Phulera Dooj Vrat Katha In Hindi: फुलेरा दूज पर प्रेम, समृद्धि के लिए करें इस कथा का पाठ, पूरी होगी हर मनोकामना

फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला फुलेरा दूज राधा कृष्ण के दिव्य प्रेम को समर्पित है। इस दिन बिना पंचांग देखे शुभ कार्य किए जाते हैं। कथा के अनुसार श्रीकृष्ण के ब्रज लौटने और राधा पर फूल बरसाने से फूलों की होली की परंपरा शुरू हुई। पूजा और व्रत से सुख समृद्धि मिलती है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड19 Feb 2026, 11:07 AM IST
फुलेरा दूज पर प्रेम, समृद्धि के लिए करें इस कथा का पाठ, पूरी होगी हर मनोकामना
फुलेरा दूज पर प्रेम, समृद्धि के लिए करें इस कथा का पाठ, पूरी होगी हर मनोकामना

फाल्गुन माह का सनातन धर्म में विशेष महत्व है और इस पवित्र महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह त्योहार 19 फरवरी को मनाया जा रहा है। यह दिन पूरी तरह से राधा कृष्ण के दिव्य प्रेम को समर्पित है।

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इस दिन बिना पंचांग देखे भी शुभ कार्य शुरू किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने और व्रत कथा सुनने से वैवाहिक जीवन सुखी होता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पूजा के समय फुलेरा दूज की कथा अवश्य पढ़नी या सुननी चाहिए।

जानिए धार्मिक महत्व

फुलेरा दूज का त्योहार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से वृंदावन और पूरे ब्रज क्षेत्र में बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। माना जाता है कि ब्रज में होली की शुरुआत इसी दिन से होती है और वातावरण भक्ति, रंग और आनंद से भर जाता है।

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यह दिन अभिजीत योग के समान शुभ फल देने वाला माना गया है। इस दिन वाहन खरीदना, संपत्ति का रजिस्ट्रेशन कराना, नया व्यापार शुरू करना, विवाह की बात पक्की करना या कोई भी अन्य शुभ कार्य बिना पंचांग देखे करना मंगलकारी माना जाता है।

यहां पढ़िए फुलेरा दूज की कथा (Phulera Dooj Vrat Katha In Hindi)

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार किसी कारणवश श्रीकृष्ण कई दिनों तक वृंदावन नहीं आ सके और राधा रानी से मिल नहीं पाए। उनके वियोग में राधा रानी अत्यंत दुखी हो गईं। ग्वाल बाल और गोपियां भी उदास रहने लगीं। कहा जाता है कि ब्रज की प्रकृति भी शोक में डूब गई। पेड़ पौधे सूखने लगे, लताएं मुरझा गईं और यमुना का जल भी कम होने लगा।

उसी समय देवर्षि नारद द्वारका पहुंचे और उन्होंने श्रीकृष्ण को ब्रजवासियों की स्थिति के बारे में बताया। नारद जी ने कहा कि आपके बिना ब्रज की शोभा समाप्त हो गई है और प्रकृति भी सूखती जा रही है। यह सुनकर भगवान का हृदय पिघल गया और उन्होंने तुरंत ब्रज लौटने का निर्णय लिया।

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उनके आगमन का समाचार मिलते ही पूरे ब्रज में खुशी की लहर दौड़ गई। माता यशोदा ने दौड़कर श्रीकृष्ण को गले लगा लिया। राधा रानी और गोपियां भी उनसे मिलने को व्याकुल थीं। जैसे ही राधा रानी ने श्रीकृष्ण को देखा, उनका हृदय आनंद से भर गया। पेड़ पौधे फिर से हरे भरे हो गए।

खुशी में श्रीकृष्ण ने राधा रानी पर फूलों की वर्षा की। कहा जाता है कि जिस स्थान पर यह मिलन हुआ, वह आज भी भक्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि वह दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि थी। इसी कारण ब्रज में फूलों की होली खेलने की परंपरा शुरू हुई। फुलेरा दूज से ही ब्रज में फूलों वाली होली की शुरुआत मानी जाती है।

फुलेरा दूज फाल्गुन महीने का एक पवित्र और शुभ दिन है। इस दिन व्रत कथा का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। जो भक्त इस दिन राधा कृष्ण की पूजा करते हैं और फुलेरा दूज की व्रत कथा का श्रद्धा से पाठ करते हैं, उन पर राधा कृष्ण की कृपा बनी रहती है।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। मिंट हिंदी इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)

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