Phalguna Purnima Vrat Katha: भगवान विष्णु के भक्त फाल्गुन पूर्णिमा पर पढ़ें ये व्रत कथा, पूरे होंगे रुके काम

फाल्गुन पूर्णिमा 2026 इस साल 23 मार्च को मनाई जाएगी। इसके अगले दिन होलिका दहन और लक्ष्मी जयंती भी है। यह पूर्णिमा का दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड2 Mar 2026, 05:58 AM IST
भगवान विष्णु के भक्त फाल्गुन पूर्णिमा पर पढ़ें ये व्रत कथा, पूरे होंगे रुके काम
भगवान विष्णु के भक्त फाल्गुन पूर्णिमा पर पढ़ें ये व्रत कथा, पूरे होंगे रुके काम

हिंदू धर्म में फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक रूप से महत्व है क्योंकि ये दिन हिंदू वर्ष का आखिरी दिन माना जाता है। कई लोग फाल्गुन पूर्णिमा के दिन व्रत भी रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि विधान व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन की सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं।

इस दिन पवित्र नदियों, खासकर गंगा में स्नान करने के बाद दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। हर महीने की पूर्णिमा तिथि महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन फाल्गुन पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। फाल्गुन पूर्णिमा को लक्ष्मी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा के दिन समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसी कारण यह तिथि बहुत शुभ मानी जाती है और इसे सुख-समृद्धि देने वाली माना जाता है। इसलिए आइए जानते हैं कि फाल्गुन पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और स्नान व दान का शुभ समय क्या रहेगा।

जानिए फाल्गुन पूर्णिमा की तारीख

फाल्गुन पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम है। आपको बता दें कि इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इसके अगले दिन यानी 3 मार्च 2026 को होलिका दहन भी किया जाएगा। होलिका दहन के बाद ही रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है। इस साल 3 मार्च को होलिका दहन होगा और 4 मार्च 2026 को होली मनाई जाएगी।

फाल्गुन पूर्णिमा व्रत कथा (Falgun/ Phalguna Purnima Vrat Katha)

फाल्गुन पूर्णिमा की कथा के अनुसार महर्षि कश्यप की पत्नी और दक्ष की पुत्री दिति से दो पुत्र हुए, जिनका नाम हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष था। दोनों बहुत शक्तिशाली थे। उन्होंने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। उनके अत्याचार से देवता परेशान हो गए। तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध कर दिया।

अपने भाई की मृत्यु से हिरण्यकश्यप बहुत क्रोधित हो गया और उसने भगवान विष्णु को अपना शत्रु मान लिया। बदला लेने के लिए वह भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या करने लगा। इसी बीच देवताओं ने दैत्यों को हराकर स्वर्ग वापस ले लिया।

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उस समय हिरण्यकश्यप की पत्नी कयाधु गर्भवती थी। देवराज इंद्र उसे बंदी बनाकर ले जा रहे थे, क्योंकि उन्हें लगा कि उसके गर्भ में दुष्ट बालक है। रास्ते में देवर्षि नारद मिले। उन्होंने इंद्र से कहा कि कयाधु के गर्भ में भगवान विष्णु का परम भक्त है। यह सुनकर इंद्र ने कयाधु को छोड़ दिया।

नारद जी कयाधु को अपने आश्रम ले आए। वहां कयाधु ने उनके सत्संग और उपदेश सुने। इन बातों का असर उसके गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ा। समय आने पर कयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम प्रह्लाद रखा गया। उधर हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा जी से वरदान मिल गया और वह अपने राज्य लौट आया। कयाधु भी प्रह्लाद को लेकर उसके पास आ गई। जब प्रह्लाद बड़े हुए तो उनकी शिक्षा शुरू हुई।

एक दिन हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से पूछा, “तुमने अपनी पढ़ाई में सबसे अच्छी बात क्या सीखी?” प्रह्लाद ने उत्तर दिया, “मैंने सीखा है कि भगवान विष्णु ही सृष्टि के पालनहार हैं। मैं उन्हें बार-बार प्रणाम करता हूं।”

अपने पुत्र के मुंह से विष्णु भक्ति की बातें सुनकर हिरण्यकश्यप बहुत क्रोधित हो गया। उसने गुरु पर आरोप लगाया, लेकिन गुरु ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं सिखाया। तब हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से पूछा कि यह ज्ञान उसे किसने दिया। प्रह्लाद ने कहा, “भगवान विष्णु ही सबको ज्ञान देते हैं।”

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यह सुनकर हिरण्यकश्यप का क्रोध और बढ़ गया। उसने प्रह्लाद को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन प्रह्लाद की भक्ति नहीं डगमगाई। तब हिरण्यकश्यप ने सैनिकों को आदेश दिया कि प्रह्लाद को मार डालो। सैनिकों ने उन्हें कई तरह से कष्ट दिए, लेकिन भगवान की कृपा से उनका बाल भी बांका नहीं हुआ।

अंत में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया। होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे नहीं जला सकती। उसने प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का निश्चय किया। प्रह्लाद भगवान का नाम जपते रहे। भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे, लेकिन होलिका आग में जलकर भस्म हो गई। इसी घटना की याद में हर साल होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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