Microdosing Workouts: जिम जाने का वक्त नहीं है! ‘माइक्रोडोजिंग वर्कआउट’ से बनाएं फिटनेस, क्या है ये और कितना फायदेमंद

आजकल वक्त की कमी के चलते लंबा वर्कआउट करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में 'माइक्रोडोजिंग एक्सरसाइज' ट्रेंड में है। छोटे-छोटे सत्र का यह एक्सरसाइज दिल, फेफड़ों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। रिसर्च कहती है कि दिनभर 5-10 मिनट का व्यायाम करना भी लंबे सेशंस जितना असरदार हो सकता है।

Priya Shandilya
अपडेटेड15 Sep 2025, 02:14 PM IST
लंबे वर्कआउट की नहीं, अब छोटे-छोटे व्यायाम से भी मिलेगा फायदा
लंबे वर्कआउट की नहीं, अब छोटे-छोटे व्यायाम से भी मिलेगा फायदा(Pinterest)

'आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबा वर्कआउट करने का टाइम मिलना मुश्किल है। ऐसे में फिटनेस एक्सपर्ट्स अब 'माइक्रोडोजिंग एक्सरसाइज' की बात कर रहे हैं। द कन्वरसेशन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि माइक्रोडोजिंग एक्सरसाइज यानी छोटे-छोटे समय में एक्सरसाइज करके भी शरीर को फायदा पहुंचाया जा सकता है।

माइक्रोडोजिंग क्या है?

पहले 'माइक्रोडोजिंग' शब्द का इस्तेमाल साइकेडेलिक ड्रग्स की बेहद कम मात्रा लेने के लिए होता था। अब यही आइडिया एक्सरसाइज पर भी लागू किया जा रहा है। इसके तहत जरूरी नहीं कि आप रोज आधा घंटा जिम में बिताएं, बल्कि 5-10 मिनट के छोटे सत्र भी हेल्थ पर असर डाल सकते हैं।

WHO की गाइडलाइन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार वयस्कों को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट तेज चलना या 75 मिनट तीव्र व्यायाम (जैसे दौड़ना, तैरना, साइकिल चलाना) करना चाहिए। इसके साथ ही हफ्ते में 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (जैसे वेट उठाना) भी जरूरी है।

क्या घरेलू काम भी व्यायाम है?

रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे बच्चों के साथ खेलना या बस स्टॉप तक पैदल जाना भी शारीरिक गतिविधि में योगदान देती हैं। जैसे कि पोछा लगाना आदि मध्यम तीव्रता की गतिविधियों का हिस्सा हैं और हेल्थ को फायदा पहुंचाते हैं।

क्या छोटे-छोटे व्यायाम प्रभावी हैं?

साल 2019 में हुए एक विश्लेषण में पाया गया कि दिनभर में कई बार किए गए छोटे व्यायाम सत्र भी हृदय और फेफड़ों की क्षमता, रक्तचाप, और कोलेस्ट्रॉल पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इसमें कुछ मामलों में वजन कम होने के भी संकेत मिले।

बहुत छोटे सत्र भी लाभकारी हो सकते हैं

इसी वर्ष एक अन्य अध्ययन में युवा वयस्कों को दिन में तीन बार, तीन दिन प्रति सप्ताह, केवल 3 मिनट 20 सेकंड के छोटे व्यायाम करने के लिए कहा गया। इनमें 20 सेकंड का तीव्र स्प्रिंट शामिल था। परिणामस्वरूप उनकी एरोबिक क्षमता में सुधार देखा गया, जो दीर्घायु और स्वास्थ्य का एक प्रमुख संकेतक है। हालांकि, यह तरीका वजन घटाने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।

शॉर्ट वर्कआउट, हाई इंटेंसिटी

शोध से पता चलता है कि यदि व्यायाम सत्र छोटा है, तो उसकी तीव्रता अधिक होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, एक मिनट का तीव्र व्यायाम दो मिनट के मध्यम व्यायाम के बराबर हो सकता है।

क्या लंबे सत्र की भी आवश्यकता है?

यदि आप किसी मैराथन या लंबी दूरी की दौड़ की तैयारी कर रहे हैं, तो लंबी अवधि के व्यायाम आवश्यक होंगे ताकि शरीर उसके लिए तैयार हो सके। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लंबे समय तक व्यायाम करने से अधिक लाभ मिल सकते हैं। एक घंटे तक के व्यायाम से तनाव और अवसाद के लक्षणों में कमी देखी गई है।

बिल्कुल भी व्यायाम न करने से बेहतर है कि छोटे सत्र में ही सही, इसे किया जाए। यदि समय की कमी है, तो दिन में केवल तीन बार एक-एक मिनट का तीव्र व्यायाम भी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकता है। लेकिन याद रहे, सत्र जितना छोटा होगा, उसमें उतनी ही तीव्रता होनी चाहिए।

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