
Dogs and human behavior: क्या आप जानते हैं कि आपका पालतू कुत्ता केवल आपका दोस्त नहीं, बल्कि आपके व्यवहार को भी प्रभावित कर सकता है? एक नई रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है। इस स्टडी के मुताबिक, कुत्ते पालने से हमारे पेट के माइक्रोबायोम में बदलाव आता है, जिससे हम ज्यादा सहानुभूति रखने वाले और सामाजिक बन सकते हैं।
यह स्टडी जापान की अजाबू यूनिवर्सिटी के ताकेफुमी किकुसुई ने यह जानने के लिए की थी कि क्या कुत्ते हमारी आंत के माइक्रोबायोम को बदलकर हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।
रिसर्च टीम ने टोक्यो में रहने वाले 12 से 14 साल की उम्र के 343 किशोरों के देखभाल करने वालों के सर्वे का विश्लेषण किया। इन सर्वे में किशोरों के सामाजिक व्यवहार के कई पहलू शामिल थे। जैसे कि वे कितनी बार अकेलापन महसूस करते हैं, या उन्हें अपने दोस्तों के साथ घुलने-मिलने में कितनी मुश्किल होती है।
सर्वे से यह भी पता चला कि करीब एक तिहाई किशोरों के पास पालतू कुत्ता था। टीम ने यह पाया कि जिन किशोरों के पास कुत्ते थे, वे उन किशोरों के मुकाबले औसतन कम सामाजिक रूप से पीछे हटे हुए थे। साथ ही, वे उन लोगों के मुकाबले कम आक्रामक व्यवहार करते थे जो कुत्ता नहीं पालते हैं।
शोधकर्ताओं को कुत्तों के मालिकों के लार के नमूनों से यह भी पता चला कि उनमें स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया की कई प्रजातियां ज़्यादा थीं। यह ऐसा बैक्टीरिया है जिसका संबंध डिप्रेशन (अवसाद) के लक्षणों को कम करने से जोड़ा गया है।
आयरलैंड के यूनिवर्सिटी कॉलेज कॉर्क के जेरार्ड क्लार्क के अनुसार, 'अगर आप अपने कुत्ते के साथ बहुत खेलते हैं, तो आपको कुत्ते के रोगाणुओं के संपर्क में आने का बहुत मौका मिलेगा। यह संपर्क कुत्ते के चाटने या आपके ऊपर कूदने से भी हो सकता है।'
इसके बाद, टीम ने तीन कुत्ते मालिकों और तीन गैर-कुत्ते मालिकों से मौखिक माइक्रोब लेकर उन्हें रोगाणु-मुक्त चूहों के पेट में ट्रांसप्लांट किया। अगले कुछ हफ्तों तक टीम ने इन चूहों पर कई व्यवहार परीक्षण किए। एक टेस्ट में चूहों को एक पिंजरे में एक और चूहे के साथ रखा गया, जो एक ट्यूब में फंसा हुआ था।
जिन चूहों को कुत्ते के मालिकों से ट्रांसप्लांट मिला था, उन्होंने बिना कुत्ते वालों से ट्रांसप्लांट पाने वाले चूहों की तुलना में ट्यूब को ज्यादा चबाया। उन्होंने ट्यूब के छेद से अपनी नाक को भी काफी बार धकेला। किकुसुई का कहना है कि यह बताता है कि पहले समूह के चूहों में ज्यादा सहानुभूति थी और वे फंसे हुए चूहे की मदद करने की कोशिश कर रहे थे।
क्लार्क बताते हैं कि एक और टेस्ट में इन्हीं चूहों ने अपने पिंजरे में एक अपरीचित चूहे को दूसरे समूह की तुलना में ज्यादा बार सूंघा। इससे यह संकेत मिलता है कि वे अधिक सामाजिक थे। इस स्टडी का सार यह है कि कुत्ते हमें ज्यादा देखभाल करने वाला बना सकते हैं, क्योंकि वे हमारी आंत को बदलते हैं।
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