KP Oli Resigns: नेपाल में राजनीतिक संकट चरम पर पहुंच चुका है। सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ गुस्सा अब सरकार के खिलाफ खुला बगावत बन गया है। हालात इतने बिगड़े कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को आखिरकार मंगलवार को इस्तीफा देना पड़ा। राजधानी काठमांडू और आसपास के इलाकों में आगजनी और हिंसक प्रदर्शन ने पूरे देश को हिला दिया।
Gen Z का फूटा गुस्सा
जनरेशन-जी के नाम से इकट्ठा हुए हजारों प्रदर्शनकारियों ने सरकार और नेताओं के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। "केपी चोर, देश छोड़" और "भ्रष्ट नेताओं पर कार्रवाई करो" जैसे नारे राजधानी की सड़कों पर गूंज उठे। प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ ओली के निवास भक्तपुर में आग लगा दी, बल्कि पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक के घर को भी निशाना बनाया।
आर्मी चीफ ने मांगा इस्तीफा
हालात इतने बेकाबू हो गए कि नेपाली सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने सीधे प्रधानमंत्री ओली से इस्तीफा देने को कह दिया। सूत्रों के मुताबिक, ओली ने खुद आर्मी चीफ से मदद मांगी थी लेकिन जवाब मिला कि सेना तभी हालात संभालेगी जब वह पद छोड़ देंगे।
दुबई भागने की तैयारी
इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ओली ने सेना से सुरक्षित रास्ता देने और देश छोड़ने में मदद की गुहार भी लगाई। खबर है कि वे मेडिकल ट्रीटमेंट के बहाने दुबई जाने की तैयारी में हैं और हिमालयन एयरलाइंस का प्लेन स्टैंडबाय पर रखा गया है।
इस बीच कई मंत्रियों को सेना के हेलिकॉप्टर से एयरपोर्ट तक पहुंचाया गया। करीब पांच हेलिकॉप्टर तैनात किए गए। वहीं काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर में कर्फ्यू लगा हुआ है लेकिन युवाओं का गुस्सा कम नहीं हुआ।
ऑल-पार्टी मीटिंग और संवाद की अपील
इस्तीफे से पहले ओली ने शाम 6 बजे सभी दलों की बैठक बुलाने का ऐलान किया था। उनका कहना था कि बातचीत से ही रास्ता निकलेगा, लेकिन विरोध इतना तेज था कि हालात काबू से बाहर हो गए।
कर्फ्यू और भीषण विरोध
काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर में कर्फ्यू के बावजूद प्रदर्शन जारी रहे। छात्रों और युवाओं ने "Don’t kill students" जैसे नारे लगाए और सड़कों पर टायर जलाकर रास्ते बंद कर दिए। सोशल मीडिया बैन हटाने के बाद भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
19 की मौत, 300 से ज्यादा घायल
सोशल मीडिया बैन हटने के बावजूद विरोध नहीं थमा। लोग कह रहे थे कि सिर्फ मंत्री का इस्तीफा काफी नहीं, अब ओली को ही जाना होगा। इन हिंसक प्रदर्शनों में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से ज्यादा लोग घायल हैं।
नेपाल की राजनीति इस वक्त बड़े संकट में है। प्रधानमंत्री का इस्तीफा, नेताओं के घर जलना और युवाओं का आक्रोश बताता है कि हालात सामान्य होने में वक्त लगेगा। सवाल अब ये है कि क्या नई सरकार युवाओं का भरोसा जीत पाएगी या नेपाल और बड़े संकट में फंस जाएगा।