घूसखोर पंडत की टीम पर हुई FIR तो सामने आया मनोज बाजपेयी का बयान, ट्वीट करते हुए एक्टर ने कही ये बात, जानें

नेटफ्लिक्स की फिल्म घूसखोर पंडत अपने टाइटल को लेकर विवाद में आ गई है। मेकर्स पर धार्मिक और जातीय भावनाएं आहत करने का आरोप लगा है। मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे ने कहा कि फिल्म काल्पनिक है और किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाती। प्रमोशनल सामग्री हटा दी गई है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड6 Feb 2026, 05:36 PM IST
मनोज बाजपेयी
मनोज बाजपेयी

नेटफ्लिक्स इंडिया ने जब साल 2026 के लिए अपनी नई वेब सीरीज और फिल्मों की घोषणा की, तो फिल्म घूसखोर पंडत गलत कारणों से चर्चा में आ गई। फिल्म के टाइटल और कंटेंट को लेकर भावनाएं आहत करने का आरोप लगाते हुए इसके मेकर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इस विवाद पर निर्देशक नीरज पांडे के बाद अब अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

घूसखोर पंडत विवाद पर मनोज बाजपेयी का बयान

मनोज बाजपेयी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर नीरज पांडे के बयान को शेयर करते हुए कहा कि उनका किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने लिखा कि वह लोगों की भावनाओं और चिंताओं का सम्मान करते हैं और उन्हें गंभीरता से लेते हैं।

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उन्होंने आगे कहा कि जब किसी प्रोजेक्ट से कुछ लोगों को दुख पहुंचता है तो रुककर उनकी बात सुनना जरूरी होता है। मनोज ने यह भी साफ किया कि फिल्म का मकसद किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं था। उनके अनुसार, वह एक अभिनेता के रूप में सिर्फ किरदार और कहानी पर ध्यान देते हैं। यह फिल्म एक गलतियों से भरे इंसान और उसके आत्मबोध की कहानी है।

मनोज ने यह भी कहा कि नीरज पांडे हमेशा अपनी फिल्मों को जिम्मेदारी और गंभीरता से बनाते हैं। उन्होंने बताया कि जनता की भावनाओं को देखते हुए फिल्म का प्रमोशनल मैटेरियल फिलहाल हटा लिया गया है, जिससे साफ है कि मेकर्स इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं।

नीरज पांडे ने दिया बयान

नीरज पांडे ने शुक्रवार को बयान जारी करते हुए कहा कि ‘घूसखोर पंडत’ की कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और इसका किसी जाति या समुदाय से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने माना कि फिल्म के टाइटल से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, इसलिए सभी प्रमोशनल सामग्री हटा ली गई है।

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उन्होंने कहा कि फिल्म में ‘पंडत’ शब्द सिर्फ एक काल्पनिक किरदार का नाम है। कहानी एक व्यक्ति के फैसलों और उसके कामों पर आधारित है और किसी धर्म, जाति या समुदाय पर टिप्पणी नहीं करती। उन्होंने बताया कि वह हमेशा जिम्मेदारी और सम्मान के साथ फिल्में बनाते हैं।

फिल्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई

फिल्म की घोषणा के बाद इसे लेकर विरोध शुरू हो गया और एफआईआर दर्ज कराई गई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी सूचना और प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि फिल्म का टाइटल नकारात्मक छवि दिखाता है और एक सामाजिक समूह का अपमान करता है।

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इसके अलावा दिल्ली हाईकोर्ट में फिल्म की रिलीज रोकने के लिए याचिका भी दायर की गई है। लखनऊ के हजरतगंज थाने में नीरज पांडे और फिल्म के मेकर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। आरोप है कि फिल्म का टाइटल धार्मिक और जातीय भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकता है। पुलिस का कहना है कि पहली नजर में टाइटल खास तौर पर ब्राह्मण समुदाय को भ्रष्टाचार से जोड़कर दिखाता है।

क्या है फिल्म की कहानी?

इस फिल्म में मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म की कहानी अजय दीक्षित नाम के एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी पर आधारित है, जिसे ‘पंडत’ कहा जाता है। उसकी जिंदगी एक बड़े अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र में फंसने के बाद बदल जाती है, जो दिल्ली में घटित होता है।

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