
Nepal Elections: नेपाल के आम चुनाव में इस बार सबसे बड़ा और चौंकाने वाला परिणाम झापा निर्वाचन क्षेत्र-5 से सामने आया है। ‘बालेन’ के नाम से मशहूर 35 साल के युवा नेता बालेंद्र शाह ने दो बार के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को धूल चटा दी है। बालेन ने ओली को 49,614 वोटों के भारी अंतर से हराया। जहां बालेन शाह को 68,348 वोट मिले, वहीं केपी शर्मा ओली 18,734 वोटों पर सिमट गए।
यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि झापा-5 को ओली का मजबूत गढ़ माना जाता था। बालेन ने काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा सिर्फ इसलिए दिया था ताकि वे सीधे ओली को चुनौती दे सकें, और उनका यह बड़ा दांव आखिरकार बिल्कुल सही साबित हुआ।
यह चुनाव सिर्फ एक सीट की हार-जीत तक सीमित नहीं माना जा रहा है। दरअसल इसके पीछे पिछले साल नेपाल में हुए बड़े जन-आंदोलन का भी असर साफ दिखाई दे रहा है। सितंबर 2025 में हजारों युवा सड़कों पर उतर आए थे। उन्होंने देश की पुरानी राजनीतिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों ने आखिरकार सरकार को गिरा दिया और नेपाल की राजनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत हुई।
उसी आंदोलन के बाद हुए पहले आम चुनाव में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) एक मजबूत ताकत बनकर उभरी है। पार्टी ने 25 सीटें जीत ली हैं और 93 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यह नतीजा साफ दिखाता है कि नेपाल की जनता अब पारंपरिक राजनीति से हटकर नए चेहरों को मौका देना चाहती है।
झापा-5 सीट पर मुकाबला काफी चर्चा में रहा। यहां कई उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन असली लड़ाई बालेन शाह और केपी शर्मा ओली के बीच ही मानी जा रही थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बालेन शाह को 68,348 वोट मिले। वहीं केपी शर्मा ओली 18,734 वोटों पर ही सिमट गए। इस तरह शाह ने 49,614 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
इस सीट पर श्रम संस्कृति पार्टी के समीर तामांग तीसरे स्थान पर रहे, जिन्हें 9,233 वोट मिले। इसके बाद नेपाली कांग्रेस की मंधरा चिमारिया को 1,821 वोट और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के लक्ष्मी प्रसाद संगरौला को 1,536 वोट मिले। झापा-5 में कुल 1,63,379 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें से 1,06,568 लोगों ने मतदान किया। इतनी बड़ी संख्या में मतदान होना इस सीट के महत्व को भी दिखाता है।
1990 में जन्मे बालेंद्र शाह एक सिविल इंजीनियर हैं, लेकिन उन्हें पहली पहचान मिली नेपाल के अंडरग्राउंड हिप-हॉप सीन से। एक रैपर के तौर पर उनके गानों में भ्रष्टाचार और असमानता के खिलाफ कड़वा सच होता था, जिसने युवाओं के दिलों को छू लिया। काठमांडू के मेयर बनने के बाद उन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता दिखाई और अब वे नेपाल के सबसे लोकप्रिय चेहरा बन गए हैं। वे उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने गृहयुद्ध की विभीषिका देखी है और अब देश में सुधार चाहती है।
बालेन शाह पहले काठमांडू के मेयर भी रह चुके हैं। लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को दांव पर लगाते हुए मेयर पद से इस्तीफा दे दिया और सीधे देश के सबसे बड़े नेताओं में से एक केपी शर्मा ओली को चुनौती देने का फैसला किया। यह एक बड़ा जोखिम था, लेकिन चुनाव के नतीजों ने दिखा दिया कि जनता ने उनके इस फैसले का समर्थन किया।
नेपाल में शांतिपूर्ण और सफल चुनाव होने पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल की जनता और सरकार को बधाई दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने कहा कि नेपाल के लोगों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इतने उत्साह के साथ इस्तेमाल करते देखना बेहद खुशी की बात है। मोदी ने यह भी कहा कि भारत और नेपाल के रिश्ते बेहद खास हैं और भारत आने वाले समय में भी नेपाल के साथ मिलकर काम करता रहेगा।
नेपाल के इन चुनावों को कई लोग Gen Z आंदोलन का असर मान रहे हैं। युवाओं के नेतृत्व में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने देश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था और अब चुनावी नतीजों में उसका असर साफ दिखाई दे रहा है।
बालेन शाह की जीत सिर्फ एक सीट की जीत नहीं बल्कि नेपाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बदलाव देश की राजनीति को स्थायी रूप से नई दिशा दे पाएगा।
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