Phalguna Purnima 2026: कब रखा जाएगा फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत? जानिए सही तिथि, समय और चंद्र ग्रहण का प्रभाव

फाल्गुन पूर्णिमा 2026 की तिथि 2 मार्च शाम 5:56 बजे से 3 मार्च शाम 5:08 बजे तक रहेगी। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने से भ्रम है, लेकिन शास्त्रों अनुसार व्रत उस दिन रखा जाता है जब पूर्णिमा में चंद्र उदय हो। इसलिए 2 मार्च को व्रत रखना उचित माना गया है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड25 Feb 2026, 12:10 PM IST
कब रखा जाएगा फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत? जानिए सही तिथि, समय और चंद्र ग्रहण का प्रभाव
कब रखा जाएगा फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत? जानिए सही तिथि, समय और चंद्र ग्रहण का प्रभाव

हिंदू पंचांग में पूर्णिमा का व्रत हर महीने एक निश्चित क्रम में आता है। हर महीने एक बार, पूर्ण चंद्रमा के दिन। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, चंद्रमा की पूजा करते हैं और मानसिक शांति, समृद्धि तथा परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

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लेकिन फाल्गुन पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। यह चंद्र वर्ष के अंत का संकेत देती है, होली के त्योहार से जुड़ी होती है और 2026 में इसी दिन चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। यहीं से लोगों में भ्रम शुरू हो जाता है।

फाल्गुन पूर्णिमा की तारीख को लेकर भ्रम

इस साल फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि दो अलग-अलग कैलेंडर दिनों में पड़ रही है, जिससे लोगों को सही व्रत तिथि को लेकर उलझन हो रही है। पंचांग के अनुसार:

  • पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:56 बजे शुरू होगी।
  • पूर्णिमा तिथि 3 मार्च 2026 को शाम 5:08 बजे समाप्त होगी।

इसी बीच 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। ग्रहण के कारण सूतक काल लगेगा और कई धार्मिक कार्यों पर रोक रहेगी। ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि व्रत किस दिन रखा जाए?

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शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन पूर्णिमा तिथि में चंद्रमा का उदय होता है। इस गणना के अनुसार 2 मार्च 2026 को व्रत रखना उचित माना गया है।

फाल्गुन पूर्णिमा व्रत का धार्मिक महत्व

फाल्गुन पूर्णिमा अन्य पूर्णिमाओं की तुलना में अधिक शुभ मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। भक्त धन, सुख-शांति और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं। इस व्रत से जुड़ी मान्यताएं:

  • धन और आर्थिक स्थिरता में वृद्धि
  • संतान सुख और परिवार की उन्नति
  • लंबे समय से रुकी इच्छाओं की पूर्ति
  • चंद्रमा की पूजा से मानसिक शांति

ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष होता है, उन्हें यह व्रत रखने की सलाह दी जाती है। इस दिन स्नान और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

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फाल्गुन पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि

पूजा विधि आसान है। सबसे जरूरी है सच्ची श्रद्धा।सामान्य पूजा क्रम इस प्रकार है:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी या तालाब में स्नान करें।
  • सूर्य देव को प्रणाम करके व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें।
  • लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उनकी प्रतिमा स्थापित करें।
  • तिलक, फूल और वस्त्र अर्पित करें।
  • विष्णु मंत्रों का जाप करें और भोग लगाएं।
  • पूर्णिमा कथा पढ़ें और आरती करें।
  • चंद्रमा निकलने के बाद कच्चे दूध में पानी मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
  • पहले प्रसाद ग्रहण करें, फिर भोजन करके व्रत खोलें।
  • अगले दिन दान अवश्य करें।
  • दान करना व्रत की पूर्णता के लिए जरूरी माना जाता है।

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चंद्र ग्रहण का प्रभाव

3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने के कारण उस दिन सूतक काल रहेगा और कई धार्मिक कार्य नहीं किए जाएंगे। यही कारण है कि फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत 2 मार्च 2026 को रखना अधिक उचित माना गया है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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