Sreenivasan death cause: मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, लेखक और निर्देशक श्रीनिवासन अब हमारे बीच नहीं रहे। चार दशक से ज्यादा समय तक सिनेमा को नई सोच देने वाले श्रीनिवासन का निधन उनके चाहने वालों के लिए गहरा सदमा है।
मातृभूमि की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 69 वर्षीय श्रीनिवासन लंबे समय से बीमार चल रहे थे और केरल के उदयमपेरूर स्थित अपने आवास पर इलाज करा रहे थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें त्रिप्पुनिथुरा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार सुबह उनके निधन की पुष्टि हुई। परिवार या टीम की ओर से फिलहाल मौत की वजह को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
बचपन, शिक्षा और करियर
श्रीनिवासन का जन्म 6 अप्रैल 1956 को केरल के कन्नूर जिले के थालास्सेरी के पास पाट्यम गांव में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई कादीरूर में हुई और इसके बाद उन्होंने मट्टनूर के PRNSS कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। फिल्मों के प्रति जुनून उन्हें चेन्नई के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ तमिलनाडु तक ले गया, जहां से उन्होंने औपचारिक फिल्म प्रशिक्षण हासिल किया।
चार दशक का फिल्मी सफर
श्रीनिवासन ने मलयालम सिनेमा को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज से जोड़ने का काम किया। उनकी खासियत थी तीखा सामाजिक व्यंग्य, आम आदमी की भाषा और गहरी सोच। करीब 40 साल के करियर में उन्होंने 225 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और ऐसी पटकथाएं लिखीं, जो आज भी क्लासिक मानी जाती हैं।
निर्देशक के तौर पर भी छोड़ी गहरी छाप
एक निर्देशक के रूप में भी श्रीनिवासन ने अपनी अलग पहचान बनाई। वडक्कुनोक्कियंथ्रम और चिंताविष्टयाया श्यामला जैसी फिल्मों ने यह साबित किया कि वे सिर्फ लेखक या अभिनेता ही नहीं, बल्कि संवेदनशील फिल्मकार भी थे। इन फिल्मों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बड़े सम्मान मिले।
सम्मान और पुरस्कार
अपने शानदार करियर में श्रीनिवासन को नेशनल फिल्म अवॉर्ड, केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड, फिल्मफेयर अवॉर्ड साउथ समेत कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी नवाजा गया, जो उनके योगदान की गवाही देता है।
श्रीनिवासन अपने पीछे पत्नी विमला और बेटे विनीत स्रीनिवासन व ध्यान स्रीनिवासन को छोड़ गए हैं। दोनों ही मलयालम सिनेमा में सक्रिय हैं।