Purnima kab hai: 2 या 3 जनवरी? कब है पौष पूर्णिमा, यहां पढ़ें पूरी जानकारी

Purnima kab hai: पौष पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन से प्रयागराज में माघ मेले की शुरुआत भी होती है। चलिए जानें साल 2026 में कब है पूर्णिमा।

Priya Shandilya
अपडेटेड2 Jan 2026, 07:15 AM IST
पौष पूर्णिमा कब है?
पौष पूर्णिमा कब है?

Paush Purnima 2026: साल 2026 की पहली पूर्णिमा यानी पौष पूर्णिमा दान, पुण्य और आत्मशुद्धि का खास अवसर मानी जाती है। इस दिन स्नान, दान और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही इसी दिन से प्रसिद्ध माघ मेले की भी शुरुआत होती है, जिसे भारत के सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है।

पौष पूर्णिमा 2026: तिथि और समय

हिंदू पंचांग के अनुसार पौष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 जनवरी 2026 की शाम 6 बजकर 53 मिनट से होगी और इसका समापन 3 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 32 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार व्रत 3 जनवरी 2026, शनिवार को रखा जाएगा।

पौष पूर्णिमा पर स्नान और दान का शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:25 से 6:20 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:46 बजे तक

इस दौरान गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान, दान और पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है। इसी दिन से प्रयागराज में माघ मेले का शुभारंभ भी होता है।

पौष पूर्णिमा पर इन गलतियों से बचें:

सूर्योदय के बाद ना सोएं: इस दिन देर तक सोना अशुभ माना गया है। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और दिन शुभ बनता है। देर तक सोने से धन और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

झगड़ा या बहस करने से बचें: पूर्णिमा के दिन क्रोध, विवाद या कटु वचन घर की सकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर देते हैं। इससे मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और पारिवारिक तनाव बढ़ सकता है।

तामसिक भोजन न करें: मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन जैसे तामसिक भोजन इस दिन वर्जित माने जाते हैं। इससे पुण्य क्षीण होता है और नकारात्मकता बढ़ती है। सात्विक भोजन करने से मन और शरीर दोनों शुद्ध रहते हैं।

कर्ज का लेन-देन न करें: पौष पूर्णिमा पर उधार लेना या देना शुभ नहीं माना जाता। इससे आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है। इस दिन दान करें लेकिन लेन-देन से बचें।

पौष पूर्णिमा सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों का दिन नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और संतुलन लाने का अवसर है। सही समय पर स्नान-दान और पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और साल भर सुख-समृद्धि बनी रहती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पंचांगों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य सिर्फ आपको जागरूक करना है, मिंट हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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