Ozempic Benefits: भारत में भी आ गई ओजेंपिक, क्या डायबिटीज और मोटापे के लिए रामबाण है ये दवा? पूरी बात जरूर जानिए

Ozempic Side Effects: डेनिश फार्मा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने अपनी बहुचर्चित मधुमेह की दवा ओजेम्पिक भारत में लॉन्च कर दी है। मोटापे और वजन घटाने को लेकर वैश्विक सुर्खियों में रही यह इंजेक्शन-आधारित दवा देश के 10 करोड़ से अधिक टाइप 2 मधुमेह रोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरी है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड19 Dec 2025, 12:47 PM IST
भारत में आ गई ओजेम्पिक (सांकेतिक तस्वीर)
भारत में आ गई ओजेम्पिक (सांकेतिक तस्वीर)(Reuters)

Ozempic Price in India: डैनिश फार्मास्युटिकल दिग्गज नोवो नॉर्डिस्क ने अपनी मशहूर दवा ओजेम्पिक (Ozempic) को आखिरकार भारतीय बाजार में उतार दिया है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोत्रिय के अनुसार, यह लॉन्च भारत के लिए एक बड़ा कदम है, जहां 10 करोड़ से अधिक वयस्क टाइप 2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं। यह दवा इंजेक्शन के रूप में दी जाती है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भारत में इसका फोकस विशुद्ध रूप से डायबिटीज के उपचार और वैज्ञानिक साक्ष्य पर आधारित चिकित्सा उपयोग पर रहेगा, न कि वजन घटाने के ट्रेंड पर।

ब्लड शुगर कंट्रोल करने का दावा

विक्रांत श्रोत्रिय बताते हैं कि मौजूदा मधुमेह उपचारों में अक्सर ब्लड शुगर का नियंत्रण अस्थिर रहता है, और कई बार तो मरीजों का वजन भी बढ़ने लगता है, जिससे बीमारी का प्रबंधन और जटिल हो जाता है। ओजेम्पिक डॉक्टरों को एक अधिक समग्र विकल्प देता है। उनका कहना है कि यह दवा तीन महीने का औसत ब्लड शूगर लेवल HbA1c को 2.8 प्रतिशत तक कम करने की क्षमता रखती है, साथ ही यह वजन घटाने में भी सहायक है। यह उन लाखों मरीजों के लिए राहत की बात है जिन्हें प्रभावी नियंत्रण के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

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ओजेम्पिक कोई चमत्कारिक दवा नहीं, संभलकर करें उपयोग (AI Generated Graphic)
(Notebook LM)

'चमत्कारिक दवा' का भ्रम और सोशल मीडिया का शोर

वैश्विक स्तर पर ओजेम्पिक ने सेलिब्रिटी कल्चर और सोशल मीडिया के चलते वजन घटाने की 'चमत्कारिक दवा' के तौर पर सुर्खियां बटोरी हैं। श्रोत्रिय इसे सिरे से खारिज करते हैं। वह जोर देकर कहते हैं कि विज्ञान में कोई चमत्कार नहीं होता; यह आज का विज्ञान है। कंपनी ने साफ चेतावनी दी है कि गलत जानकारी के चलते लोग या तो दवा के लाभ से वंचित हो सकते हैं, या फिर सेल्फ मेडिकेशन की ओर बढ़ सकते हैं। कंपनी ने स्पष्ट रूप से अपील की है कि सर्टिफाइड डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन के बिना मनमर्जी से दवाई न लें।

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भारत में कितने में मिलेगी ओजेम्पिक

कंपनी ने भारत के बाजार के लिए दवा की खास कीमत रखने की रणनीति अपनाई है ताकि यह बड़ी से बड़ी आबादी के लिए सुलभ हो सके। कंपनी ने सप्ताह भर की दवाई की कीमत 2,200 रुपये तय की है, जो अमेरिका जैसे पश्चिमी बाजारों की तुलना में काफी कम है। कंपनी का लक्ष्य कॉमर्शियल स्टैबिलिटी और ज्यादा से ज्यादा मरीजों के लिए किफायती बनाना है।

क्या ओजेम्पिक मस्तिष्क के लिए भी फायदेमंद है?

ओजेम्पिक और इसी तरह की अन्य GLP-1 दवाओं पर एक नया और चौंकाने वाला शोध भी सामने आया है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के एक ताजा विश्लेषण के अनुसार, टाइप 2 मधुमेह वाले जिन लोगों ने GLP-1 दवाएं लीं, उनमें मिर्गी (Epilepsy) विकसित होने का जोखिम थोड़ा कम पाया गया। अध्ययन में पाया गया कि GLP-1 लेने वालों में DPP-4 इनहिबिटर लेने वालों की तुलना में मिर्गी विकसित होने की संभावना 16% कम थी, और सेमाग्लूटाइड का संबंध जोखिम में सबसे मजबूत कमी से था। हालांकि, यह केवल एक अवलोकन अध्ययन है, और वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस कड़ी को साबित करने के लिए और अधिक गहन परीक्षणों की आवश्यकता है।

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संभावित जोखिम: आंखों के स्वास्थ्य पर चिंता

हालांकि GLP-1 दवाएं डायबिटीज के लिए गेम चेंजर हैं, लेकिन हाल ही में प्रकाशित अध्ययनों ने आंखों के स्वास्थ्य से जुड़े संभावित जोखिमों पर ध्यान आकर्षित किया है। यह प्रमाण सामने आया है कि इन दवाओं के इस्तेमाल से गंभीर नेत्र रोगों का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है। इनमें नॉन-आर्टेरिटिक एंटीरियर इस्केमिक ऑप्टिक न्यूरोपैथी (NAION) जैसी दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी शामिल है, जिसे 'नेत्र आघात' भी कहा जाता है। इस बीमारी में ऑप्टिक तंत्रिका को रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है।

इसके अलावा, मधुमेह संबंधी नेत्र रोग (Diabetic Retinopathy) के बिगड़ने के भी प्रमाण मिले हैं। यह विरोधाभासी है क्योंकि रक्त शर्करा में तेज गिरावट रेटिना की नाज़ुक रक्त वाहिकाओं को अस्थिर कर सकती है। इसलिए, जिन लोगों को पहले से ही उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure), स्लीप एपनिया या डायबिटीज जैसी समस्याएं हैं, उन्हें दवा शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए।

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दवा पर आश्रित नहीं हो सकते, जीवनशैली में बदलाव है अनिवार्य

कंपनी के एमडी श्रोत्रिय ने इस बात पर जोर दिया कि दवाएं अपने आप में पर्याप्त नहीं हैं। आहार, व्यायाम और जीवनशैली में बदलाव मधुमेह और मोटापे जैसे मेटाबोलिक विकारों के प्रबंधन का मूल आधार हैं और रहेंगे। यह कोई तुरंत ठीक करने वाला समाधान नहीं है। उनका स्पष्ट संदेश है, 'आप अपनी जीवनशैली में अनुशासन को नजरअंदाज नहीं कर सकते और फिर भी डायबिटीज कंट्रोल की उम्मीद नहीं कर सकते। दवा को हमेशा पोषण, शारीरिक गतिविधि और नियमित निगरानी के साथ एक एकीकृत दृष्टिकोण का हिस्सा होना चाहिए।'

Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। स्वास्थ्य संबंधी कोई भी निर्णय प्रमाणित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर ही लें। आपके किसी भी कार्य या निर्णय के लिए मिंट हिंदी तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।

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