
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते सोमवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की और थोड़ी ही देर में ट्रेड डील की घोषणा कर दी। हालांकि, इस व्यापारिक समझौते से पहले भारत-अमेरिका के बीच खूब रस्साकस्सी हुई जिसकी कुछ गुप्त जानकारियां सामने आने लगी हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूह ब्लूमबर्ग ने भारत के एक उच्चस्तरीय अधिकारी के हवाले से खबर दी है कि भारत ने अमेरिका को पिछले वर्ष सितंबर महीने में स्पष्ट कर दिया था कि वह किसी दबाव में आने वाला नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल सितंबर में अमेरिका गए थे और वहां अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो को दोटूक लहजे में कहा था कि भारत ट्रेड डील के लिए ट्रंप प्रशासन की उलटी-सीधी शर्तों के आगे कभी नहीं झुकेगा, भले डील नहीं हो। अधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर महीने में चीन गए थे जहां उनकी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात की तस्वीर काफी चर्चित हो गई।
तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर तीनों नेताओं की फोटो साझा करते हुए लिखा था, 'ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को सबसे गहरे, सबसे अंधियारे चीन के हाथों खो दिया है। उम्मीद है कि उनका भविष्य एक साथ लंबा और समृद्ध होगा!' सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन हुआ था जिसमें मोदी, पुतिन और जिनपिंग की मुलाकात हुई थी।
इस चर्चित मुलाकात और उस पर आई ट्रंप की टिप्पणी के बाद भारत के एनएसए अजित डोभाल अमेरिका की यात्रा पर गए थे। डोभाल ने वहां रूबियो को भारत सरकार के संदेश से अवगत कराया था। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, डोभाल ने रूबियो से कहा था कि भारत दोनों देशों के बीच की कड़वाहट को पीछे छोड़कर ट्रेड डील पर बातचीत फिर से शुरू करना चाहता है।
डोभाल ने रूबियो से आगे जो कहा, वह भारत की तरफ से बड़ा और कड़ा संदेश था। डोभाल ने कहा कि भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके शीर्ष सलाहकारों से दबने वाला नहीं है। अगर ट्रंप प्रशासन का नजरिया नहीं बदला तो भारत उनका कार्यकाल खत्म होने का इंतजार करेगा, क्योंकि भारत पहले भी विरोधी अमेरिकी सरकारों का सामना कर चुका है। हालांकि, भारत सरकार चाहती है कि ट्रंप और उनके सलाहकार भारत की सार्वजनिक आलोचना कम करें ताकि रिश्तों को वापस पटरी पर लाने की गुंजाइश बची रहे।
डोभाल की इस कड़े संदेश का तुरंत असर भी दिखा। ट्रंप ने 16 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया और उन्हें अगले दिन आने वाले जन्मदिन की बधाई दी। इतना ही नहीं, ट्रंप ने मोदी की यह कहकर प्रशंसा भी की कि वह शानदार काम कर रहे हैं। फिर दिसंबर आते-आते ट्रंप और मोदी के बीच चार-चार बार बातें हुईं। ध्यान रहे मोदी से बार-बार बात करने वाले ये वही ट्रंप हैं जिन्होंने डोभाल से संदेश मिलने से पहले अगस्त में भारत को मृत अर्थव्यवस्था बताया था।
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