Night Owl vs Early Bird: हमारा समाज हमेशा से यह मानता आया है कि जो जल्दी सोए और जल्दी जागे, वही स्वस्थ और बुद्धिमान बने। सुबह जल्दी उठने वाले लोगों को ज्यादा अनुशासित, मेहनती और सफल माना जाता है। लेकिन अब विज्ञान इस सोच को पूरी तरह सही नहीं मानता।
कई अध्ययन बताते हैं कि इंसान की ऊर्जा, सोचने की क्षमता और काम करने का तरीका उसकी अपनी जैविक घड़ी यानी बायोलॉजिकल क्लॉक पर निर्भर करता है। यानी आप सुबह ज्यादा अलर्ट रहते हैं या रात में। यह आदत नहीं, बल्कि दिमाग की नेचुरल सेटिंग है।
नाइट आउल और अर्ली बर्ड में क्या फर्क है?
कुछ लोग रात में सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं, जबकि कुछ की सुबह आंख खुलते ही एनर्जी हाई होती है। यही फर्क हमें नाइट आउल और अर्ली बर्ड बनाता है। विज्ञान की भाषा में इसे क्रोनोटाइप (chronotype) कहा जाता है, यानि हमारा शरीर दिन के किस वक्त सबसे ज्यादा अलर्ट और फोकस्ड रहता है।
नाइट आउल कौन होते हैं?
नाइट आउल वे लोग होते हैं जो रात में अधिक अलर्ट रहते हैं और देर रात उनका दिमाग सबसे अच्छा काम करता है। कुछ स्टडीज के मुताबिक, ऐसे लोग क्रिएटिव सोच, जटिल समस्याओं को सुलझाने और नए आइडिया निकालने में आगे रहते हैं। उनका दिमाग शाम और रात के समय ज्यादा एक्टिव हो जाता है।
अर्ली बर्ड किसे कहते हैं?
अर्ली बर्ड सुबह जल्दी उठते हैं और दिन की शुरुआत में ही सबसे अधिक प्रोडक्टिव होते हैं। ये लोग आमतौर पर अनुशासित, समय के पाबंद और रूटीन-फ्रेंडली होते हैं। स्कूल, कॉलेज या 9-to-5 जॉब जैसे स्ट्रक्चर्ड माहौल में ये बेहतर परफॉर्म करते हैं।
दोनों में फर्क कहां है?
नाइट आउल्स की ताकत क्रिएटिविटी और फ्लेक्सिबल सोच होती है, जबकि अर्ली बर्ड्स की स्ट्रेंथ डिसिप्लिन और कंसिस्टेंसी मानी जाती है। नाइट आउल्स को देर रात काम करने में मजा आता है, वहीं अर्ली बर्ड्स सुबह का वक्त सबसे बेहतर मानते हैं। मेंटल हेल्थ के लिहाज से देखा जाए तो अर्ली बर्ड्स की नींद और मूड आमतौर पर ज्यादा स्थिर रहता है।
तो आखिर कौन ज्यादा बुद्धिमान होता है?
इम्पीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने 26,000 से अधिक लोगों के डेटा की जांच की, ताकि यह समझा जा सके कि सोने-जागने का पैटर्न दिमागी क्षमता को कैसे प्रभावित करता है। इस अध्ययन में पाया गया कि जो लोग खुद को नाइट आउल बताते हैं, उन्होंने कॉग्निटिव टेस्ट्स में सुबह ज्यादा एक्टिव रहने वालों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।
स्टडी के मुताबिक, नाइट आउल्स ने याददाश्त, तर्क-शक्ति और जानकारी प्रोसेस करने की गति जैसे टेस्ट्स में 7.5% से लेकर 13.5% तक ज्यादा स्कोर हासिल किया। दिलचस्प बात यह रही कि जो लोग न पूरी तरह सुबह के थे और न पूरी तरह रात के यानी इंटरमीडिएट क्रोनोटाइप, उन्होंने भी मॉर्निंग टाइप लोगों से बेहतर स्कोर किया।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
स्टडी की लीड ऑथर, डॉ. राहा वेस्ट ने बताया कि जो लोग नैचुरली शाम के समय ज्यादा एक्टिव रहते हैं, वे कई कॉग्निटिव टेस्ट्स में बेहतर परफॉर्म करते हैं। यह सिर्फ पर्सनल प्रेफरेंस नहीं, बल्कि ऐसा क्रोनोटाइप है जो दिमाग के काम करने के तरीके को प्रभावित करता है।
असली स्मार्टनेस क्या है?
नाइट आउल हों या अर्ली बर्ड, कोई भी कैटेगरी बेहतर या बदतर नहीं है। इंटेलिजेंस सिर्फ IQ से नहीं, बल्कि आदतों, माहौल और लाइफस्टाइल से भी जुड़ी होती है। असली समझदारी यही है कि आप अपने शरीर की घड़ी को पहचानें और उसी के हिसाब से काम करें। सही नींद, सही रूटीन और अपनी ताकत समझना ही असली स्मार्टनेस है।