
PRAHAAR: गृह मंत्रालय (MHA) ने पहली बार नेशनल काउंटर टेररिज्म पॉलिसी (राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति) जारी की है। प्रहार (PRAHAAR) नाम की इस डॉक्यूमेंटेड पॉलिसी में कहा गया है कि भारत सीमा पार से राज्य-प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित है। इसमें जिहादी आतंकवादी संगठनों के साथ-साथ उनके मुखौटा संगठन भी भारत में आतंकी हमलों की साजिश, समन्वय, सुविधा और उन्हें अंजाम देने में लगे हुए हैं। इस पॉलिसी के तहत आतंकवाद से जुड़े हिंसा की घटानाओं के मामले में सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल पर फोकस किया गया है।
बता दें कि भारत को लंबे समय से आतंक से जुड़े हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। जल, जमीन और वायु सहित सभी मोर्चों पर रिस्क बढ़ा है। ऐसे में सरकार अपने लोगों को ढांचागत सुविधाओं को नुकसान से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा ढांचा चाहती है। आतंकवादी न सिर्फ देश के लोगों को बल्कि इकोनॉमी को भी गहरी चोट पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। खासकर वे पावर, रेलवे, बंदरगाहों, अंतरिक्ष कार्यक्रम, परमाणु ऊर्जा, हवाई अड्डों और हवाई ढांचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।ऐसे में देश को आतंकी हमलों से बचाने के लिए सरकार ने एंटी-टेरर पॉलिसी पेश की है।
वहीं फंडिंग और ऑपरेशनल गाइडेंस के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन, एन्क्रिप्शन टूल, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट के इस्तेमाल की ओर इशारा किया गया है। इसमें एनॉनिमस एक्टिविटी पर भी चिंता जताई गई है। गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड इस स्ट्रैटेजी डॉक्यूमेंट के मुताबिक, ‘CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव, डिजिटल) मैटीरियल तक पहुंचने और उसका इस्तेमाल करने की टेररिस्ट कोशिशों को रोकना काउंटर टेररिज्म एजेंसियों के लिए एक चुनौती बना हुआ है। सरकारी और नॉन-स्टेट एक्टर्स द्वारा जानलेवा मकसदों के लिए ड्रोन और रोबोटिक्स का गलत इस्तेमाल करने का खतरा भी चिंता का विषय बना हुआ है।’
पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में जॉइंट टास्क फोर्स ऑन इंटेलिजेंस (JTFI) के साथ मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) का संचालन, देश भर में CT से जुड़े इनपुट्स को अच्छे से और रियल टाइम में शेयर करने और बाद में रुकावट से बचाने के लिए नोडल प्लेटफॉर्म बना रहेगा। इसमें कहा गया है, "आईबी में एमएसी/जेटीएफआई के तंत्र के तहत केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों के साथ सीटी संचालन के लिए बेहतर तालमेल बनाया गया है।"
गृह मंत्रालय ने कहा है कि आतंकी ग्रुप भारतीय युवाओं को भर्ती करने की कोशिशें जारी रखे हुए हैं। पहचान होने के बाद ऐसे लोगों पर पुलिस की ग्रेडेड कार्रवाई होती है। इसमें सामाजिक और धार्मिक नेताओं की भूमिका की बात भी कही गई है। कहा गया है कि मॉडरेट प्रचारक और NGO रेडिकलाइजेशन और चरमपंथी हिंसा के नतीजों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए लगे हुए हैं।
भारत ने दशकों से आतंकवाद का दंश झेला है। 1993 के मुंबई धमाके हों या 26/11 का हमला या फिर पुलवामा का आतंकी अटैक। भारत अक्सर 'रिएक्टिव' (हमले के बाद कार्रवाई करने वाला) रहा है। यानी चोट लगने के बाद मरहम लगाने वाली सोच। लेकिन 2026 का भारत अब 'प्रो-एक्टिव' (हमले से पहले हमलावर को खत्म करने वाला) हो चुका है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सुरक्षा बलों ने हिजबुल्लाह के खूंखार कमांडर सैफुल्ला को ढेर किया।
इस ऑपरेशन ने एक बात साफ कर दी कि आतंकी अब सिर्फ पहाड़ों में नहीं छिपे हैं, बल्कि वे एनक्रिप्टेड ऐप्स और सैटेलाइट फोन के जरिए विदेशों से गाइड हो रहे हैं। इसी 'हाइब्रिड टेररिज्म' को कुचलने के लिए गृह मंत्रालय ने 'प्रहार' (PRAHAAR) को पेश किया है। यह नीति भारत की "जीरो टॉलरेंस" नीति का लिखित प्रमाण है।
सबसे पहला काम है हमले को होने ही न देना. इसके लिए जमीन पर मौजूद मुखबिरों से लेकर अंतरिक्ष में घूम रहे सैटेलाइट्स तक, सबका डेटा एक जगह इकट्ठा होगा।
अगर कोई आतंकी घटना होती है, तो भारत का जवाब 'Swift and Proportionate' होगा। इसका मतलब है कि अब फाइलें नहीं घूमेंगी, कमांडरों के पास तुरंत फैसला लेने की ताकत होगी।
रॉ (RAW) की जानकारी सीधे एक छोटे शहर के पुलिस कप्तान तक सेकंडों में पहुंचेगी। 'Whole-of-Government' अप्रोच अब हकीकत है।
भारत एक जिम्मेदार लोकतंत्र है। यह नीति साफ करती है कि आतंकियों से लड़ते हुए भी निर्दोषों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
सिर्फ आतंकी को मारना काफी नहीं, उस सोच को मारना जरूरी है। इसमें 'डी-रेडिकलाइजेशन' प्रोग्राम्स को शामिल किया गया है।
भारत अब इंटरपोल और एफएटीएफ (FATF) के साथ मिलकर आतंकियों की 'सेफ हेवन' को तबाह करेगा।
अगर कोई हमला होता है, तो समाज को डराना नहीं, बल्कि उसे तुरंत सामान्य स्थिति में लाना सरकार की प्राथमिकता होगी।
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