Nepal Flash Flood: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। पड़ोसी देश में तबाही के बाद संचार नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, जिसके चलते कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर गए श्रद्धालुओं समेत 130 से अधिक भारतीयों का कोई अता-पता नहीं चल पा रहा है। इस प्राकृतिक आपदा ने सैकड़ों परिवारों की सांसें अटका दी हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और भारत के कई राज्यों की सरकारों ने युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य भी लापता
नेपाल के कई प्रमुख पहाड़ी रास्तों और आव्रजन केंद्रों पर संचार व्यवस्था ठप होने से जमीनी स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल के अनुसार, लापता लोगों में कम से कम 59 श्रद्धालु सीधे मानसरोवर यात्रा से जुड़े हैं। तमिलनाडु से मंदिर दर्शन के लिए गए 57 पर्यटकों में से 37 अभी भी लापता हैं, जबकि 20 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। वहीं, ईशा फाउंडेशन ने जानकारी दी है कि उनके 495 सदस्य सुरक्षित लौट चुके हैं, लेकिन आव्रजन केंद्र पर मौजूद 77 सदस्यों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। खुद सद्गुरु ने बताया कि केंद्र के अधिकारियों से संपर्क न हो पाने के कारण आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
राकेश टिकैत पोखरा में फंसे
उत्तर प्रदेश से भी कई यात्रियों के इस आपदा में फंसने की सूचना है। किसान नेता राकेश टिकैत अपने साथियों सहित नेपाल के पोखरा इलाके में फंसे हुए हैं। टिकैत ने वीडियो संदेश जारी कर बताया कि रास्ते पूरी तरह बंद होने के कारण उन्हें अपनी गाड़ियां वहीं छोड़कर विमान से काठमांडू और फिर दिल्ली लौटना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय ने परिजनों की मदद के लिए एडवाइजरी जारी कर तुरंत सहायता प्राप्त करने का निर्देश दिया है।
राहत के बीच तलाश जारी
महाराष्ट्र के कुल सात पर्यटकों के फंसे होने की खबर आई थी, जिनमें से मुंबई और पुणे के चार लोगों से संपर्क स्थापित कर लिया गया है, जबकि शेष तीन की खोज जारी है। राहत की बात यह है कि केरलम से गए 36 पर्यटकों का जत्था पूरी तरह सुरक्षित है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से दूर है।