PM Modi Iran US War: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और अनिश्चितता का माहौल है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तनाव का केंद्र बना हुआ है, लेकिन भारत ने विकास की गति को रुकने नहीं दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में रेलवे के बड़े पैमाने पर हुए विद्युतीकरण ने देश को ऊर्जा संकटों के असर से काफी हद तक बचाया है। उनके मुताबिक, यदि ऐसी वैश्विक परिस्थितियां 2014 से पहले पैदा होतीं, तो भारतीय रेलवे को भारी दबाव का सामना करना पड़ सकता था।
भारत चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल
हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक को अपनाया है। यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है और संचालन के दौरान केवल जलवाष्प (Water Vapour) उत्सर्जित करती है, जिससे इसे स्वच्छ परिवहन का महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलेगी और इसे भारतीय तकनीक के साथ विकसित किया गया है।
रेलवे में ग्रीन एनर्जी की बड़ी छलांग
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल पारंपरिक रेलवे नेटवर्क के विस्तार पर ही नहीं, बल्कि ग्रीन एनर्जी आधारित परिवहन पर भी तेजी से काम कर रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन को राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है। अगर यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में भारतीय रेलवे के कई अन्य रूट्स पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है।
तेल संकट के बावजूद नहीं रुकी रेल
पीएम मोदी ने कहा कि तेल संकट होने के बावजूत रेल नहीं रुकी। पीएम मोदी ने कहा कि पहले ये स्थिति होती तो रेलवे ठप हो जाता। तेल संकट के बावजूद विकास की गाड़ी अटकी नहीं। उन्होंने कहा कि मोदी सोचता भी है और समाधान भी करता है। विकास की रफ्तार न रुकी है और न कभी रुकेगी। पीएम ने बताया कि पिछले 12 साल में 99 प्रतिशत रेलवे का बिजलीकरण किया। उन्होंने कहा कि आज आत्मनिर्भर भारत के लिए बड़ा दिन है। हरियाणाअब विकास की नई पटरी पर है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय रेलवे के बिजलीकरण की शुरुआत 1925 में हुई थी, यानी करीब 100 साल पहले। 1925 से लेकर 2014 तक करीब 90 साल में पूरे देश के रेल नेटवर्क का करीब 30 प्रतिशत ही बिजलीकरण हो पाया था। 70 प्रतिशत क्षेत्र डीजल से चलता था।
कितने देशों में चलती है हाईड्रोजन ट्रेन
प्रधानमंत्री ने कहा, 21वीं सदी की रेल हाइड्रोजन से चलने वाली है। दुनिया में केवल 3 या 4 देश हैं, जहां हाईड्रोजन ट्रेन चल रही है। ये दुनिया की सबसे ताकतवर ट्रेन है, सबसे लम्बी ट्रेन है। देश ने 10 कोच वाली ट्रेन चलाकर दुनिया में अपना झंडा गाड़ दिया है। ये प्रदूषण रहित ट्रेन भारत के इंजीनियरों ने बनाया है।
क्यों अहम है हाईड्रोजन ट्रेन?
हाइड्रोजन ट्रेन का लॉन्च केवल एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, ग्रीन मोबिलिटी और आत्मनिर्भर तकनीक की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया ऊर्जा आपूर्ति और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है। भारत ने स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल तकनीक अपनाकर एक मजबूत संदेश देने की कोशिश की है।