
Pakistan-Afghanistan War: पिछले कई महीनों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर झड़पें चल रही थीं, लेकिन अब हालात और गंभीर होते दिख रहे हैं। पाकिस्तान ने एक सैन्य कार्रवाई के तहत ‘गजब-लील-हक’ नाम का ऑपरेशन शुरू करने का दावा किया है। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान ने कहा है कि उसने अफगानिस्तान के अंदर 130 से अधिक तालिबान लड़ाकों को मार गिराया।
पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर अफगानिस्तान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया है, जिसे 'ऑपरेशन गजब-लिल-हक' (Operation Ghazab lil Haq) नाम दिया गया है। पाकिस्तान का दावा है कि यह कार्रवाई उन हमलों का बदला है जो अफगान सेना की तरफ से बॉर्डर पर किए गए थे। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पुष्टि की कि अभियान जारी है और सशस्त्र बल तालिबान की आक्रामकता का कड़ा जवाब दे रहे हैं।
सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार के अनुसार, इस कार्रवाई में कम से कम 133 अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि काबुल, पकतिया और कंधार में तालिबान के रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक 27 चौकियां नष्ट कर दी गईं और नौ अन्य पर कब्जा कर लिया गया।
मंत्री ने दावा किया कि इस अभियान में दो कोर मुख्यालय, तीन ब्रिगेड मुख्यालय, दो गोला-बारूद डिपो, एक लॉजिस्टिक बेस और तीन बटालियन मुख्यालय तबाह किए गए। इसके अलावा दो सेक्टर मुख्यालय और 80 से ज्यादा टैंक, तोपें व बख्तरबंद वाहन भी नष्ट किए जाने की बात कही गई है।
सरकारी प्रसारणकर्ता 'पीटीवी न्यूज' ने बताया कि पाकिस्तान वायुसेना ने काबुल, कंधार और पकतिया में अफगान तालिबान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में काबुल में दो ब्रिगेड मुख्यालय और कंधार में एक कोर मुख्यालय तथा एक ब्रिगेड मुख्यालय नष्ट कर दिए गए।
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने एक बयान में नागरिकों को निशाना बनाने के लिए अफगान तालिबान की निंदा की। गृह मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में उनके हवाले से बताया कि पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं ने अफगान तालिबान की खुली आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब दिया है।
उन्होंने कहा, ''कायर दुश्मन ने रात के अंधेरे में हमला किया। अफगान तालिबान ने निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने की निंदनीय कोशिश की। पूरा देश सशस्त्र बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और इस हमले के गंभीर परिणाम होंगे।"
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी कहा कि पाकिस्तान शांति और अपनी क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, ''हमारी सशस्त्र सेनाओं की प्रतिक्रिया व्यापक और निर्णायक है। जो लोग हमारी शांति को कमजोरी समझते हैं, उन्हें कड़ा जवाब मिलेगा।''
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा कि पाकिस्तान की जनता और सशस्त्र बल देश की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हमेशा तैयार हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल देश की सुरक्षा और शांति को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने देंगे।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस जंग को लेकर जो बयान दिया है, उसने आग में घी डालने का काम किया है। पहले उन्होंने कहा कि नाटो सेनाओं की अफगानिस्तान से वापसी के बाद उम्मीद थी कि वहां शांति स्थापित होगी और तालिबान अफगान जनता के विकास तथा क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान देगा।
इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि तालिबान ने अफगानिस्तान को 'भारत की कॉलोनी' बना दिया है और वे भारत के इशारे पर काम कर रहे हैं। आसिफ ने कहा, "हमने सालों तक अफगान शरणार्थियों को पनाह दी, दोस्ती का हाथ बढ़ाया, लेकिन तालिबान भारत का मोहरा बन गया। अब हमारा धैर्य खत्म हो चुका है और युद्ध छिड़ गया है।"
सीमा पर बढ़ता सैन्य टकराव पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए चिंता का विषय बन सकता है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के सख्त बयान हालात की गंभीरता दिखा रहे हैं। फिलहाल पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई है, जबकि दूसरी तरफ क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
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