भारतीय घरों में दालों को अक्सर “सुपरफूड” कहा जाता है। न्यूट्रिशनिस्ट दीपसिखा जैन ने 5 जनवरी को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए दालों के फायदे बताए। उन्होंने कहा कि दालें बेहतरीन प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का स्रोत हैं, लेकिन इनके पूरे पोषण का लाभ लेने के लिए पकाने से पहले इन्हें भिगोना बहुत जरूरी है, ताकि एंटी-न्यूट्रिएंट्स कम हो सकें।
दाल भिगोना न भूलें
अपने कैप्शन में उन्होंने लिखा, “दालों में सेहत सुधारने की जबरदस्त ताकत होती है। दालें दिल की सेहत, पाचन और इम्युनिटी के लिए फायदेमंद होती हैं। लेकिन इन्हें पकाने से पहले भिगोना न भूलें।” वीडियो में दीपसिखा ने अलग-अलग दालों के फायदे बताए, जो इंसुलिन सेंसिटिविटी से लेकर पाचन तक में मदद करती हैं।
अपनी सेहत के अनुसार दाल चुनें
जिन लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं, गैस या ब्लोटिंग रहती है, उनके लिए उन्होंने स्प्लिट (छिली हुई) दालें खाने की सलाह दी। उनके अनुसार, छिलका हटने से दालें पेट के लिए हल्की हो जाती हैं और पचाने में आसान होती हैं, क्योंकि इनमें जटिल शुगर और एंटी-न्यूट्रिएंट्स कम होते हैं।
उन्होंने कहा, “अगर आपका पाचन कमजोर है या पेट संवेदनशील है, तो स्प्लिट मूंग दाल या कोई भी स्प्लिट दाल खाएं। ये आसानी से पच जाती हैं और इनमें एंटी-न्यूट्रिएंट्स भी कम होते हैं।” वीडियो में उन्होंने आगे बताया, “अगर दिल की सेहत कमजोर है, तो चना खाएं। इसमें पोटैशियम, फाइबर और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो दिल की सेहत और वजन कंट्रोल करने में मदद करता है।”
उन्होंने यह भी कहा, “अगर आपको पीसीओएस (PCOS) है, तो साबुत मूंग दाल सबसे बेहतर है। यह बहुत हल्की होती है, सूजन कम करने में मदद करती है और हार्मोन पर नकारात्मक असर नहीं डालती। वहीं, अगर आपको डायबिटीज है, तो मसूर दाल आपके लिए अच्छी है, क्योंकि इसमें फाइबर ज्यादा होता है, जो शरीर को इंसुलिन के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाता है और डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करता है।”
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)