PM IST
खामेनेई के मारे जाने पर किसने क्या कहा
खामेनेई के मारे जाने पर किसने क्या कहा

US-Iran War: यह कब तक चलेगा? क्या यह और बढ़ेगा? ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर और ईरान के साथ जारी टकराव का हम पर और दुनिया की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा? शनिवार को ये सवाल पश्चिम एशिया और दुनियाभर के लोगों की जेहन में छाए रहे। हालांकि, अमेरिका-इजराइल के ईरान पर किए गए हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने संयमित प्रतिक्रिया दी।

खामेनेई की मौत पर UNSC की आपात बैठक

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई की मौत की घोषणा करते हुए कहा कि इससे ईरानियों को अपने देश की बागडोर अपने हाथों में 'वापस लेने का सबसे बड़ा मौका' मिला है। ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार तड़के 86 वर्षीय नेता की मौत की पुष्टि की लेकिन मौत की वजह नहीं बताई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपात बैठक बुलाई है।

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने की बातचीत की अपील

वहीं, एक बयान में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका-ईरान से फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके देश ईरान पर हुए हमलों में शामिल नहीं हैं, लेकिन वे अमेरिका, इजराइल और क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं।

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खामेनेई की मौत पर ईरान में मातम
(AFP)
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मैक्रों बोले- अपना भविष्य खुद तय करें ईरानी

ये तीनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत से समाधान की कोशिशों में आगे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हम क्षेत्र के देशों पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। ईरान को बिना सोचे-समझे सैन्य हमले करने से बचना चाहिए। आखिर में, ईरानी लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने देना चाहिए।'

बाद में, आपात सुरक्षा बैठक में मैक्रों ने कहा कि ईरान पर हुए हमलों के बारे में फ्रांस को न पहले से बताया गया था और न ही फ्रांस इसमें शामिल था। उन्होंने कहा कि बातचीत से समाधान निकालने की कोशिशें और तेज करनी चाहिए। मैक्रों ने कहा, 'ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसकी बैलिस्टिक गतिविधियों और क्षेत्र में अस्थिरता जैसे मुद्दे सिर्फ हमलों से ही हल हो जाएंगे, यह सोचना गलत है।'

ये हमले पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना हैं। इससे तनाव और बढ़ सकता है, साथ ही परमाणु हथियारों के विस्तार और परमाणु हथियार के इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ सकता है।- मेलिसा पार्के, कार्यकारी निदेशक, इंटरनेशनल कैंपेन टू अबोलिश न्यूक्लियर वेपन

अरब लीग ने बताया संप्रभुता का खुला उल्लंघन

22 देशों के अरब लीग ने ईरान के हमलों को 'शांति का समर्थन करने और स्थिरता लाने की कोशिश करने वाले देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन' बताया। यह समूह पहले भी इजराइल और ईरान के ऐसे कदमों की निंदा करता रहा है जिनसे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा हो सकता है। मोरक्को, जॉर्डन, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात ने कुवैत, बहरीन, कतर और अमीरात समेत क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डो को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमलों की निंदा की।

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नए शासन में सीरिया का बदला सुर

पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के समय में सीरिया इस क्षेत्र में ईरान का बहुत करीबी सहयोगी था और इजराइल का कड़ा आलोचक भी था। लेकिन सीरिया के विदेश मंत्रालय के बयान में सिर्फ ईरान की निंदा की गई, जो दिखाता है कि नई सरकार आर्थिक रूप से शक्तिशली देशों और अमेरिका के साथ रिश्ते फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

सऊदी अरब और ओमान के उलट बयान

सऊदी अरब ने कहा कि वह 'ईरान की विश्वासघाती आक्रामक कार्रवाई और संप्रभुता के खुले उल्लंघन की कड़े शब्दों में निंदा करता है।' ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान ने बयान में कहा कि अमेरिका की कार्रवाई 'अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के सिद्धांत का उल्लंघन है। विवाद शुत्रता और खून-खराबे से नहीं, शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाए जाने चाहिए।'

न्यूजीलैंड ने इजरायल-अमेरिका का दिया साथ

इस पूरे मामले पर देशों के बयान बेहद संयमित शब्दों में आ रहे हैं। न्यूजीलैंड ने खुलकर पूरा समर्थन नहीं किया, लेकिन शनिवार को कहा कि अमेरिका-इजराइल के हमले ईरान सरकार को भविष्य का खतरा बनने से रोक रहे हैं। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्जन और विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने संयुक्त बयान में कहा, 'किसी सरकार की वैधता उसके लोगों के समर्थन पर टिकी होती है। ईरानी शासन बहुत पहले ही वह समर्थन खो चुका है।'

हम क्षेत्र के देशों पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। ईरान को बिना सोचे-समझे सैन्य हमले करने से बचना चाहिए। आखिर में, ईरानी लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने देना चाहिए।- इमैनुएल मैक्रों, राष्ट्रपति, फ्रांस

रूस ने कहा- अमेरिका ने किया संप्रभु राष्ट्र पर हमला

रूस के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को 'पहले से तय और बिना उकसावे का, एक संप्रभु और संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश पर सशस्त्र हमला' बताया। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम की चिंता की 'आड़' ले रहे हैं, जबकि उनका असली मकसद सत्ता को बदलना है।

चीन ने भी इजरायली हमलों पर जताई चिंता

इसी तरह चीन की सरकार ने कहा कि वह ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों को लेकर 'बहुत चिंतित' है। चीन ने सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने और फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया। चीन के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, 'ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और उसके क्षेत्र की अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।'

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खामेनेई की मौत की खबर सुनकर सड़कों पर उतरे ईरानी
( West Asia News Agency Via Reuters)

खींचतान भरे रिश्ते के बावजूद अमेरिकी खेमे खड़ा हुआ कनाडा

अमेरिका के साथ हाल में तनावपूर्ण रहे संबंधों के बावजूद कनाडा ने भी इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, 'ईरान का इस्लामी शासन पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और आतंक का सबसे बड़ा स्रोत है।'

नॉर्वे को इस बात की चिंता

कई देशों में चिंता साफ दिख रही है। नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ आइडे ने नॉर्वे के प्रसारक एनआरके से बातचीत में कहा कि उन्हें चिंता है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नाकाम होने का मतलब पश्चिम एशिया में 'एक नया, बड़ा युद्ध' हो सकता है।

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नोबेल विजेता संगठन ने की शांति बहाली की अपील

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता संगठन 'इंटरनेशनल कैंपेन टू अबोलिश न्यूक्लियर वेपन' ने अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। इस संगठन की कार्यकारी निदेशक मेलिसा पार्के ने कहा, 'ये हमले पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना हैं। इससे तनाव और बढ़ सकता है, साथ ही परमाणु हथियारों के विस्तार और परमाणु हथियार के इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ सकता है।'

अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के सिद्धांत का उल्लंघन है। विवाद शुत्रता और खून-खराबे से नहीं, शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाए जाने चाहिए।- खाड़ी देश ओमान

EU की सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील

यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं ने शनिवार को संयुक्त बयान जारी करके सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयास बढ़ाने की अपील की, ताकि 'परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित' की जा सके।

अरब लीग ने पूरी दुनिया से किया आह्वान

अरब लीग ने भी सभी अंतरराष्ट्रीय नेताओं से कहा कि वे 'जितनी जल्दी हो सके तनाव कम करने' के लिए काम करें, ताकि क्षेत्र को अस्थिरता और हिंसा की मार से बचाया जा सके, और फिर से बातचीत की राह अपनाई जा सके।

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