
मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जो सूर्य की गति के साथ जुड़ा होता है। जहां अधिकतर हिंदू त्योहारों की तारीख हर साल बदलती रहती है, वहीं मकर संक्रांति लगभग एक ही समय पर आती है। यह पृथ्वी के प्राकृतिक चक्र और सूर्य की स्थिर गति पर आधारित है।
यह पर्व उस दिन मनाया जाता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी के साथ उत्तरायण की शुरुआत होती है, यानी सूर्य का उत्तर दिशा की ओर बढ़ना। परंपरागत रूप से इसे प्रगति, अनुशासन और मानसिक स्पष्टता का संकेत माना जाता है।
इस साल मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी को मनाई जा रही है। इस वर्ष इसका विशेष महत्व है क्योंकि यह पर्व एकादशी तिथि पर पड़ रहा है, जो संयम, सादगी और जागरूक जीवन से जुड़ी मानी जाती है। मकर संक्रांति स्वभाव से शोर-शराबे वाला त्योहार नहीं है। इसका अर्थ शांत कर्मों, सोच-समझकर लिए गए निर्णयों और नियमित आदतों में छिपा है।
संक्रांति के क्षण के बाद का समय पुण्य काल कहलाता है। इस अवधि को स्नान, दान और पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। 15 जनवरी को पुण्य काल का समय सुबह 7:15 से 12:00 तक है। इस समय स्नान या दान करने से तुरंत फल की बजाय मन की स्थिरता और स्पष्टता मिलने की मान्यता है।
ज्योतिष में सूर्य व्यवस्था, जिम्मेदारी और दिशा का प्रतीक है। मकर राशि पर शनि का शासन होता है, जो अनुशासन, धैर्य और संरचना से जुड़ा ग्रह है।
जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तो भावनाओं की जगह कर्तव्य, योजना और दीर्घकालिक प्रयासों पर जोर बढ़ जाता है। 2026 के लिए पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार:
ये संकेत शास्त्रीय ग्रंथों पर आधारित सामान्य प्रवृत्तियां हैं, इन्हें निश्चित भविष्यवाणी नहीं समझना चाहिए।
मकर संक्रांति एक धीरे-धीरे आने वाले बदलाव का प्रतीक है। इस समय दिन लंबे होने लगते हैं, प्रकाश बढ़ता है और ठंड धीरे-धीरे कम होती है।
आध्यात्मिक रूप से यह पर्व भारीपन से बाहर आने का संकेत देता है। यह बिना कठोरता के अनुशासन और बिना दबाव के प्रयास की सीख देता है। यह दिन जुड़ा है:
इसी कारण यह पर्व गृहस्थों और साधकों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यह अचानक बदलाव नहीं, बल्कि धीरे-धीरे होने वाले आंतरिक विकास को प्रोत्साहित करता है।
मकर संक्रांति पर स्नान को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। परंपरागत रूप से लोग गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं।
जल को नवीकरण का माध्यम माना जाता है। इस दिन स्नान केवल शारीरिक शुद्धि के लिए नहीं, बल्कि मन और शरीर को नया करने का एक तरीका है। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से:
जो लोग यात्रा नहीं कर सकते, उनके लिए घर पर स्नान भी उतना ही फलदायी माना गया है। कई लोग पानी में तिल या थोड़ा गंगाजल मिलाते हैं। असली महत्व भावना का होता है।
मकर संक्रांति में दान का विशेष स्थान है। सूर्य के परिवर्तन को संतुलन का समय माना जाता है और दान उसी संतुलन को दर्शाता है। इस दिन किया गया दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि शांत और सच्चे भाव से होना चाहिए। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर दान करने से:
इस दिन दान की जाने वाली वस्तुएं साधारण और उपयोगी होती हैं, खासकर सर्दियों में काम आने वाली। परंपरागत दान सामग्री में शामिल हैं:
ये सभी वस्तुएं पोषण, गर्माहट और देखभाल का प्रतीक मानी जाती हैं।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.