
Parliament Session LIVE: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज लोकसभा में बयान देने को तैयार थे, लेकिन सदन में विपक्ष का हंगामा नहीं रुका। आखिरकार लोकसभा की कार्यवाही आज दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे जगदंबिका पाल ने विपक्ष को समझाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन विपक्षी सांसद हंगामा करते रहे। आखिरकार, उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार, सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
संसद में सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनाने के अभी तक के प्रयास विफल रहे हैं। राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दों पर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद अपराह्न दो बजे तक स्थगित।
सरकार की ओर से संपर्क साधे जाने के बाद कुछ विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं, लेकिन कांग्रेस और उसके ज्यादातर सहयोगियों ने इन विधेयकों तथा एफसीआरए संशोधन विधेयक को लाने के किसी भी कदम का विरोध करने का संकल्प लिया है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने गतिरोध खत्म करने के प्रयास में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दो बार मुलाकात की थी। मंत्री ने गांधी से फोन पर भी बातचीत की थी। सूत्रों के अनुसार, जब रिजीजू ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को पारित कराने के लिए कांग्रेस का समर्थन मांगा, तो लोकसभा में विपक्ष के नेता ने प्रस्तावित विधेयकों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने पर जोर दिया।
सोमवार के लिए लोकसभा की कार्यसूची में चार विधेयकों को शामिल किया गया जिनमें न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026; खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026; केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026; और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।
संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई सहित विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध बने होने के कारण उच्च सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही है। विपक्षी दल राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तथा 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग कर रहे हैं।
सरकार ने संसद में गतिरोध खत्म करवाने के लिए विपक्ष की मांग मान ली। 2 बजे सदन की कार्यवाही तीसरी बार शुरू हुई तो अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन बीजेपी नेता और लोकसभा सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्ष को सूचना दी कि सरकार ने गृह मंत्री अमित शाह का बयान देने की मांग मान ली है। उन्होंने विपक्षी सांसदों को आश्वस्त किया कि गृह मंत्री शाह सदन में आकर अपना बयान देंगे, लेकिन विपक्ष का हंगामा नहीं थमा। आखिरकार, लोकसभा की कार्यवाही आज दिनभर के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी गई।
केंद्र सरकार गृह मंत्री अमित शाह का संसद में बयान देने की विपक्ष की मांग को मान गई है। लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तीसरी बार शुरू हुई तो अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने सदन को बताया कि गृह मंत्री बयान देने को तैयार हैं। उन्होंने हंगामा कर रहे विपक्षी सांसदों को आश्वस्त किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में बयान देंगे, लेकिन उससे पहले शांति कायम करनी होगी। विपक्ष चेयर की अपील के बावजूद हंगामे पर अड़ा रहा और लोकसभा में अब भी हंगामा जारी है। हालांकि, सरकार की ओर से विधयकों को पेश करने की प्रक्रिया भी जारी है।
'लोकसभा और राज्यसभा में एक ही मांग है कि अमित शाह जी सदन में आएं और अपनी बात रखें। हम 17 दिन दिन से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि वो सदन में आकर, बच्चों पर जो अन्याय हुआ है, इस विषय पर उनका एक बयान दें। आप सदन को अनदेखा क्यों कर रहे हैं? इसका मतलब यही है कि सदन में जो जनता ने सदस्य चुनकर दी है, उसका आप अपमान कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि अमित शाह जी आए और बयान दें। वो नहीं चाहते हैं कि सदन सही से चले और शांतिपूर्ण चले। हम तो चर्चा चाहते हैं लेकिन वो बयान नहीं देना चाहते हैं, उनके पास इसका जवाब नहीं है। उनकी वजह से ये सदन नहीं चल रहा है तो सरकार इसके लिए जिम्मेदार है, पीएम और गृह मंत्री जी इसके लिए जिम्मेदार हैं।- मल्लिकार्जन खरगे, अध्यक्ष, कांग्रेस
हमारा स्टैंड बहुत स्पष्ट है। पहले गृह मंत्री अमित शाह को संसद में आएं और दिल्ली में छात्रों के उत्पीड़न पर बयान दें। यही हमारी मांग है। इस मुद्दे पर बिना बयान दिए हम उन्हें बोलने नहीं देंगे।- केसी वेणुगोपाल, महासचिव, कांग्रेस
संसद में विपक्ष का हंगामा थम नहीं रहा है। लोकसभा की कार्यवाही पहले 12 बजे और फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित हो गई। फिर राज्यसभा की कार्यवाही भी 2 बजे तक के लिए स्थगित हो चुकी है।
मानसून सत्र के अब केवल चार कार्य दिवस बचे हैं, लेकिन संसद में जारी गतिरोध के बीच महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर अब भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। इनमें से कोई भी विधेयक सोमवार को लोकसभा की कार्यसूची में शामिल नहीं है।
इसके अनुसार इसलिए, विधेयक में एनसीडीसी के कार्यक्षेत्र (अधिकार क्षेत्र) को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत एनसीडीसी का दायरा केवल सहकारी समितियों के माध्यम से कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें बढ़ावा देने तक सीमित न रहकर, सहकारी विकास से जुड़े कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें बढ़ावा देने तक किया जाएगा।
इस नए विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, जून 2021 में अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन और केंद्र सरकार द्वारा सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद सहकारी क्षेत्र के विकास में एनसीडीसी की भूमिका काफी बढ़ गई है।
एनसीडीसी के प्रमुख कार्यों में कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों और अन्य अधिसूचित वस्तुओं के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण और आयात-निर्यात से जुड़े कार्यक्रमों की योजना बनाना, उन्हें बढ़ावा देना और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना शामिल है। सरकार सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेगी। लोकसभा सदस्यों को वितरित विधेयक के अनुसार, इसके जरिये मूल अधिनियम में बदलाव का प्रस्ताव है।
सरकार आज लोकसभा में एक विधेयक पेश करेगी, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करना है। इसके तहत एनसीडीसी को सहकारी समितियों या इस क्षेत्र के विकास में लगी किसी भी इकाई को सीधे ऋण और अनुदान देने का अधिकार मिल सकेगा। सहकारिता मंत्रालय के तहत आने वाला एनसीडीसी एक वैधानिक निकाय है। इसकी स्थापना 1963 में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 के तहत की गई थी।
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