Noida Engineer Death Case: बीते दिनों नोएडा में 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। आज को नोएडा पुलिस ने रियल एस्टेट कंपनी MZ Wiztown Planners Ltd के CEO और बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इस हादसे के लिए एमजेड विश्टाउन और लोटस ग्रीन कंट्रक्शन को जिम्मेदार ठहराते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें लापरवाही, गैर-इरादतन हत्या और जान जोखिम में डालने जैसे गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने घटना के बाद सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के मुख्य अधिशासी अधिकारी आईएएस अफसर लोकेश एम. को पद से हटा दिया था।
90 मिनट तक इंजीनियर ने लगाई मदद की गुहार
शुक्रवार को देर रात युवराज मेहता अपनी कार से घर लौट रहे थे। इस दौरान घने कोहरे की वजह से उनका कार नोएडा के सेक्टर 150 में एक गहरे पानी भरे गड्ढे में जा गिरी थी। उन्होंने किसी तरह कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़कर लगभग 90 मिनट तक मदद के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन रेस्क्यू टीम में कोई भी मदद करने में असफल रही। लिहाजा, पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई। युवराज के पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में मौत की वजह साफ तौर पर पानी में डूबने से दम घुटना और उसके बाद कार्डिक अरेस्ट बताया गया है।
पुलिस ने दी ये जानकारी
इस मामले की जांच कर रही SIT चीफ और मेरठ जोन के ADG भानु भास्कर ने कहा, 'SIT ने अपनी जांच शुरू कर दी है। हम अगले 5 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे। इस मामले में सभी संबंधित लोगों से बात की जा रही है। हम हर उस वजह का पता लगाएंगे, जिसके चलते यह हादसा हुआ। अभी तो जांच के शुरुआती चरण में हैं, पूरी जांच पूरी होने के बाद ही रिपोर्ट पेश की जाएगी।'
प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
बता दें कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद इलाके में भारी गुस्सा और रोष देखने को मिल रहा है। रविवार को सुबह से लेकर शाम तक घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जमा रही। आस-पास के लोग प्रशासन और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि युवराज दो घंटे तक मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। लोगों का आरोप है कि अगर समय रहते उचित संसाधन और प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया होता, तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी।