ग्लोबल आर्थिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से एक अनूठी अपील की है। हैदराबाद में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्र की रक्षा केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में भी निहित है। उन्होंने मध्यम वर्ग और संपन्न परिवारों से एक साल तक सोने के आभूषणों की खरीद टालने और छुट्टियां बिताने के लिए विदेश जाने के बजाय घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता देने की भावुक अपील की है। अब संभावना जताई जा रही है कि पीएम मोदी की इस अपील के बाद सोने दाम में गिरावट देखी जा सकती है।
पीएम मोदी ने कही ये बातें
उन्होंने कहा, "हमें तय करना होगा कि जब यह संकट का काल है और हमारी देशभक्ति हमें ललकार रही है तो कम से कम एक साल के लिए विदेशों में जाने की बातों को टालना चाहिए। भारत में बहुत सारी जगह हैं वहां हम जा सकते हैं। भारत में बहुत कुछ किया जा सकता है।" उन्होंने कहा, "विदेशी मुद्रा बचाने के जो भी रास्ते हम लोग अपना सकते हैं, उसे अपनानी होगी। हमें विदेश मुद्रा बचानी होगी।"
देश हित के लिए उठाएं ये कदम
उन्होंने आगे कहा कि सोने की खरीद एक और पहलू है, जिसमें विदेशी मुद्रा बहुत अधिक खर्च होती है। एक जमाना था जब संकट आता था, कोई युद्ध होता था तो लोग सोना दान दे देते थे। आज दान देने की जरूरत नहीं है, लेकिन देश हित में हमको एक तय करना पड़ेगा कि कोई भी समारोह हो, कोई भी कार्यक्रम हो हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। उन्होंने कहा, " सोना नहीं खरीदेंगे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें चुनौती को स्वीकार करते हुए विदेशी मुद्रा को बचाना होगा।"
पेट्रोल-डीजल और गैस बचाने की भी अपील
इस दौरान उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस बचाने और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की भी अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कहा कि देशभक्ति केवल राष्ट्र के लिए प्राण न्योछावर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कठिन समय में जिम्मेदारीपूर्वक जीवन जीने और देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने में भी निहित है।
उन्होंने इस कठिन समय में नागरिकों से पेट्रोल और डीज़ल की खपत कम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोग जहां उपलब्ध हो, वहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, निजी वाहन आवश्यक होने पर कार-पूलिंग अपनाएं, माल ढुलाई के लिए रेलवे परिवहन को प्राथमिकता दें और जहां संभव हो, वहां इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करें।