जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद एक ऐसा फैसला लिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। शुक्रवार को पीके ने ऐलान किया कि वह दिल्ली स्थित अपने परिवार के लिए एक घर को छोड़कर, बीते 20 वर्षों में अर्जित अपनी पूरी चल-अचल संपत्ति जन सुराज पार्टी को दान कर देंगे। उन्होंने साफ कहा कि पैसे की कमी जन सुराज आंदोलन की गति नहीं रोकेगी।
अगले 5 साल की कमाई का 90% भी करेंगे पार्टी को समर्पित
आज मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने अपनी प्रतिबद्धता और स्पष्ट की और कहा कि मैं बिहार की जनता से वादा करता हूं कि आने वाले पांच वर्षों में मेरी जो भी कमाई होगी, उसका 90% जन सुराज को दान कर दूंगा और अपने परिवार के लिए दिल्ली में सिर्फ एक घर छोड़कर बाकी पिछले 20 वर्षों में कमाई गई मेरी पूरी संपत्ति पार्टी को समर्पित कर रहा हूं। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन जनता के सहयोग से ही मजबूत होगा। यह आंदोलन धन के अभाव में नहीं रुकेगा। बिहार के लोग भी कम से कम 1,000 रुपए जन सुराज को दान करें। यह आंदोलन बिहार के भविष्य को बदलने के लिए है।
मौन उपवास के बाद पीके का बड़ा ऐलान
बिहार में 238 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ने के बावजूद एक भी सीट न मिलने के बाद प्रशांत किशोर लगातार आत्ममंथन में लगे हुए हैं। मंगलवार को उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि इतनी मेहनत के बाद भी बिहार की जनता तक जन सुराज का संदेश पूरी ताकत से क्यों नहीं पहुंच सका, इस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। इसी आत्ममंथन की प्रक्रिया के तहत उन्होंने बुधवार को पश्चिम चंपारण के भितिहरवा स्थित गांधी आश्रम में मौन उपवास भी रखा।
बिहार में NDA की ऐतिहासिक जीत से विपक्षी दल निराश
पीके की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब बिहार में NDA की ऐतिहासिक जीत के बाद विपक्षी दलों में चुनावी हार के बाद निराशा की स्थिति है। चुनावों में करारी शिकस्त के बाद प्रशांत किशोर ने हार को आत्ममंथन और त्याग के अवसर में बदलने का फैसला लिया है। उनके इस कदम ने राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है। क्योंकि भारत की राजनीति में नेता आमतौर पर संपत्ति जोड़ने की बात करते हैं, जबकि यहां पीके अपनी पूरी संपत्ति छोड़कर आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं। बता दें कि गुरुवार को पीएम मोदी की मौजूदगी में बिहार में नई सरकार में नीतीश कुमार ने 10वीं बार सीएम पद की शपथ ली थी।