Maghi Purnima 2026: माघी पूर्णिमा पर दुर्लभ संयोग! पुष्य नक्षत्र के साथ 7 योग का संगम, जानिए स्नान का शुभ मुहूर्त

Maghi Purnima 2026: 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा पर विशेष योग और पुष्य नक्षत्र का संयोग होगा। इस दिन स्नान से पापों का नाश होगा और ब्रह्म मुहूर्त और अन्य विशेष समय पर स्नान करना फलदायी है…

Anuj Shrivastava
अपडेटेड31 Jan 2026, 12:11 PM IST
कब है पूर्णिमा
कब है पूर्णिमा

Maghi Purnima 2026: इस बार माघी पूर्णिमा के दिन दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। एक साथ सात शुभ योग और पुष्य नक्षत्र की युति में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा सकेंगे। सूर्य और चंद्रमा के विशेष योग के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग अत्यंत फलदायी होगा। ये योग 1 फरवरी की भोर से 2 फरवरी की भोर तक रहेगा। पूर्णिमा तिथि चंद्रमा को अत्यंत प्रिय मानी जाती है।

किस दिन है पूर्णिमा?

बटुक भैरव मंदिर के महंत एवं वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य जितेंद्र मोहन पूरी ने बताया कि माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फरवरी को प्रातः 5.19 बजे से अगले दिन 2 फरवरी को प्रातः 3.46 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार माघ पूर्णिमा का स्नान इसलिए 1 फरवरी को अत्यंत फलदायी होगा। इस दिन विशेष प्रीति योग, रवि योग, सर्वार्थसिद्धि योग, रवि आयुष्मान योग, श्रीवत्स योग और उत्तम योग बनेंगे।

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1 फरवरी को काशी के गंगा घाटों अथवा प्रयागराज के संगम में स्नान करने से अनन्य फल की प्राप्ति तथा पापों का नाश होता है। इस दिन वस्त्र, अनाज, फल आदि का दान करना चाहिए। माघ पूर्णिमा स्नान के लिए तीन विशेष मुहूर्त बन रहे हैं।

कितने बजे शुरू होगा माघी पूर्णिमा क ब्रह्म मुहूर्त?

ब्रह्म मुहूर्त - 1 फरवरी को प्रातः 5.24 बजे से 6.18 बजे तक, रवि पुष्य योग - प्रातः 7.09 बजे से रात्रि 11.58 बजे तक और मीन लग्न मुहूर्त - प्रातः 8.46 बजे से 10.15 बजे तक रहेगा।

हिंदू धर्म में रविवार को भगवान भास्कर (सूर्यदेव) का दिन माना जाता है। इस दिन गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी/जलाशय में स्नान करने के बाद जल में खड़े होकर सूर्यदेव की कुछ देर आराधना अवश्य करनी चाहिए। साथ ही भगवान श्रीहरि विष्णु को पीले पुष्प और मिष्ठान अर्पित करना शुभ फलदायी होगा।

माघी पूर्णिमा पर क्या न करें?

  • बिना स्नान किए पूजा या दान न करें, ब्रह्म मुहूर्त में देर तक सोना अशुभ माना जाता है।
  • इस दिन असत्य बोलना, दूसरों को अपमानित करना या गुस्सा करना पुण्यफल को नष्ट कर देता है।
  • मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से दूर रहें, केवल सात्विक आहार ग्रहण करें।
  • दान न करना या दिखावे के लिए दान करना अशुभ माना जाता है, सच्चे भाव से दान करें।
  • सूर्यदेव और भगवान विष्णु की आराधना में कोताही न बरतें, स्नान के बाद जल अर्पित करना और पीले पुष्प चढ़ाना आवश्यक है।

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