ओट्स, ज्वार, रागी, बाजरा या गेंहू...न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए आपके लिए कौन सा आटा है सही

कोई एक सबसे अच्छी रोटी नहीं होती। सही आटा आपकी पाचन शक्ति, सेहत, मौसम और जीवनशैली पर निर्भर करता है। ओट्स, ज्वार, बाजरा, रागी या बेसन तभी फायदेमंद हैं जब वे आपको एनर्जी दें और पेट को आराम पहुंचाएं।

Manali Rastogi
अपडेटेड21 Jan 2026, 03:07 PM IST
ओट्स, ज्वार, रागी, बाजरा या गेंहू...न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए आपके लिए कौन सा आटा है सही
ओट्स, ज्वार, रागी, बाजरा या गेंहू...न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए आपके लिए कौन सा आटा है सही(Pexels)

आज किसी भी किराना स्टोर की शेल्फ देखें तो साफ दिखता है कि हमारी साधारण रोटी कितनी बदल चुकी है। ओट्स, मिलेट्स, सोया, मल्टीग्रेन, जौ जैसे अनगिनत विकल्प हैं और उतनी ही ज्यादा उलझन भी। कभी जो रोटी रोजमर्रा का भोजन थी, आज वह हेल्थ डिबेट बन गई है।

सच्चाई सोशल मीडिया की सलाहों से कहीं आसान है। कोई एक सबसे अच्छी आटा नहीं होती। आपके लिए कौन-सी रोटी सही है, यह आपके मेटाबॉलिज्म, एक्टिविटी लेवल, मौसम और आपकी सेहत से जुड़ी समस्याओं पर निर्भर करता है।

यह भी पढ़ें | सही मात्रा में खा रहे फाइबर फिर भी हो रही कब्ज की दिक्कत? जानें क्या है कारण

आटा या चावल का चुनाव ट्रेंड से ज्यादा इस बात पर होना चाहिए कि आपका शरीर क्या स्वीकार करता है। इसी सवाल पर न्यूट्रिशनिस्ट खुशी छाबड़ा ने इंस्टाग्राम पर बताया कि आपके लिए कौन-सी आटा सही हो सकती है।

ओट्स रोटी

ओट्स में घुलनशील फाइबर होता है, जो खून में शुगर के अवशोषण को धीमा करता है और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में मदद करता है। डायबिटीज और हार्ट पेशेंट्स के लिए यह फायदेमंद हो सकती है। लेकिन हर किसी की पाचन शक्ति के लिए ओट्स सही नहीं है। जिन लोगों को पेट फूलने, गैस या भारीपन की समस्या रहती है, उनके लिए ओट्स रोटी पेट में भारी पड़ सकती है।

सोया रोटी

सोया प्रोटीन और आइसोफ्लेवोन्स से भरपूर होती है, इसलिए शाकाहारियों, जिम जाने वालों और प्रोटीन की कमी वालों को पसंद आती है। लेकिन सोया शरीर पर जैविक असर डालती है। थायरॉइड या हार्मोन से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को इसे रोज बिना सलाह के नहीं लेना चाहिए। इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना बेहतर है।

यह भी पढ़ें | आम केमिकल नहीं है ये! वजन घटाने की चाह में लड़की ने खा लिया बोरेक्स, हो गई मौत

चावल के आटे की रोटी (अक्की रोटी)

यह ग्लूटेन-फ्री होती है और पचाने में हल्की होती है। कमजोर पाचन या बीमारी से उबरते समय इसे खाना आसान रहता है और तुरंत ऊर्जा देती है। लेकिन यह जल्दी पचती है और ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकती है, इसलिए डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस वालों के लिए रोजाना सही नहीं है।

ज्वार रोटी

ज्वार में फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स होते हैं। यह पेट को भरा रखती है, दिल की सेहत के लिए अच्छी है और ग्लूटेन सेंसिटिविटी वालों को भी सूट करती है। ज्यादातर लोगों के लिए यह रोज की रोटी बन सकती है। हालांकि जिनका पाचन बहुत धीमा है या जो कम पानी पीते हैं, उनमें ज्वार कब्ज बढ़ा सकती है।

बाजरा रोटी

बाजरा आयरन, जिंक और फाइबर से भरपूर होता है। परंपरागत रूप से इसे सर्दियों में खाया जाता रहा है। यह ऊर्जा, सहनशक्ति और वजन संतुलन में मदद करता है। लेकिन बाजरा शरीर में गर्मी बढ़ाता है, इसलिए एसिडिटी, आईबीएस या ज्यादा गर्म तासीर वाले लोगों को इससे दिक्कत हो सकती है।

बेसन रोटी

बेसन में प्रोटीन और फाइबर होता है, जो ब्लड शुगर कंट्रोल और इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने में मदद करता है। डायबिटीज और पीसीओएस में इसे पसंद किया जाता है। लेकिन बेसन गैस बना सकता है, खासकर जब पाचन कमजोर हो। अगर खाने के बाद भारीपन या सूजन हो, तो इसे कभी-कभी ही लें।

यह भी पढ़ें | अब एक ही जगह दिखेगी बैंक बैलेंस, पीएफ, म्यूचुअल फंड की स्टेटमेंट

मल्टीग्रेन रोटी

सही अनाजों का मिश्रण हो तो मल्टीग्रेन रोटी पोषण से भरपूर हो सकती है। इसमें फाइबर, बी विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं। लेकिन बाजार में मिलने वाली कई मल्टीग्रेन आटे असल में गेहूं ज्यादा और दूसरे अनाज कम होते हैं, जो ग्लूटेन से परेशानी वालों के लिए सही नहीं। लेबल पढ़ना जरूरी है।

रागी रोटी

रागी कैल्शियम, आयरन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है। यह ब्लड शुगर कंट्रोल और हड्डियों की मजबूती में मदद करती है, खासकर मेनोपॉज के बाद की महिलाओं के लिए। लेकिन किडनी की समस्या या बहुत कमजोर पाचन वाले लोगों को इसे डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।

जौ की रोटी

जौ में घुलनशील फाइबर होता है, जो इंसुलिन रिस्पॉन्स बेहतर करता है और दिल व लिवर की सेहत के लिए अच्छा है। प्रीडायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की समस्या में यह उपयोगी हो सकता है। चूंकि जौ में ग्लूटेन होता है, इसलिए ग्लूटेन सेंसिटिव लोगों के लिए यह सही नहीं है।

समस्या तब होती है जब किसी एक अनाज को हमेशा के लिए सबसे अच्छा मान लिया जाता है। भारतीय भोजन परंपरा विविधता, मौसम और पाचन पर आधारित रही है, सख्त नियमों पर नहीं।जो रोटी आपको ऊर्जा दे, पेट को आराम दे और कोई परेशानी न करे, वही आपके लिए सही है।

अगर कोई रोटी आपको फुला हुआ, सुस्त या असहज महसूस कराए, तो उसका कितना भी पोषण क्यों न बताया जाए, वह आपके काम की नहीं। सही पोषण का मतलब सबसे हेल्दी अनाज ढूंढना नहीं, बल्कि वह चुनना है जिसे आपका शरीर सही तरह से इस्तेमाल कर सके।

(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सओट्स, ज्वार, रागी, बाजरा या गेंहू...न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए आपके लिए कौन सा आटा है सही
More
बिजनेस न्यूज़ट्रेंड्सओट्स, ज्वार, रागी, बाजरा या गेंहू...न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए आपके लिए कौन सा आटा है सही