Amavasya Vrat Katha in Hindi: साल की आखिरी अमावस्या आज, पीपल के पेड़ की परिक्रमा का क्या है रहस्य, जानें व्रत कथा

Paush Amavasya Vrat Katha: पौष अमावस्या साल की आखिरी अमावस्या मानी जाती है, जिसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन व्रत, दान और परंपरागत पूजा का खास महत्व बताया गया है। इस दिन व्रत कथा और पीपल की परिक्रमा की भी खास परंपरा है।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड19 Dec 2025, 09:30 AM IST
पौष अमावस्या पर क्यों करते हैं पीपल की परिक्रमा? जानें व्रत कथा
पौष अमावस्या पर क्यों करते हैं पीपल की परिक्रमा? जानें व्रत कथा

Paush Amavasya 2025 Vrat Katha: आज साल की आखिरी अमावस्या है, जिसे पौष अमावस्या के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस तिथि को बेहद पुण्यकारी माना गया है। स्नान, दान, साधना और पितरों से जुड़ी पूजा के लिए यह दिन खास बताया जाता है। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए कर्मों का प्रभाव लंबे समय तक जीवन में बना रहता है।

पितरों से जुड़ा है इस दिन का महत्व

पौष अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन पूर्वजों के तर्पण और स्मरण करने से उन्हें संतोष और शांति मिलती है। साथ ही, परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। कई लोग परिवार के सुख और मानसिक शांति के लिए इस दिन व्रत भी रखते हैं।

व्रत के साथ कथा क्यों जरूरी मानी जाती है

धार्मिक परंपराओं में कहा जाता है कि कोई भी व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक उससे जुड़ी कथा न सुनी या पढ़ी जाए। पौष अमावस्या पर भी व्रत के साथ कथा का पाठ करने की परंपरा है, ताकि व्रत का फल पूरी तरह प्राप्त हो सके।

पौष अमावस्या व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक निर्धन ब्राह्मण की बेटी गुणवान होने के बावजूद विवाह की परेशानियों से जूझ रही थी। एक दिन एक साधु उनके घर आए। ब्राह्मण ने उनकी सेवा की, जिससे प्रसन्न होकर साधु ने कन्या के विवाह का उपाय बताया। साधु के कहने पर कन्या रोज एक परिवार के घर जाकर सफाई करने लगी। उसकी निस्वार्थ सेवा से प्रसन्न होकर उस घर की महिला ने उसे आशीर्वाद दिया।

कुछ दिनों बाद उस घर की महिला को सच्चाई पता चली और वह कन्या की सेवा भावना से खुश हो गई। उसने कन्या को विवाह का आशीर्वाद दिया। लेकिन उसी समय उस महिला के पति की मृत्यु हो गई। दुखी महिला ने अपने आंगन के पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा की और भगवान विष्णु से प्रार्थना की। संयोग से वह दिन पौष अमावस्या का ही था। मान्यता है कि भगवान की कृपा से उसका पति पुनर्जीवित हो गया और कन्या का विवाह भी संपन्न हुआ। तभी से इस व्रत कथा को अत्यंत फलदायी माना जाता है।

पीपल की परिक्रमा का धार्मिक कारण

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश, तीनों देवों का वास होता है। पौष अमावस्या के दिन पीपल की परिक्रमा करने और शाम को उसके नीचे घी का दीपक जलाने की परंपरा है। साथ ही पितरों का स्मरण और गाय को रोटी-गुड़ खिलाना भी शुभ माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पंचांगों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य सिर्फ आपको जागरूक करना है, मिंट हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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