
चाटुकारिता से सम्मान नहीं मिलता। इज्जत कमानी पड़ती है, खैरात में नहीं मिलती। ऐसी ही कई टिप्पणियां पाकिस्तान की सरकार को अपने ही लोगों से सुननी पड़ रही हैं। भारत की अमेरिका से ट्रेड डील क्या हुई, पाकिस्तानियों के पैर मानो तपते तवे पर पड़ गए। पाकिस्तानी नेता से लेकर पत्रकार तक, सभी अपनी सरकार को खरी-खोटी सुनाने की होड़ में हैं। पाकिस्तानियों को यह पच ही नहीं रहा है कि अमेरिका ने भारत पर पाकिस्तान से भी कम टैरिफ चार्ज की है। 2 फरवरी को घोषित ट्रेड डील के तहत अमेरिका ने भारत के लिए 18 प्रतिशत टैरिफ रेट तय किया है जबकि पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत टैरिफ है।
न्यूज वेबसाइट एनडीटीवी की रिपोर्ट में सोशल मीडिया मंच एक्स पर कुछ पाकिस्तानियों की पोस्ट शामिल की गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल क्रिएटर वजाहत खान ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'ट्रंप एक कारोबारी हैं। उन्होंने एक मैनेजर और एक दुकानदार को देखा और उन्होंने उन्हें दुकानदार वाली डील दी। भारत एक साझेदार के रूप में सामने आया और 18 प्रतिशत का उपहार लेकर चला गया।' वजाहत कहते हैं कि जनता के समर्थन के बिना चल रही सरकार की यही हैसियत है। उन्होंने लिखा, 'जनसमर्थन रूपी रीढ़ के अभाव में सरकार की यही कीमत चुकानी पड़ती है।'
भारत-अमेरिका डील के बाद से पाकिस्तानी पत्रकार भी अपनी सरकार के पिछे पिल पड़े हैं। जनर्लिस्ट असद तूर चेतावनी भरे अंदाज में कहते हैं कि अमेरिकी टैरिफ से पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली कई गुणा बढ़ा देगी। उन्होंने घटते निर्यात, विदेशी निवेश में गिरावट और तोल-मोल की पाकिस्तान की क्षमता के लगभग सफाये पर चिंता जताई है।
वहीं, पत्रकार इमरान रियाज खान का कहना है कि इज्जत कमाई जाती है, खरीदी नहीं जाती। उन्होंने लिखा, 'सेल्समैन इन चीफ की रणनीति असफल हो गई। आप लड़की के संदूक में बलूचिस्तान के खनिज पदार्थ तोहफे में दे सकते हैं, लेकिन आप इज्जत नहीं खरीद सकते।' सेल्समैन इन चीफ से रियाज का इशारा संभवतः पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तरफ है।
पाकिस्तान में विपक्षी दल भी भारत-अमेरिका डील से बौखलाकर अपनी सरकार को कोसने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहे। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की सरकार में मंत्री रहे हम्माद अजहर ने मौजूदा हालात को रणनीतिक हार करार दिया है। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, '21वीं सदी में विदेश नीति दिखावे या व्यक्तिगत संबंधों पर काम नहीं करती है बल्कि आर्थिक शक्ति, शुल्कों और बाजार तक पहुंच से तय होती है। भारत का यूरोपियन यूनियन (ईयू) और अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते इसी बात के सबूत हैं। चाटुकारिता और फोटो खिंचवाने की कवायद बिल्कुल फालतू है।'
एक अन्य पाकिस्तानी यूजर उमर अली ने भी एक्स पर अपनी भड़ास निकाली है। उन्होंने लिखा, 'डोनाल्ड ट्रंप ने फील्ड मार्शल (आसिम मुनीर) के साथ उस मालकिन जैसा व्यवहार किया है जो अपने प्रेमी से हर गैर-कानूनी और गंदा काम करवाती है और जब कुछ लेन-देन की बारी आती है तब वह कहती है कि क्या करूं, परिवार के फैसलों से बंधी हूं। मुझे माफ करना। मेरा शरीर तो मेरे पति का ही है, लेकिन मेरी रूह हमेशा तुम्हारे पास है।' उमर ने इस पोस्ट में एक एआई से तैयार की गई फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तस्वीर भी लगाई है जिसमें पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की तस्वीर वाले इंडिया टुडे के कवर पेज के सामने पाकिस्तानी सेना प्रमुख मिनेरल्स से भरा एक संदूक लिए खड़े हैं।
ध्यान रहे कि पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई बार अमेरिकी दौरे पर गए थे। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामित किया था। इतना ही नहीं, ट्रंप ने जब संयुक्त राष्ट्र के बरक्स बोर्ड ऑफ पीस का गठन किया तो पाकिस्तान ने खुशी-खुशी उसका समर्थन किया और पहले दिन ही संगठन की सदस्यता ले ली।
दूसरी तरफ भारत ने ट्रंप प्रशासन के सारे दबावों को दरकिनार करते हुए न तो नोबेल पुरस्कार की दावेदारी में ट्रंप का साथ दिया और न ही बोर्ड ऑफ पीस का ही समर्थन किया है, सदस्यता तो दूर की बात है। अब तो इस बात का खुलासा हुआ है कि झुकने के बजाय भारत ने पिछले वर्ष सितंबर में अमेरिका को कड़ी चेतावनी दे दी थी। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो को अमेरिका में ही साफ-साफ कहा था कि भारत ट्रंप प्रशासन की हरकतों के आगे झुकने वाला नहीं है।
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