केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने लगातार नौवें केंद्रीय बजट को संसद में पेश कर रही हैं। इस मौके पर उन्होंने हाथ से बुनी हुई कांचीपुरम सिल्क साड़ी पहनी थी। साड़ी का रंग गहरा मैरून–बरगंडी था, जिसमें हल्का चेकदार पैटर्न बुना हुआ था। इसकी बॉर्डर और पल्लू थोड़ा और गहरे, प्लम या वाइन रंग के थे, जो इसे गंभीर, गरिमामय और शालीन रूप दे रहे थे।
कांचीपुरम सिल्क की विरासत
तमिलनाडु में पिछले 400 से अधिक वर्षों से बुनी जा रही कांचीपुरम सिल्क साड़ियां भारत की सबसे प्रतिष्ठित हथकरघा परंपराओं में से एक हैं। ये साड़ियां उच्च गुणवत्ता की शुद्ध मुलबेरी सिल्क, असली ज़री की बॉर्डर और वास्तुकला से प्रेरित डिज़ाइनों के लिए जानी जाती हैं। इन्हें आमतौर पर शादियों, धार्मिक अनुष्ठानों और महत्वपूर्ण अवसरों पर पहना जाता है।
मंदिरों से प्रेरित डिज़ाइन, चेक पैटर्न और कंट्रास्ट बॉर्डर इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। कांचीपुरम साड़ी पहनना मानो समय से गढ़ी गई परंपरा को पहनने जैसा है। कांचीपुरम और कांचीवरम शब्द अक्सर एक-दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल होते हैं। दोनों का मतलब एक ही प्रकार की सिल्क साड़ी से है।
कांचीपुरम इसका आधिकारिक और भौगोलिक नाम है, जो तमिलनाडु के उस मंदिर नगर से जुड़ा है जहां ये साड़ियां बनती हैं। वहीं कांचीवरम या कांजीवरम एक आम बोलचाल और व्यावसायिक नाम है। बुनाई की तकनीक, सिल्क की गुणवत्ता और जरी का काम सब कुछ दोनों में समान होता है। फर्क सिर्फ नाम का है, असलियत का नहीं।
तमिलनाडु से निर्मला सीतारमण का जुड़ाव
इस साड़ी का चयन व्यक्तिगत रूप से भी खास था। तमिलनाडु निर्मला सीतारमण का गृह राज्य है, और कांचीपुरम सिल्क साड़ियां राज्य की सबसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक पहचान हैं। ऐसे राष्ट्रीय अवसर पर इस साड़ी को पहनना, उस जड़ से जुड़े रहने का संकेत देता है।
पिछले कुछ वर्षों में निर्मला सीतारमण का बजट डे पहनावा एक तरह से भारत की टेक्सटाइल कहानी कहता आया है। हर साड़ी किसी न किसी क्षेत्र, कारीगरी या बुनाई परंपरा को सामने लाती है। यह सब बिना किसी दिखावे के होता है। कपड़े कभी भाषण या अवसर पर हावी नहीं होते, बल्कि उसके साथ चलते हैं। जहां राजनीति में कपड़ों को प्रतीकों के रूप में देखा जाता है, वहां उनका पहनावा सादगी और संतुलन का उदाहरण बना रहता है।
क्या कांचीपुरम और कांजीवरम साड़ियां अलग हैं?
पारंपरिक भारतीय सिल्क साड़ियों की बात करें तो कांचीपुरम और कांजीवरम शब्द अक्सर लोगों को भ्रमित करते हैं। कई लोग सोचते हैं कि ये दो अलग-अलग प्रकार की साड़ियां हैं।
इसका जवाब है नहीं। कांचीपुरम और कांजीवरम साड़ियां एक ही होती हैं। दोनों ही तमिलनाडु के कांचीपुरम शहर में बनने वाली शानदार सिल्क साड़ियों को दर्शाते हैं। कांजीवरम शब्द, कांचीपुरम का ही प्रचलित या अंग्रेज़ी रूप है।
ये साड़ियां खास क्यों हैं?
कांचीपुरम साड़ियां इन वजहों से खास मानी जाती हैं:
नाम अलग क्यों है?
कांचीपुरम नाम उस शहर से जुड़ा है जहां ये साड़ियां बनती हैं। समय के साथ उच्चारण बदलता गया और कांजीवरम नाम प्रचलन में आ गया। आज दोनों नाम समान रूप से इस्तेमाल होते हैं और दोनों ही असली, हाथ से बुनी कांचीपुरम सिल्क साड़ियों को दर्शाते हैं, जिनकी मांग भारत ही नहीं, दुनिया भर में है।