Mokshada Ekadashi Vrat Katha: क्या सच में मोक्षदा एकादशी से मिट जाते हैं पाप? पढ़ें ये व्रत कथा

Mokshada Ekadashi Vrat Katha in hindi: मोक्षदा एकादशी 1 दिसंबर 2025 को है। माना जाता है कि यह व्रत पापों से मुक्ति देता है और पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंपा नगरी के राजा वैखानस ने यह व्रत रखकर अपने पिता को नरक से छुटकारा दिलाया था। पढ़ें पूरी कथा यहां।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड30 Nov 2025, 06:58 PM IST
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

Mokshada Ekadashi Vrat Katha in hindi: साल में कई एकादशियां आती हैं, लेकिन मोक्षदा एकादशी को खास माना जाता है। कहते हैं कि अगर इंसान सच्चे मन से यह व्रत करे तो उसे जीवन के भारी से भारी संकटों से मुक्ति मिलती है और पाप मिट जाते हैं। इस बार यह व्रत 1 दिसंबर 2025 को पड़ रहा है। भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और कथा सुनना इस दिन बेहद शुभ माना जाता है।

क्यों कहा जाता है ‘मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी’

नारद पुराण में बताया गया है कि यह एकादशी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की पूजा और व्रत करने से न केवल व्यक्ति बल्कि उसके पूर्वज भी पापों से मुक्त हो सकते हैं। परिवार पर आई अड़चनें दूर होती हैं, और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

पढ़ें व्रत कथा

कहा जाता है कि चंपा नामक नगरी में एक धर्मात्मा राजा वैखानस राज करते थे। जनता उनसे बेहद खुश रहती थी क्योंकि वे न्यायप्रिय और वेद-पुराणों के ज्ञानी थे। एक रात राजा ने एक ऐसा सपना देखा जिसने उनका चैन छीन लिया। उन्होंने देखा कि उनके पिता नरक में कष्ट झेल रहे हैं। उठते ही घबराहट में उन्होंने यह बात अपनी रानी को बताई। रानी ने सलाह दी कि वे किसी आश्रम जाकर इसका कारण पूछें।

राजा एक प्रसिद्ध आश्रम पहुंचे जहां कई तपस्वी साधना कर रहे थे। वहां उन्हें पर्वत मुनि के बारे में बताया गया, एक ऐसे ऋषि जो भूत, भविष्य और वर्तमान जानने की क्षमता रखते थे। राजा ने रोते हुए अपनी बात पर्वत मुनि को सुनाई। “हे मुनि, मेरे पिता नरक में पीड़ा सह रहे हैं। मैं सुख में कैसे रहूं? बताइए, मैं क्या करूं कि उन्हें मुक्ति मिल जाए?”

पिता के कर्म और मुक्ति का मार्ग

पर्वत मुनि ने ध्यान लगाया और फिर भूतकाल जानकार बोले, “हे राजन, तुम्हारे पिता अपने कर्मों का फल भोग रहे हैं। उन्होंने जीवन में अपनी पत्नी को दुख दिया था, इसी कारण वे नरक में हैं। लेकिन चिंता मत करो, एक उपाय है।" उन्होंने आगे कहा, “तुम मोक्षदा एकादशी का व्रत रखो और उसका फल अपने पिता को समर्पित कर दो। इससे उन्हें नरक से मुक्ति मिल जाएगी।”

राजा ने पूरी श्रद्धा से व्रत किया, भगवान विष्णु की पूजा की और कथा सुनी। व्रत का फल पिता को अर्पित करते ही अंधकार हट गया। राजा के पिता स्वर्ग की ओर जाते दिखे और उन्होंने आशीर्वाद दिया "पुत्र, तेरा कल्याण हो।”

क्या मिलता है इस व्रत के फल से?

शास्त्रों के अनुसार मोक्षदा व्रत के रखने से पाप कर्म नष्ट होते हैं, मन को शांति मिलती है, पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है। व्रत सुनने मात्र से ‘वाजपेय यज्ञ’ का फल मिलता है। मोक्षदा एकादशी की यह कहानी सिर्फ धर्म की बात नहीं सिखाती, बल्कि यह बताती है कि सच्ची श्रद्धा, नीयत और अपने बड़ों के प्रति समर्पण से असंभव भी संभव हो जाता है। यह व्रत हमें याद दिलाता है कि कर्मों का असर रहता है, पर भक्ति हमेशा राह दिखाती है।

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